ज़िंदगी यूँ है फसी

lost

हालत पे हमारी आती है उन्हें हँसी |
क्या करें ? ज़िंदगी यूँ है फसी |

ना है आँखों में आँसू, ना होठों पे हँसी,
ना रात को चैन, ना दिन को सुकून |
जलाते रहते है अपने दिल का खून |

पीसते रहते है अपने आप में हम,
दिल वीरान है, सौ है ग़म |

वो कहते है—पागलपन है तुम्हारा,
हम कहते है—है बेकसी |
वो पूछतें है—क्यों ज़िंदा हो ?
हम कहते है—है बेबसी |
क्या करें ? ज़िंदगी यूँ है फसी |

 

ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं

who

जिसने मुझको चाहा उसका ना हो सका,
जिसे मैंने चाहा वो मिला ही नहीं |
फिर आगे हौसला हुआ ही नहीं,
ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं |

एक रात जो हर दिन को खा गयी |
नाजाने अकस्मात कहाँ से आ गयी ?

ऐसा बंजर किया चमकते गुलिस्तां को,
दरख्तों पे फिर घोसला हुआ ही नहीं |
फिर आगे हौसला हुआ ही नहीं,
ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं |

मंज़िल ना दिखा के अब मुझे इसका शौक़ नहीं |
लिख रहा है जो वो अजब है कोई जोक नहीं |

राह में भटकाया चांदिनी से इस क़दर,
फिर दिल कोई सिलसिला हुआ ही नहीं |
फिर आगे हौसला हुआ ही नहीं,
ज़िंदगी से कोई फैसला हुआ ही नहीं |

 

ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल

universe

ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है |
मगर मुझे तेरा ख्याल तो है |

तूने मेरा ही घर चुना जलाने को,
मुझे तुझसे ये सवाल तो है |
ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है |

अँधेरा कब से मेरे इंतज़ार में है |
मेरे हाथ में अभी मशाल तो है |
ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है |

हमेशा इतनी कम क्यों पड़ती है तू ?
मेरे हौसले में मज़ाल तो है |
ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है |

कौन कहता है चमत्कार नहीं होते ?
ज़िंदगी तू साहिर कमाल तो है |
ज़िंदगी मुझे तेरा मलाल तो है |

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

madness

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |
गुज़रे दिनों की धुप थी क़बूल,
क्यों बारिश कहाँ से ले आयी ?

किसी अटके हुए पल की तरह |
किसी माथे की बल की तरह |
किसी सवाल-ए-बेहाल की तरह|
किसी जले हुए काल की तरह |

गोया खींच के वहाँ से ले आयी,
खुश थे जहाँ से ले आयी |
ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |

ना खबर थी अपनी,
किसी और की क्यों रखते ?
उधार खुद अपने पर था,
किसी और का क्यों रखते ?

एक अपना ही दिल था सीने में बर्बाद |
मासूम दिल किसी और का क्यों रखते ?

इसलिए शायद ज़िंदगी यहाँ ले आयी,
यार अजब !
ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |

 

यही मेरी रज़ा है

remember-me

मेरे ख़ुदा, यही मेरी रज़ा है |
मेरी माफ़ी ही मेरी सज़ा है |

रिहाई में काफी तनहा था,
अब यही सज़ा में मज़ा है |

सिर्फ एक इशारे ने बदल दिया,
क्या खूबसूरत ये फ़िज़ा है ?

बना रखी थी दुनिया को रखैल,
अब मेरी नियत बिलकुल पाकिज़ा है |

पहले एक ही पत्थर में तुझे देखा,
अब मेरे खुदा, तू जाबाज़ा है |

याद है मुझे

lost

याद है मुझे, वो मुलाक़ात आखरी थी |
तेरे-मेरे बीच में वो बात आखरी थी |

तूने मुझे उठवा लिया दुनिया से,
मुझे याद है, वो कायनात आखरी थी |

तेरे ख़ल्क़ मैं नागवार ही रहा,
तेरी बनायीं हुई मख़लूक़ात आखरी थी |

तेरे ही जलवों पर सब लूटा दिया,
मुझे याद है, वो इल्तिफ़ात आखरी थी |

अपने आप को खुद ही दफ़न कर आया हूँ,
मेरी यहाँ ये वजिबात आखरी थी |

अब इसके बाद नहीं फ़ना होगा ये अजब,
मुझे याद है, वो वफ़ात आखरी थी |

या तुम थी ?

lovers.jpg

ये मेरे बिस्तर पे सिलवटें कैसी,
रात का जादू था, या तुम थी ?
आ रही है जाबाज़ा दिलरूबा खुशबू,
रात का जादू था, या तुम थी ?

इत्र से भीगे मोहब्बत में,
हर सांस से पिघल गया तन |
लोहा पिघल मोम हुआ ज़मीन पर,
रात का जादू था, या तुम थी ?

कितने नमूने प्यार के,
दिखाए तुमने सारी रात |
अभी तन चहक रहा है,
रात का जादू था, या तुम थी ?

धीरे-धीरे, रफ्ता-रफ्ता,
हर अंग में दौड़ने लगी मोहब्बतें |
एक चुभन हुई अजब सी,
रात का जादू था, या तुम थी ?