एक सैलाब

एक सैलाब आने को है |
उसका जवाब आने को है |

अपना घर ज़रा पक्का कर लूँ,
सावन बेहिसाब आने को है |

मेरे ही इश्क़ में क़यास नहीं था,
वो एक और नक़ाब भी दिखने का |

मैं ही मैं हूँ वो अजब,
जिसे खुद अभी अज़ाब सुनाने को है |

6 thoughts on “एक सैलाब

      1. Khayalaat ashaar mai achhe hai…Maza aata hai pdne mai…Par agr ghazal ka Naam de rhe hain to uske rules bhi follow krne ki koshish kar lain to ghazal or bhi khoobsurat ho jaegi ☺️

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