उस रात मैं बहुत रोया ।
जिस रात मैने उसे खोया ।
उस रात मैं बहुत रोया ।
वही पाया जो बीज बोया ।
उस रात मैं बहुत रोया ।
उसके पैरों पर था मेरा शीश,
उसने देखा भी नहीं, संभाला भी नहीं ।
एक विषक्त डंक ने सब कुछ डुबोया ।
उस रात मैं बहुत रोया ।
मांग भरी थी मैंने जो रक्त से,
उसी ने मेरी जान मांग ली ।
बाद उसके मैं कभी नहीं सोया ।
उस रात मैं बहुत रोया ।
बड़ी विनम्र थी उसकी दुःशीलता ।
जाते-जाते एक अजब कहनी दे गयी ।
उस कहानी को मैंने जीवन भर पिरोया ।
उस रात मैं बहुत रोया ।