मुझे याद है जो कभी हुआ नहीं

ए मेरे दिलरुबा, ए मेरी हमनशीं,मुझे याद है जो कभी हुआ नहीं | इसमें मेरी कोई खता नहीं,कभी मंज़िल नहीं मिली, कभी राह नहीं | पत्थर बना दिया उसने प्यार में,ना वाह निकली, ना निकली आह कभी | मेरे साथ हुआ यह हादसा,हुए सब पराये जो थे आशना कभी | तुने सब गिरा दिए मीनार … Continue reading मुझे याद है जो कभी हुआ नहीं

गुलचछर्रे

वाह! वाह ! गुलचछर्रे उड़ाओ यार,खुश रहो, आज है इतवार ।ना हो जीत से मतलब, ना निस्बत-ए-हार,चलता है, this is all बेकार,खुश रहो, आज है इतवार ।ना करो गंदगी, ना सहो अत्याचार,सिर्फ़ be a good human, बरखुरदार,खुश रहो, आज है इतवार ।कम करो घृणा, अधिक करो प्यार,खुश रहो, आज है इतवार ।जीवन में बहुत हो … Continue reading गुलचछर्रे

तू से तुम, तुम से आप

शब्द तुम्हारे डसते है मुझे,तुम इंसान हो या साँप ? आप नहीं, तुम ही रहने दो,मत दो मुझे यह श्राप । कुत्ते को घी हजम नहीं होता ।इतनी इज़्ज़त !बाप रे बाप ! तू से तुम, तुम से आप ।क्या कर रहे हो बाप?

कौन है वह ?

कौन है जो मोहब्बत बांट रहा है ?पता तो करो ।कौन है जो ग़म बांट रहा है?पता तो करो ?सब को गले लगा रहा है, प्रेम की बोली बोल रहा है ।मन निर्मल है, होटों पर सच है ।इतना घातक प्राणी इस जहान में, हाय रब्बा !कौन है वह अजब?पता तो करो

मन का समुंदर

मन के समुंदर की गहराइयां बोलती है ।कोई नहीं बोलता जब तन्हाइयां बोलती है ।हर जुर्म की सज़ा मिलती है यहां,कोई नहीं बचता जब गवाहियां बोलती है ।जिंदगी की धूप भी अजब है ।अंधेरों में परछाइयां बोलती है ।जब दर्द हद्द से गुज़र जाता है,चीख-चीख के रुसवाइयां बोलती है ।

मरने से पहले तू मर ना

मरने से पहले तू मर ना ।किसी से भी तू डर ना ।नारी तू है भारी,तू सर्वशक्तिशाली ।तू महाकाली ।तू प्रेम, इश्क़, है प्यार तू ।पापी का करती संहार तू ।तू बीज, है विस्तार तू ।इस भ्रमाण्ड का श्रृंगार तू ।आँख कटीली, बाल लंबे,तू गैरी, दुर्गा, स्कंद और अंबे ।वह शिव है तो तू है … Continue reading मरने से पहले तू मर ना

सिर्फ़ तू ही मेरा यार है

सब ठीक हो, मुकम्मल हो,ऐसा होने को मन बेकरार है ।तुम जो भी सज़ा दे दो,अब तन, मन, धन, तैयार है ।लंबी उम्र की ख्वाइश नहीं मुझे,जो बीते सुंदर गुज़रे ।यह रोज़-रोज़ हसद के झगडे,अब मुझे नागवार है ।में नहीं आलिम, में नहीं बे-ऐब,भले मैं रांझा, रोमियो, ससी, मिर्जा या फरहाद,पर तुझसे अमर प्रेम का … Continue reading सिर्फ़ तू ही मेरा यार है

आओ, बात करें

आओ, बात करें !के बात करने से ज़िंदगी सुधर जाएगी ।खुशी दुगनी और दुःख कम हो जाएगा ।आओ, बात करें !बातों से एक नया दृष्टिकोण मिलेगा ।बातों से एक नयी राह मिलेगी ।आओ, बात करें !सब इतना बुरा भी नहीं है, सब इतना अच्छा भी नहीं है ।बस यही चितकब्रों में ही सारा जीवन है … Continue reading आओ, बात करें

एक था दानव

एक था दानव ।नाम था उसका मानव ।छल-कपट की कला थी चट्टान जैसी,हृदय से था वह पालव ।बातें थी उसकी दल-दल सी गाढ़ी ।दिमाग में था तानव ।निपुण व्यापारी था, खरीदें बेचने का पंडित ।बेच दिया सारा संसार एक दिन उसने,बन गया महामानव ।फ़िर, अचानक से उसकी आँख खुली ।देखा तो वह था केवल एक … Continue reading एक था दानव

Public Interest में जारी

यह public interest में जारी है ।ध्यान से पढ़ो !तिरंगा सीने पर भी हैं और थूक भी रहा है ।सेहत की बातें भी करता है और फूंक भी रहा है ।जज़्बा है कानून मानने का भी और चूक भी रहा है ।मन में तिरंगा बसा भी है और लूट भी रहा है ।उफ़ !यारों, one-day … Continue reading Public Interest में जारी

शराब

आज परस्पर शराब पीयेंगे मैं और तु |और फ़िर मृदुल भाव से करेंगे गुतुर्गु | साक़ी तेरे मैकदे का दरवाज़ा कभी ना बंद हो |सब आओ, जग भी लाओ, पीकर बोलो हाला हु | चाँद के ऊपर बैठकर हम पीयेंगे ऐसी है कल्पना |जीवन थोडा है, प्यास बड़ी, खत्म हो दौर है आरज़ू | तु … Continue reading शराब

पुस्तक

रात दरवाज़े पर हुई दस्तक,देखा तो थी एक पुस्तक |मैंने उसे अंदर बुलाया, पानी पिलाया |उसने भी प्रेम से मेरा दामन भर दिया |रत गहरेरी थी पर पुस्तक ने उजाला कर दिया था |अपने ज्ञान को सांझा कर दिया था |बात कठिन थी,पर पहुंची दिल से दिल तक |जैसे क़यामत से क़यामत तक |रात दरवाज़े … Continue reading पुस्तक

उस रात मैं बहुत रोया

उस रात मैं बहुत रोया ।जिस रात मैने उसे खोया ।उस रात मैं बहुत रोया । वही पाया जो बीज बोया ।उस रात मैं बहुत रोया । उसके पैरों पर था मेरा शीश,उसने देखा भी नहीं, संभाला भी नहीं ।एक विषक्त डंक ने सब कुछ डुबोया ।उस रात मैं बहुत रोया । मांग भरी थी मैंने … Continue reading उस रात मैं बहुत रोया

फासले

फासले इतने बढ़ गए की तु से आप हो गये |इतनी दुर आ गए की अगस्त्य से जनाब हो गये | सबको मिली सज़ा बारी-बारी |ख़्वाब जितने थे सारे तारीफ़ से अज़ाब हो गये | कभी कोई फूल खिला ही नहीं |वह उल्फ़त के बीज खाद से तेज़ाब हो गये | उज़्र इतने है ना … Continue reading फासले

बड़ा फ़राख़ दिल है यार

बड़ा फ़राख़ दिल है यार,उसने अपनी सारी नफ़रत मुझपर लुटा दी | बड़ा फ़राख़ दिल है यार,करता है दुश्मनी भी मुरव्वत की तरह | बड़ा फ़राख़ दिल है यार,छोटी गलती की भी सज़ा बड़ी देता है | बड़ा फ़राख़ दिल है यार,मेरे दिल के टुकड़े किये उसने बड़े ख़ुलूस से | बड़ा फ़राख़ दिल है … Continue reading बड़ा फ़राख़ दिल है यार

क्या बात ! क्या बात !

फ़िर दिन से रात,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! चांदनी रात,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! हसीन कायनात,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! पहली मुलाक़ात,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! प्यारी शुरुवात,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! हाथ में हाथ,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! साथी तेरा साथ,उफ़…क्या बात ! क्या बात ! जनम-जनम की … Continue reading क्या बात ! क्या बात !

ऑसम मौसम

काले बादलों के बीच एक टुकड़ा चाँद का दिखा,और एक चाँद का टुकड़ा मेरे पास भी है |हवाएं कुछ प्यार की कहानी कहती है |फूल नशीली बातें करते है |बड़ा सही है मौसम,ऑसम मौसम ! आ गले से लग जा मेरे जीवनसाथी, आजा |दिसंबर की सर्दियों में आग लगा जा |इस मुलाक़ात को याद बना … Continue reading ऑसम मौसम

देखो तो ज़रा

दिल में कयीं जाले है, देखो तो ज़रा |कितने दर्द पुराने है, देखो तो ज़रा | बहुत ज़ख्म खाके बनते है आलिम,कुछ पैंतरे सयाने है, देखो तो ज़रा | शायद नर्क से ही अगला जनम हो,कुछ पाप निराले है, देखो तो ज़रा | कोई चाल चल के बात आगे बढे,जीवन शतरंज के खाने है, देखो … Continue reading देखो तो ज़रा

आज मैं शराब पर चढ़ना चाहता हूँ

आज मैं शराब पर चढ़ना चाहता हूँ |बिखरना चाहता हूँ |फिसलना चाहता हूँ |झरने की तरह गिरना चाहता हूँ |गरजना चाहता हूँ |बरसना चाहता हूँ |बादलों की तरह उड़ना चाहता हूँ |गीत गाना चाहता हूँ |गुनगुना चाहता हूँ |सागर की तरह गहरा बनना चाहता हूँ |याद आना चाहता हूँ |भूल जाना चाहता हूँ |आंसू की … Continue reading आज मैं शराब पर चढ़ना चाहता हूँ

शराब

यारों, ऐसा काम ना करो | शराब को बदनाम ना करो | यह सबकी परेशानी लेती है |इसे परेशान ना करो |शराब को बदनाम ना करो | कुछ ख़ास मौकों के लिए है | बेवक्त इसका इंतज़ाम ना करो |शराब को बदनाम ना करो | सस्ते नाम देकर,इसकी कम शान ना करो |शराब को बदनाम … Continue reading शराब

ख़ाली

ख़ाली जाम, ख़ाली प्याला, ख़ाली खयाल ।एक बूंद भी नहीं मैखाने आज, इतना छोटा जीवन, इतना लम्बा अंतराल ।कुछ नहीं, सिर्फ़ एक मायाजाल | इतना छोटा जीवन, इतना लम्बा अंतराल ।कुछ नहीं, सिर्फ़ एक मायाजाल | अब संगीत में भी खालीपन है |ख़ाली बोल, ख़ाली धुन, ख़ाली सुर-ताल सब रोनक चली गयी और ख़ाली है … Continue reading ख़ाली

मुश्किल है पर मुमकिन है

ज़िंदगी में ज़िंदा रहना मुश्किल है |मुश्किल है पर मुमकिन है |आसान है सबके बारे में बोलना,अपनी निंदा करना मुश्किल है |मुश्किल है पर मुमकिन है | एक ही बाज़ू देखते रहतें है अक्सर,हाँ, मैं जानता हूँ,दूसरी बाज़ू देखना मुश्किल है |मुश्किल है पर मुमकिन है |जब तपता है मन खुद की निंदा में,या ईशनिंदा … Continue reading मुश्किल है पर मुमकिन है

दर्द को आवाज़ बना लो

दर्द को आवाज़ बना लो |अंत तो आगाज़ बना लो | दुनिया शायद सुन ले,चीख़ को साज़ बना लो | जैसा करोगे, वैसा भरोगे,मुर्रव्व्त को रिवाज़ बना लो | खुश रहना हो जो तुम्हे,खुशनुमा मिज़ाज बना लो | याद आये जो बचपन, अजब,कागज़ का जहाज़ बना लो |

फ़िरक़ा

समाज के लिए,सवेग के लिए,या अपने स्वार्थ के लिए,या पुरुषार्थ के लिए,फ़िरक़ा बनाया तुने |क्या फ़िरक़ा बनाया तुने !क्यों फ़िरक़ा बनाया तुने ? बोत-हार्ड बनाया,काफ़ी नाम कमाया |कोई साज़िश के लिए,या अपनी परिस्तिश के लिए,फ़िरक़ा बनाया तुने |क्या फ़िरक़ा बनाया तुने !क्यों फ़िरक़ा बनाया तुने ? तेरे से है हसद के लफड़े,कॉस्मिक-भसड, जुगाड़-झगडे |तु इंटरनेट … Continue reading फ़िरक़ा

दिल का

मेरी ग़ज़ल तराना है दिल का |यह बातें फ़साना है दिल का | बदल दो धंधा !नहीं चलती दिमागों की दुकाने,अब यह ज़माना है दिल का | जिएँ तो जिएँ कैसे ?सहज, सजग रहने में आसानी है,यह रास्ता पुराना है दिल का | शुक्रिया ख़ुदा !ऐसी कोई शोहरत नहीं दिखती पर,बहुत है ख़ज़ाना यह दिल … Continue reading दिल का

अकाल, अनाद, अरूप

वह कहते है मुझसे की मूर्ति नहीं रखते हो ?क्या भाई, इश्वर पर विश्वास नहीं रखते हो ?मैं कुछ यह कहता हूँ कि,अकाल, अनाद, अरूप,यही मेरे ख़ुदा का रूप | हर राह में राह है,हर जगह अल्लाह है,वह है हर जगह, उसका ही वंश इंसान है,उस कृपालु को मूर्तियों, किताबों में क्या ढूँढना ?कण-कण में है … Continue reading अकाल, अनाद, अरूप

सूफ़ी कलाम

मसर्रत भी है, अज़ीयत भी है |कुछ शायराना मेरी तबियत भी है | ज़िंदगी मेरी गोया फ़साना है कोई,कुछ तसव्वुर, कुछ हकीक़त भी है | सिर्फ़ ज़रुरत नहीं फ़िलहाल ख़ुदा की,रूह की तलाश की अव्वालिय्यत भी है | मिलती तो रोज़ है मुझे, लेकिन,कुछ रानाई भी, कुछ ग़ैरियात भी है | दिल मेरा गोया मज्बह … Continue reading सूफ़ी कलाम

कितना ख़ामोश यह पानी है

कितना ख़ामोश यह पानी है |सबकी अपनी-अपनी कहानी है | कोई ना जाने इसका राज़,यह कहानी किसी ने ना जानी है | जो दिल में है वह कह दो आज |यहाँ कोई नहीं जो अंतर्यामी है | प्यार, इश्क, मोहब्बत है काफ़ी,ज़िंदगी फानी है, आनी है, जानी है | यह ग़ज़ल अजब है पर मेरी … Continue reading कितना ख़ामोश यह पानी है

करके देख

अपने आप को खुद के हवाले करके देख लिया |अब अपने आप को साक़ी के हवाले करके देख | तू जीता-मरता रहा, किसी और की मर्ज़ी से,अब कुछ नया, कुछ नए तरीके से करके देख | बहुत पी लिए अश्क़ तूने जाम समझकर,अब जान अपनी उस जाम के भरोसे करके देख | कितना कुछ बाकी … Continue reading करके देख

शायद

याद नहीं, स्कूल था या कॉलेज |शायद, कोई एक, या दोनों,शायद, ज़िंदगी ज़िंदा होना सीख रही थी | शायद, पहला प्यार था,शायद, पहला करार था,शायद, धड़कन धड़कना सीख रही थी | उसके नाम का पहला अक्षर याद है |शायद, उसी से बिस्मिल्लाह करता था,शायद, वही मेरी पूजा थी,शायद, परस्तिश इबादत सीख रही थी | हम … Continue reading शायद

ज़यादा मज़ा आया

ज़िंदगी का जब मज़ाक बनाया,ज़यादा मज़ा आया |दर्द-ओ-ग़म का जब मज़ाक बनाया,ज़यादा मज़ा आया | रोने से कुछ नहीं हुआ हासिल,रोने का जब मज़ाक बनाया,ज़यादा मज़ा आया | एक अर्जे से दिल वीरान था |तन्हाई का जब मज़ाक बनाया,ज़यादा मज़ा आया | इश्क़-नफरत, इल्म-गफ़लत, कैफ़ियात-इबादत,दोनों में उलझन थी |दोनों का जब मज़ाक बनाया,ज़यादा मज़ा आया … Continue reading ज़यादा मज़ा आया

एक आम आदमी

वेद पढ़ी, क़ुरान पढ़ी,लोगों की रटाई हुई बातें रटी |पर नहीं कटी,जैसे चाहता था उम्र को | क्यूँ नहीं ? कंकर में है शंकर,यहाँ ख़ुदा, वहाँ ख़ुदा |सब अंदर है |पता तो था, फ़िर भी,अपनी सिली-सूखी जेब के फटे-गीले नोट,को ज़रिया बनाया | क्यूँ बनाया ? दिन अब कम है,इतने सारे क्यूँ का क्यूँ जवाब … Continue reading एक आम आदमी

मज़ा कुछ और है

फ़िर ट्रेन में लटककर जाने का मज़ा कुछ और है | वह उम्र भी मस्त थी, इस उम्र का मज़ा कुछ और है | रगों में चालीस के कीड़े दौड़ रहे है | मज़ा पहले भी था पर अब मज़ा कुछ और है | शराब की बोतल ही अपना स्विमिंग पूल थी, अब शराब को … Continue reading मज़ा कुछ और है

निर्मम

कुछ आंसूं जो बहे नहीं | कुछ दर्द जो कहें नहीं | सुनाते है कहानी, कहानी बड़ी है निर्मम | अगर दिल में धड़कन बाकी है तो सुनना | अगर इंसानियत में लगन बाकी है तो सुनना | अगर थोड़ी मजाल बाकी है तो सुनना | कहानी बड़ी है निर्मम, अगर कुछ सवाल बाकी है … Continue reading निर्मम

बिछड़ा यार नहीं मिला

मंदिर गया,मस्जिद गया,वेद पढ़े,कुरान रटी,इधर गया,उधर गया,धागा पहना,तावीज़ पहनी,घंटी बजायी,माला जपी,मोमबत्ती जलाई,गुरबानी सुनी,तस्बीह की,सजदा किया,नंगे पैर चला,उजली सोच रखी,काला जादू किया,गंगा नहाया,सबके काम आया,पर बिछड़ा यार नहीं मिला | मंदिर गया,मस्जिद गया,वेद पढ़े,कुरान रटी,इधर गया,उधर गया,धागा पहना,ताफीज़ पहनी,घंटी बजायी,माला जपी,मोमबत्ती जलाई,गुरबानी सुनी,तस्बीह की,सजदा किया,नंगे पैर चला,उजली सोच रखी,काला जादू किया,गंगा नहाया,सबके काम आया,पर यार के … Continue reading बिछड़ा यार नहीं मिला

यार भगवान

यार भगवान, प्लीज़ मेरी मान | नहीं जीना बनकर हिंदु-मुसलमान | चला कोई चक्कर एसा, बस जी सकूँ बनकर इंसान | गीता, कुरान मुझे नहीं आती, मैं तो गाता हूँ सिर्फ़ प्रेम के गान | मुझे तो ना टैग करो धर्मं से, धर्मं के ज्ञान से है सब अज्ञान | यार भगवन प्लीज़ मेरी मान … Continue reading यार भगवान

एक नुस्ख़ा है

एक नुस्ख़ा है !इसका है, उसका है |मगर काम पक्का होगा |आज नहीं तो कल अच्छा होगा | एक नुस्ख़ा है !गरुड़ की आँख,आदमी की राख़,छिपकली की पूछ,पानवाले की मूछ,मंत्री की कुर्सी की टांग,मुर्गे की बांग,संत्री की लाल बत्ती,दुश्मनों की कट्टी,इन सबको एक मटके में भरो,और धीरज धरो | फ़िर डालो खुन्नस,पिला-मीठा अनानास,राम-रहीम-इसा-मूसा,संसानासन-सुसा-सुसा |दांडी का … Continue reading एक नुस्ख़ा है

बुराई

बुराई आग है | बुराई नाग है | रावण को मारने से बुराई नहीं मरती | कौरवों के खत्म होने से बुराई नहीं खत्म होती | बुराई बीज है | बुराई हमेशा थी, हमेशा रहेगी | बुराई रीत है | बुराई बदतमीज़ है | बुराई संस्कार है, शरीर नहीं | बुराई सोच है, ग़रीब या … Continue reading बुराई

आतंक

काली, बेहाल, ज़िहाल है आतंक | क़यामत का यह हाल है आतंक | कोई रंजिश, कोई मलाल है आतंक | कितना कमीना कमाल है आतंक | ज़िंदा मुर्दों की लाश है आतंक | कोई दरिंदे का काश है आतंक | एक अंधी सी तलाश है आतंक | इंसानियत का सर्वनाश है आतंक |

सालों ! जागो !

सालों ! जागो ! सालों से सो ही रहे हो | बातों में खो ही रहे हो | सालों ! जागो ! आग जो लायी थी हमने, नफ़रत की, वह अब हमें ही जला देगी | वह अब हमें ही दागा देगी | सालों ! जागो ! धंधा बना रखा है, यार, बस सिर्फ़ एक … Continue reading सालों ! जागो !

एक मुट्ठी राख़

छोटा सा जीवन है,छोड़ो घमंड जब होना है ख़ाक |तुम कौन हो ?एक मुट्ठी राख़ | ना मैं कुछ, ना मेरा कुछ,समझ गया मैं यह बात |मैं कौन हूँ ?एक मुट्ठी राख़ | एक पल में शुन्य हो जायेगा,जो बनता है बेबाक |वह कौन हैं ?एक मुट्ठी राख़ | कब शुरू, कब ख़त्म,ना मिलेगा जिंदगी … Continue reading एक मुट्ठी राख़

रंडी

अगर लगती है यह गाली गंदी,सोचो किस हाल में जीती है रंडी | शाम का वक़त है |मर्द का दिल सख्त है |गालियाँ-शोर और भूखी निगाहें,क्या-क्या नहीं सहती है रंडी ? कभी शिकार है |कभी व्यापार है |कोठे की वह झंकार है |दिन-रात नाचायी जाती है रंडी | कहाँ से आती है यह ?कोई खेल … Continue reading रंडी

महाभारत

हर युग में,हर शतक में,हर दशक में,हर साल,हर दिन,हर क्षण,महाभारत होती रहेगी । कभी ज़र के लिए,कभी ज़मीन के लिए,कभी औरत के लिए,कभी दौलत के लिए,कभी सच के लिए,कभी गर्व के लिए,कभी लालच के लिए,कभी कुर्सी के लिए,महाभारत होती रहेगी । दीन में,धर्म में,झोपडी में,महल में,घर में,दफ्तर में,रास्ते मैं,रिश्तों में,भीड़ में,अकेलेपन में,खुद अपने अंदर में,महाभारत … Continue reading महाभारत

नाम हर किसी का बदल जाता है

नाम हर किसी का बदल जाता है। शारीर से प्राण निकलते ही इंसान बॉडी बन जाता है। चकाचौंद दुनिया का डूबा तारा नोबॉडी बन जाता है। नाम हर किसी का बदल जाता है। मुसीबत में फसा दोस्त भिखारी बन जाता है। अधिक माल मिलते ही इंसान अधिकारी बन जाता है। नाम हर किसी का बदल … Continue reading नाम हर किसी का बदल जाता है

दादर

जब धड़कने रुक जाए, होश उड जाए, पसीने छुट जाए, शरीर कांप जाए, खून सूख जाए, चैन खो जाए, इज्ज़त का कचरा हो जाए, आँख से समुंदर आ जाए, रग-रग में करंट दौड़ जाये, खून खौल जाए, भूखे भेडिये नज़र आये, क़त्ल करने का मन बन जाए, कोई उम्मीद नज़र ना आये, इंसानियत से भरोसा … Continue reading दादर

मेरा सिर्फ़ मैं हूँ

चारों और खबर है | कम हुआ इंसानी सब्र है | लोग लड़ रहे है, मर रहे है | हिंदु-मुस्लिम भीड़ रहे है | बच्चे बिगड़ रहे है | मुझे क्या ? मेरा किसी से रिश्ता नहीं | मेरा कोई नहीं | मेरा सिर्फ़ मैं हूँ | देश में आग लगी है | शराफ़त भाग … Continue reading मेरा सिर्फ़ मैं हूँ

Ghazal, Fame, and Tragedy

I don't think any music lover would need the introduction of Jagit Singh and Chitra Singh. This duo was the most popular one in the 70s-80s in the world of non-film music; especially ghazal. Jagjit Singh is the man who simplified and popularized this genre of music. https://www.youtube.com/watch?v=__uS4BJ9MK8 I don't know of any family who didn't … Continue reading Ghazal, Fame, and Tragedy

बस इतना ही ना ?

तो क्या हुआ ? बस इतना ही ना ? कोई नहीं होगा, हम-तुम अकेले जी लेंगे | बस इतना ही ना ? आँगन में फूल कहाँ है ? घर में आँगन कहाँ है ? पर घर ही कहाँ है ? घर के आभास से फ़िलहाल जी लेंगे | बस इतना ही ना ? अपने आप … Continue reading बस इतना ही ना ?

अपनी चीख़ें

रात काली है |ख़ुदा !ख़ुदा !ख़ुदा !ज़िंदगी गाली है |आग में दिल है |यार !यार !यार !दर्द में दिल है | कुछ तारीखें मैंने अब तक संभाल के रखीं है |अपनी चीख़ें मैंने अब तक संभाल के रखीं है | तब चुप रहा |चुप !चुप !चुप !ज़माना चुप रहा |खून की होली थी |होली थी … Continue reading अपनी चीख़ें

यह ज़मीन कितनी भूखी है

कितना बड़ा ज़ख्म दिया गहरा | यह ज़मीन खा गयी यार मेरा | वक़्त की कितनी बद्सलुखी है | यह ज़मीन कितनी भूखी है | ना जाने कितने थे वह कलंदर, सबको ले लिया अपने सीने के अंदर | इसकी अदा कितनी रूखी है | यह ज़मीन कितनी भूखी है | अब नाजाने किसकी बारी … Continue reading यह ज़मीन कितनी भूखी है

The Never-ending Ghazal Wave of India

Ghazal is a form of poetry. It’s my favorite and I remember listening to this poetry form since my childhood; thanks to my father. A ghazal may be understood as a poetic expression of both the pain of loss or separation and the beauty of love; despite that pain. But a ghazal has several facets and has … Continue reading The Never-ending Ghazal Wave of India

आपने फाड़ दी

सुना है के आपने फाड़ दी | एक मिसाल, बेमिसाल गाड़ दी | सब फ़कीरों की निकल पड़ी, ज़रा सी जो आपने जेब झाड दी | अब कोई नहीं होगा ग़म में, आपने ग़म की जड़ उखाड़ दी | कोई ना बचा पुरे मोहल्ले में, अजब, आपने तो सारी लड़कियां ताड़ दी |

नंगी रात में एक कहानी अकेली खड़ी थी

नंगी रात में एक कहानी अकेली खड़ी थी | एकदम नंगी | भीड़ के दिमाग सी नंगी | दरिंदो के सोच सी नंगी | गरीब के छत सी नंगी | बिना चश्मों की आँख सी नंगी | राजकारण सी नंगी | एकदम अकेली | मासूम गरीबी सी अकेली | सच्ची इंसानियत सी अकेली | भूक … Continue reading नंगी रात में एक कहानी अकेली खड़ी थी

जैसा कल रात हुआ था

फ़िर कभी ना हो जग में, जैसा कल रात हुआ था | इतना ना हो परेशान दिल, जैसा कल रात हुआ था | वक़्त कठिन है, राह में फिसलन है | कहीं लुट जाए ना जवानी, जैसा कल रात हुआ था | दुश्मन के पंजे बड़े है, पैने है | गिर मत, संभल | जैसा … Continue reading जैसा कल रात हुआ था

इसलिए यह ग़ज़ल सुनाने आया हूँ

कुछ फुल सुहाने लाया हूँ | तुम्हे मनाने आया हूँ | मैं जानता हूँ के तुम कौन हो, इसलिए यह ग़ज़ल सुनाने आया हूँ | शर्माओगी तो ज़रूर, लाज़मी है | घब्राओगी भी थोडा, शायद ! पर सुरूर तो बोहोत आयेगा जनाब, तुमको, तुमसे थोडा सा चुराने आया हूँ | इसलिए ये ग़ज़ल सुनाने आया … Continue reading इसलिए यह ग़ज़ल सुनाने आया हूँ

जादुई प्राणी

सुना है, इस जग में भांति-भांति के प्राणी है | पर मैंने एक जादुई प्राणी देखा है | सच में ! मैंने एक जादुई प्राणी देखा है | पांच साल में एक बार आता है | फ़िर ग़ायब हो जाता | पांच साल के बाद, फ़िर एक बार आता है | मैंने एक जादुई प्राणी … Continue reading जादुई प्राणी

ज़िंदगी यूँ है फसी

हालत पर हमारी आती है उन्हें हँसी | क्या करें ? ज़िंदगी यूँ है फसी | ना है आँखों में आँसू, ना होठों पे हँसी, ना रात को चैन, ना दिन को सुकून | जलाते रहते है अपने दिल का खून | पीसते रहते है अपने आप में हम, दिल वीरान है, सौ है ग़म … Continue reading ज़िंदगी यूँ है फसी

ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं

जिसने मुझको चाहा उसका ना हो सका,जिसे मैंने चाहा वह मिला ही नहीं |फ़िर आगे हौसला हुआ ही नहीं,ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं | एक रात जो हर दिन को खा गयी |नाजाने अकस्मात कहाँ से आ गयी ? ऐसा बंजर किया चमकते गुलिस्तां को,दरख्तों पर फ़िर घोसला हुआ ही नहीं |फ़िर आगे … Continue reading ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं

ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल

ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है | मगर मुझे तेरा ख़याल तो है | तूने मेरा ही घर चुना जलाने को, मुझे तुझसे यह सवाल तो है | ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है | अँधेरा कब से मेरे इंतज़ार में है | मेरे हाथ में अभी मशाल तो है | ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल … Continue reading ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

ज़िंदगी हमे यह कहाँ ले आयी ?खुश थे जहाँ से ले आयी |गुज़रे दिनों की धुप थी क़बूल,क्यों बारिश कहाँ से ले आयी ? किसी अटके हुए पल की तरह |किसी माथे की बल की तरह |किसी सवाल-ए-बेहाल की तरह|किसी जले हुए काल की तरह | गोया खींच के वहाँ से ले आयी,खुश थे जहाँ से ले … Continue reading ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

यही मेरी रज़ा है

मेरे ख़ुदा, यही मेरी रज़ा है | मेरी माफ़ी ही मेरी सज़ा है | रिहाई में काफ़ी तनहा था, अब यही सज़ा में मज़ा है | सिर्फ़ एक इशारे ने बदल दिया, क्या खूबसूरत ये फ़िज़ा है ? बना रखी थी दुनिया को रखैल, अब मेरी नियत बिलकुल पाकिज़ा है | पहले एक ही पत्थर … Continue reading यही मेरी रज़ा है

याद है मुझे

याद है मुझे, वह मुलाक़ात आखरी थी | तेरे-मेरे बीच में वह बात आखरी थी | तूने मुझे उठवा लिया दुनिया से, मुझे याद है, वह कायनात आखरी थी | तेरे ख़ल्क़ मैं नागवार ही रहा, तेरी बनायीं हुई मख़लूक़ात आखरी थी | तेरे ही जलवों पर सब लूटा दिया, मुझे याद है, वह इल्तिफ़ात … Continue reading याद है मुझे

या तुम थी ?

यह मेरे बिस्तर पे सिलवटें कैसी, रात का जादू था, या तुम थी ? आ रही है जाबाज़ा दिलरूबा खुशबू, रात का जादू था, या तुम थी ? इत्र से भीगे मोहब्बत में, हर सांस से पिघल गया तन | लोहा पिघल मोम हुआ ज़मीन पर, रात का जादू था, या तुम थी ? कितने … Continue reading या तुम थी ?

वह सपना तेरा था

रंगों से बना एक सपना मेरा था |यक़ीन है, वह सपना तेरा था | लाल उँगलियों से बनायीं था जो चित्र,यक़ीन है, वह सपना तेरा था | हर रंग में मेरे सपने खिल गए |कहीं राह में हम-तुम मिल गए | आँखें बंद करते ही जो सामने आया,यक़ीन है, वह सपना तेरा था | मेरे … Continue reading वह सपना तेरा था

प्रतिष्ठा

कभी सर, कभी ईमान, प्रतिष्ठा | कभी जान, कभी जहान, प्रतिष्ठा | कभी गुरूर, कभी हट, कभी अश्लील, कभी मगरूर, कभी मिथ्या, कभी घायल, प्रतिष्ठा | मेरी प्रतिष्ठा, मेरी प्रतिष्ठा | तेरी प्रतिष्ठा, तेरी प्रतिष्ठा | कभी झूठ, कभी कमाल, प्रतिष्ठा | अधनंगे बदन की छवि, प्रतिष्ठा | ज़ुल्मों से दबी, प्रतिष्ठा | राजपूतों के … Continue reading प्रतिष्ठा

उफ़क़ के उस पार

चांदिनी रात है, सोने की कायनात है, एक नया जहान है उस पार | मुस्कुराते दिन है, ख़ुशी के पल है, हर राह की मंज़िल है | उफ़क़ के उस पार | कौन जिये इस बेक़द्र जहान में बेसबब ? जाने कहाँ जाएँ कैसे, कहाँ और कब ? आओ इंसानियत को ले जाते हैं दूर … Continue reading उफ़क़ के उस पार

तुम वही हो ना ?

तुम वही हो ना ? वही हो ना ? जो गीत थी, प्रीत थी | संग थी, तंग थी | आती थी, जाती थी | मेरे दिल तो तडपाती थी | तुम वही हो ना ? वही हो ना ? आँख का नूर, दिल से क्रूर | थोड़ी पास, थोड़ी दूर | कुछ कायर, कुछ-कुछ … Continue reading तुम वही हो ना ?

तुझे मिलने को चाहे यह मन

आज मौसम है सुहाना, आजा करके कोई बहाना | तुझे मिलने को चाहे यह मन, तुझे छूने को चाहे यह मन | आजा, यूँ ना दिल दुखाना, तेरा मर जायेगा दीवाना |तुझे मिलने को चाहे यह मन,तुझे छूने को चाहे यह मन | सुन यह सदा फ़िज़ाओं की, खिला दे मेरी यह ज़िंदगी खिज़ाओं सी … Continue reading तुझे मिलने को चाहे यह मन

तुम ही मिलते तो अच्छा था

जहाँ फुल खिलते है, वहीँ खिलते तो अच्छा था | तुम से ही प्यार किया था, तुम ही मिलते तो अच्छा था | तुम ही हमसफ़र बन कर, साथ चलते तो अच्छा था | तुम से ही प्यार किया था, तुम ही मिलते तो अच्छा था | ज़ख्म जो तेरे प्यार के, जल्दी ही सिलते … Continue reading तुम ही मिलते तो अच्छा था

तुझसे पहले भी

मैंने देखें है कईं ज़माने रंगों के, मैंने हर साल कईं होली खेली थी | तू नहीं मेरे जीवन में पहली, तुझसे पहले भी एक पहेली थी | हर शाम शमा बुझती थी, हर शाम पिघलता था लोहा मेरा | हर शाम बदन की खुशबू आती, हर शाम बिस्तर पर सजता सेहरा मेरा | मैं … Continue reading तुझसे पहले भी

तुझसे मिलने की आरज़ू

तुझसे मिलने की आरज़ू तो बहुत थी, लेकिन, तेरे दरवाज़े तक आये हम औए रुक गए | सीना चौड़ा था तेरे इश्क़ में, लेकिन, मार गुरूर की ऐसी पड़ी के झुक गए | वह सामने बैठा है, मेरा नहीं, लेकिन, क़यामत ऐसी के टूट सब ताल्लुक गए | काम ना आयी सब सीखी तीरंदाज़ी, अजब, क़ातिल … Continue reading तुझसे मिलने की आरज़ू

तुझे देखा

कईं बार मैंने तुझे देखा, सोहने यार मैंने तुझे देखा | पर्बत की ऊचाइयों में, समुंदर की गहराईयों में तुझे देखा | जाम-ए-फना-ए-बेखुदी पीकर, पैमाने में तुझे देखा | इसतराब-ए-इंतज़ार में, मैंने हवाओं में तुझे देखा | फूलों की खुशबू में, माहताब की चांदिनी में तुझे देखा | धड़कन और साँसों में देखा, पंछी बन … Continue reading तुझे देखा

तू ही मेरा प्यार

यार, यार, यार, तुही मेरा यार | तू ही मेरी ज़िंदगी, तू ही मेरा प्यार | तेरी नज़रों में क़ैद रहुँ, यही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी ज़िंदगी, तू ही मेरा प्यार | मेरी साँसों में है तेरी खुशबू , तू ही मेरे जीवन का सार | हाथ ना छूटे, साथ न छूटे,तू ही मेरी … Continue reading तू ही मेरा प्यार

तो क्या होता ?

कागज़ के पंख लगा कर,मेरा प्यार वाला पंछीगिरता नहीं तो क्या होता ? तेरी मोहब्बत को बना कर ख़ुदा,लगाया सीने से मैंनेखंजर नहीं चुभता तो क्या होता ? हथेली पर लगी मेहँदी,इंसान के जैसे ही फना हो गयीनीली नहीं पड़ती तो क्या होता ? अच्छा होता,सह लेता उनकी बेवफाई,मरने से पहले |मर नहीं जाता तो … Continue reading तो क्या होता ?

तेरा कुछ

तेरा कुछ जायेगा नहीं, मेरा कुछ रहेगा नहीं | ऐसा क्यों सोचते हो की ज़माना कुछ कहेगा नहीं | आखिर सामने आ ही जायेगा वो कतरा बनकर, पानी ही सही, बह ही जाएगा, कुछ सहेगा नहीं | छलक ही जाएगा घड़ा गर ज़्यादा भरोगे, ऐसा तो होता ही नहीं के कुछ बहेगा नहीं | बात … Continue reading तेरा कुछ

तवायफ़

मैं हुँ तवायफ़, तवायफ़ मेरा नाम |दुनिया में हुँ इसी नाम से बदनाम | यहाँ की सीढ़ियाँ किसी घर में नहीं उतरती,यह बाज़ार और यह कोठा है मेरा इनाम | यह मर्द-ए-बाजार की मिलकियत है मुजरा ,बिस्तर का सफर ग़ज़ल और कथक से गुज़रा | मेरे आँगन की मिटटी से बनती देवी की मूरत,और दुनिया … Continue reading तवायफ़

तलाश

सुख की चादर ओढ़े जहाँ ज़िंदगी मुस्कुराये | अरमानों का खून ना हो, हर सपना साकार हो जाए | जहाँ अमन और प्रेम से भरा हो आकाश | एक ऐसे ही जहान की मुझे है तलाश | हम तो जहाँ गए मिली पत्थर की मूरत | देखा तो पाया इंसान में हैवान की सूरत | … Continue reading तलाश

सोचो

सोचो अगर बर्फ काली होती, गंगा खाली होती | कितना मज़ा आता अगर, अमीरी कमज़ोर और गरीबी शक्तिशाली होती | सोचो अगर दिल की जेब खाली होती, ना होठों पर गाली होती | कितना मज़ा आता अगर, पृथ्वी मेरी बीवी और चाँद मेरी साली होती | सोचो अगर पूरी थाली होती, खाने को रोटी रुमाली … Continue reading सोचो

शहर में आपके

सुना है बहुत वफ़ा है शहर में आपके | ऐसा भी क्या जादू है शहर में आपके ? मैंने तो आज़मा ली अपनी किस्मत वहाँ भी, पर संग दिल सनम है शहर में आपके | सुना है वहाँ चांदी के कमल खिलते है | पर वहाँ सादगी भरे चेहरे कम मिलते है | सुना है … Continue reading शहर में आपके

शहर है या चकला ?

जिसको देखो चला आये |यह शहर है या चकला ? खाये-पीये बत्ती बुझाए |यह शहर है या चकला ? जो चाहे वैसे खाये |यह शहर है या चकला ? इसको एक बिस्तर बनाये |यह शहर है या चकला ?

शराबी-शराबी

मुझे शराबी-शराबी मत कहो |इंसान मजबूरी में पीता है | चाहे कितनी भी अग्निपरीक्षा दे दे,दुनिया की नज़र में तो बुरी सीता है | एक ही इंसान हरिउल्लाह मिला था,कलयुग में बेचारा बेताब ही जीता है | तू भी ज्ञानी, मैं भी ज्ञानी, क्या फ़र्क?किसी की क़ुरान और मेरी किताब गीता है | कही दूर … Continue reading शराबी-शराबी

सलाम मुंबई

सर झुकेगा नही,लहू से नहाकर आएंगे |लोहे की दीवार तोड़ कर,मंज़िल तक पहुँच जायेंगे | इंसानियत है तलवार हमारी,कभी ना हम घबराएंगे |ए ख़ुदा,तेरे घर में अपना नाम-ए-शहर रोशन कर आएंगे | सलाम मुंबई !

रोज़ उनसे मुलाक़ात

रोज़ उनसे मुलाक़ात होती है |कैसे हो अजब ? — बस यही बात होती है | तर्क-ए-तालुकात ही है लेकिन,ना उनकी, ना हमारी रात सोती है | जहाँ हज़ार दिलों की लाश गिरी हो |वहीँ मोहब्बत की शिनात होती है | मेरा घर मिटटी का है इसलिए,मेरे ही यहाँ बरसात होती है | सबसे ज़्यादा … Continue reading रोज़ उनसे मुलाक़ात

रंज की महक

रंज की महक बहुत नबील होती है |यह बहुत कम लोगों को नसीब होती है | क्या मज़ा जीने में बिना दर्द के ?दर्द की परछाई बड़ी अज़ीम होती है | आज इस महफ़िल में फूल नहीं तो क्या,कांटे ही सही !क्योंकि फूल तो मुरझा जायेंगे पर कांटे नहीं | काँटों में रहकर भी जो … Continue reading रंज की महक

क़ातिल

हाय ! क़ातिल |अदाएं क़ातिल | जी रहे है हम तो,ना जाने यह हम तो,कब फ़ना हो जाएँ | सदायें क़ातिल |अदाएं क़ातिल | आजा ओढ़ ले,जिस्म में दौड़ ले,किसी को नज़र ना आयें | हवाएं क़ातिल |अदाएं क़ातिल |

प्यार हो जाएगा

खेलो ना दिल से मेरे, शीशा है टूट जाएगा |इतने प्यार से ना देखो मुझे, प्यार हो जाएगा | चलते-चलते राह में वह मिल गया, अच्छा लगा |रुख़्सार पर उसकी परेशानी थी पर सच्चा लगा | उसने मुझे जाना, मैंने उसे,हाँ, शायद वही थी सोचा था जिसे | फ़िर किस्मत ने वफ़ा दिखाई !एक बिजली … Continue reading प्यार हो जाएगा

पत्ता-पत्ता हिल गया

पत्ता-पत्ता हिल गया |दिल हमारा खिल गया | सजदा-ए-यार में,पैर मेरा छिल गया | फिर उंस की बरसात हुई,बेवफा अपना दिल गया | कोई ऊम्फ सी आज है,लगता है वह मिल गया | उसने यूँ छुआ मुझे,हर ज़ख्म सील गया | जाने क्या क़यामत हुई,वह पत्थर हिल गया | पत्ता-पत्ता हिल गया |दिल हमारा खिल … Continue reading पत्ता-पत्ता हिल गया

नज़र दूर तक जाती है

नज़र दूर तक जाती है,फ़िर भी लगता है के कुछ बाकी है |सैर-ए-गुलशन तो किये बहुत,अभी सारी कायनात बाकी है | मैं कुछ भूला नहीं,दिल पर उल्फत का निशान अभी बाकी है |अभी तो सिर्फ़ तूफ़ान आया है दोस्त,क़यामत तो अभी बाकी है | एक सितम और सही,अभी कुछ साँसें बाकी है |फुर्सत से लेंगे … Continue reading नज़र दूर तक जाती है

नहीं था

आज के दिन का इंतज़ार नहीं था |मुझे भी तुमसे प्यार नहीं था | नातरस ही सुनते थे तुम फरियाद मेरी,तुम्हारे चेहरे पर अबसार नहीं था | मुफ्त में ही तूने मुझे जुगनू बना दिया,मेरी ज़िंदगी में इतना अफसार नहीं था | अच्छी साज़िश करके तूने मुझपर बरसाया,मुझ गरीब पर पास ही कोई दार नहीं … Continue reading नहीं था

नहीं कर सकते

हम जानते है पर हम वह काम नहीं कर सकते |अब यह हाथ किसी और के लिए नहीं बड़ सकते | हमे खबर है के एक साथ या सहारा चाहिए,पर यह होंठ अब फ़िर से वही बात नहीं कर सकते | उनकी यादों की सौगात है हमारे पास,पर उन्हें हम जला नहीं सकते | राह-ए-मंज़िल … Continue reading नहीं कर सकते

नहीं देखा

कभी कोई नयी ख़ुशी को नहीं देखा |तेरे बाद फिर किसी और को नहीं देखा | सब ही मसरूफ थे अपने भ्रम में,अश्क़-ए-साद को किसी ने नहीं देखा | हर आँखें देख रही थी आतिशबाज़ी,मेरी नज़र की ओर किसी ने नहीं देखा | सिर्फ़ मशहूर हुए राँझा और महिवाल,मेरी जुर्रत को किसी ने नहीं देखा … Continue reading नहीं देखा

मुअम्मा

मैं भी मुअम्मा, तू भी मुअम्मा |जान भी मुअम्मा, रूह भी मुअम्मा | क्या नाज़ करूँ हाल-ए-ज़ीस्त का ?हक़ीक़त भी मुअम्मा, आरज़ू भी मुअम्मा | रात भी मुअम्मा, बात भी मुअम्मा |ख़ुदा भी मुअम्मा, कायनात भी मुअम्मा | इस जगह का हिसाब कितना अजब है |सब लोग मुअम्मा, हर तरफ़ मुअम्मा |

मुझे प्रश्न करे

मुझे प्रश्न करे नील ध्रुव तारा,और कितने दिन रहूँगा मैं बेसहारा | जवाब कोई भी ना दे सका मैं सिर्फ़,राह ढूंढते बीत गया यह जीवन सारा | ना जाने किसने यह प्रीत की लौ जलायी,देख के सूरज की रोशिनी भी शरमाई | अपने ही साये के पीछे घूमता रहा,एक दिन देखा के मैंने तुम्हे हारा … Continue reading मुझे प्रश्न करे

मुझे नफ़रत है

मुझे नफ़रत है,तेरे होठों के जलते सवालों से |मुझे नफ़रत है,तेरे छूट जाने के ख्यालों से | मुझे नफ़रत है,तेरी आधी-अधूरी मुलक़ातों से |मुझे नफ़रत है,तेरी सुलगती हुई बातों से | मुझे नफ़रत है,तेरे यह शक की आदतों से |मुझे नफ़रत है,तेरी यह अंधी इबादतों से | मुझे नफ़रत है,तेरे जाने-अनजाने साथों से |मुझे नफ़रत … Continue reading मुझे नफ़रत है

चुरा लाया हूँ मैं

मेरे यादों के झरोखे से,एक पल चुरा लाया हूँ मैं |इसको रखूँगा संभालकर,जो कल चुरा लाया हूँ मैं | बड़े जतन से पेड़ पे चढ़कर,दो-चार आम तोड़ लिए है |खाते है मिलकर यार,चल, चुरा लाया हूँ मैं | आजकल काफ़ी वीराना है ?शायद माया जाल का ज़माना है ?पुराने गानों के कैसेटों से,हल-चल चुरा लाया … Continue reading चुरा लाया हूँ मैं

अभी इंसान हो

दुखी हो ?परेशान हो ?पशेमान हो ? डर लगता है ?सर फटता है?दम घुटता है ? प्रेम रोग है ?प्यारा भोग है ?कठिन योग है ? नींद नहीं आती ?याद नहीं जाती ?चिंता बोहोत सताती ? बिमारी है ?बुढ़ापा है ?मृत्यु है ?शत्रु है ?कंगाली है ?मूह पर गाली है?फत्तेहाल है ?दिल बेकरार है ?नफरत … Continue reading अभी इंसान हो

मुझे माफ़ करना माँ

तूने लाख समझाया पर मैं गांधीवादी बन गया |मुझे माफ़ करना माँ, मैं आतंकवादी बन गया | मुझे लोग कहते है दुश्मनी का दुश्मन,अधर्म ज़माने में, मैं धर्मवादी बन गया |मुझे माफ़ करना माँ, मैं आतंकवादी बन गया | नफरत है लोगों को मेरे पाक इरादों से,इस भ्रष्ट समाज में समाजवादी बन गया |मुझे माफ़ … Continue reading मुझे माफ़ करना माँ

मुझे होश नहीं

नौ दिल-ए-गिरफ्तार हूँ, मुझे होश नहीं |मैं तेरा प्यार हूँ, मुझे होश नहीं | कोई साज़ छेड़ मिलान का, ए मेरे फनकार,मैं इतना बेक़रार हूँ, मुझे होश नहीं | ना रोके मुझे कोई बंधन बन कर ज़ंजीर,मैं हवा-ए-फरार हूँ, मुझे होश नहीं | अश्क़-ए-मुस्तक़बिल करेगा,बीमार-ए-दिल का इलाज |मैं खुद नागवार हूँ, मुझे होश नहीं | … Continue reading मुझे होश नहीं

मिलता नहीं रास्ता

कहाँ जाएगा मुसाफिर ? मिलता नहीं रास्ता |किस जानिब चलें ज़ीस्त ? मिलता नहीं रास्ता | कितनी झूठी कसम, और वादा कितना है सस्ता,कैसे सफर मुक्कमल हो ? मिलता नहीं रास्ता | नीचे ज़ुल्म-ए-ज़लज़ला, ऊपर खुदा हँसता,किसके पीछे चलें ? मिलता नहीं रास्ता | उसके हाथ में है तलवार जिसे दिया गुलदस्ता,कहाँ खो गयी है … Continue reading मिलता नहीं रास्ता

मियां

पहले रब्ब का नाम लो,फ़िर करो क़बूल मियां |सबसे पहला आशिक़ वह,फिर वह नबी-रसूल मियां | झुका के सर उल्फत में,करूँ वो बंदगी |वक़्त सारा परस्तिश में,ऐसी गुज़रे ज़िंदगी मियां | फ़िक्र की माशूका है क़यामत,ज़िंदा को पहनाती कफ़न |लेहद तो फिर भी है शुक्र,होते सिर्फ़ मुर्दे दफ़न मियां | ज़र्फ़-ए-नज़र जो उठी पहले,उस पहली … Continue reading मियां