मेरा भारत महान ?

चुल्लू भर पीने को पानी नहीं |पेट भर खाने को नहीं धान |क्या सच में है मेरा भारत महान ? चाँद पर यंत्र भेज दिया,सस्ते में बिकता है ईमान |क्या सच में है मेरा भारत महान ? दूध से है पत्थर नहाता,भूखा रहे रहीम, प्यासा रहे राम |क्या सच में है मेरा भारत महान ? … Continue reading मेरा भारत महान ?

मर जाऊंगा

इतनी तारीफ़ ना करो, मर जाऊंगा |बस ! और प्यार नहीं, मर जाऊंगा | अभी और नहीं पी सकता,बस दोस्त ! अभी घर जाऊँगा | इतनी ज़ोर लगाने की ज़रुरत नहीं,कच्ची दीवार हूँ, छूते ही गिर जाऊँगा | समेट लो ना मुझे मुट्ठी में,शीशा हूँ ना, बिखर जाऊँगा | ऐसे ही नागवार गुज़री है ज़िंदगी,और … Continue reading मर जाऊंगा

मन तो चाहता ही रहा

मन तो चाहता ही रहा |मन तो चाहता ही रहा |सात सुरों के गीत गाता ही रहा |मन तो चाहता ही रहा |मन तो चाहता ही रहा | रक़्स की रात में,हर शख़्श की बात में,ना जाने क्यों, जाने क्यों ?रात भर याद आता ही रहा |मन तो चाहता ही रहा |मन तो चाहता ही … Continue reading मन तो चाहता ही रहा

मर रहा है

क्या हाल बताऊँ देश का ?देश में लगता है भगवान मर रहा है |वहाँ मेरा किसान मर रहा है,वहाँ मेरा जवान मर रहा है | कौनसे मज़हब की बात बताऊँ ?मज़हब तो भूखे गिद् खा गए |वहाँ मेरा हिंदू मर रहा है,वहाँ मेरा मुसल्मान मर रहा है हर एक दौड़ में है,बाँट रहे है अपनी … Continue reading मर रहा है

मैंने काला रंग चढ़ा रखा है

दुनिया ने खूब पंगा पड़ा रखा है,इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है | बेकार ही ज़िंदगी को मुअम्मा बना रखा है,इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है | दिल में इतनी नफरत का लोहा जड़ा रखा है,इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है | सब ने सफ़ेद रंग में अपना रंग लगा रखा है,इसलिए … Continue reading मैंने काला रंग चढ़ा रखा है

मैं तुम्हे नहीं बोलता

मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?छोडो मुझे, मेरी ज़िंदगी में क्यों ज़हर घोलते हो ? मैं तो तुम्हे नहीं कहता बदलने को ?तुम मुझे क्यों बदलने को बोलते हो ?मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ? मेरे दिल की जानिब क्या ताकते रहते हो ?अपने सड़े हुए दिल … Continue reading मैं तुम्हे नहीं बोलता

मैं रक़्क़ासा

मैं रक़्क़ासा मेरे यार की |मैं शौक़ीन मेरे प्यार की | मेरी आँखें गोया हज़ार माहताब,जन्नत अधूरी मिसाल मेरे निगार की | शराब ने सीखा मुझसे पीना,नशा बात करता मेरे ख़ुमार की | मुझसे है यह कायनात ज़ायेदा,दीवाने रह तकते मेरे इक़रार की | तेरा-मेरा मिलना तो तय था,देख दास्ताँ मेरे क़रार की | मैं … Continue reading मैं रक़्क़ासा

मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ

मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ |मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | मैं घायल, मैं बेलगाम हूँ |ऐसा भी नहीं के बेज़ुबान हूँ |मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | ना मैं काबा, ना कब्रिस्तान हूँ |ना दरिया, ना रेगिस्तान हूँ |मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | मैं ना हिंदू, ना मुसल्मान हूँ |ना पाक-ए-स्तान, ना हिंद-उस-तान हूँ |मैं पशेमान … Continue reading मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ

मैं नहीं जानता

जिसका कोई नहीं उसका कौन है,मैं नहीं जानता |मेरे नसीब का मालिक कौन है,मैं नहीं जानता | कौन अल्लाह ? कौन भगवान ?मुझे नहीं मालूम |ना पुराण, ना क़ुरान कौन है,मैं नहीं जानता | मुझे तो सिर्फ़ घर समझ आता है |क्या हिंदुस्तान ? क्या पाकिस्तान ?मैं नहीं जानता | ना आती है मुझे फ़ारसी … Continue reading मैं नहीं जानता

मैं खुनी हूँ, मैं खुनी

मैं खूनी हूँ, मैं खूनी |मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मैंने क़त्ल किया अरमानों का,मैंने क़त्ल किया फरमानों का,मैं खुद ही खुद का क़ातिल,मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मेरा चार नहीं दो-दूनी,मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मुझसे निग़ाहें नजर-बट्टू,मेरे दिमाग में पागल लट्टू,मैं शमशान का नमूना,मेरी हरकतें जैसे बजर-बट्टू | मैं बर्बाद … Continue reading मैं खुनी हूँ, मैं खुनी

मैं इंसान हूँ

मैं इंसान हूँ, मेरा मज़हब कोई नहीं है |मैं इंसान हूँ, इसमें गज़ब कोई नहीं है | मैं ही मैं हूँ, चारों जानिब,मैं ही ख़ुदा हूँ, मेरा रब्ब कोई नहीं है | मैंने बनाया और फिर मैंने मिटाया |मैंने काटा और मैंने ही कटाया | मैं ही क़त्ल हूँ, क़ातिल भी मैं,मैं इंसान हूँ, मेरा … Continue reading मैं इंसान हूँ

मैं ही गुन्हेगार नहीं

तुम भी शामिल हो, मैं ही गुन्हेगार नहीं |तुम क्यों मेहमिल हो ? मैं ही गुन्हेगार नहीं | एक वार तुमने किया, एक वार किया मैंने,तुम भी घायल हो, मैं ही फ़िगार नहीं | मिले क्यों मुझे ही कफ़न का इनाम खुदा से ?तुम भी बिस्मिल हो, मैं ही निगार नहीं | वक़्त क्यों मुतहम्मिल … Continue reading मैं ही गुन्हेगार नहीं

मैं आइना हूँ

मैं आइना हूँ, मैं सच बोलता हूँआपकी छवि बताता हूँ,सच और झूठ तोलता हूँ,मैं आइना हूँ, मैं सच बोलता हूँ | भला करो, भला होगा,बुरा करो, बुरा होगा,मैं लोगों को ये बात याद दिलाता हूँ |मैं आइना हूँ, मैं सच बोलता हूँ | मैं जोड़ता हूँ इंसान को इंसान से,मैं मिलता हूँ मानवता को मानवता … Continue reading मैं आइना हूँ

यूँही

खत्म कर दो सब प्यार के किस्से तुम, यूँही |जी लेने दो मुझे ख्वाब-ए-गफलत में, यूँही | तुम आज आयी हो जब मेरे हाथ खाली है ?ले जाओ और कुछ नहीं तो मेरी जान तुम, यूँही | इन सपनों से कोई पूछे की नींद से दोस्ती क्यों है ?इस मायूसी से कोई पूछे की दिल … Continue reading यूँही

यह उस वक़्त की बात है

यह उस वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी अंजान थी |यह उस वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी बेजान थी | दुनिया का पहला निवाला चखा था हाथों से,वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी हैरान थी | हम दोनों ने एक ही थाली से खाया था निवाला,यह उस वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी मेज़बान … Continue reading यह उस वक़्त की बात है

मैं आदमी

आज़ाद देश का ग़ुलाम बंदा हूँ |मैं इंसान नहीं, एक धंधा हूँ | चुप रहो तो कहते है मुझे खुदगर्ज़,लड़ता हुँ तो कहते है के खून गंदा है | कहाँ है जलाना मेरे बस में ?मैं सूरज नहीं, चंदा हूँ | मुझे में नहीं है झूठ बोलने का ढंग,मैं आदमी ही अजब बेढंगा हूँ |

समझ नहीं आता

वह मुझे समझ नहीं पाते, मैं उन्हें समझ नहीं पाता |यह कैसा रिश्ता है अजब ? मुझे समझ नहीं आता | ख़ुदामंडी में बहुत से ख़ुदा बिक रहे है,कौनसा ख़ुदा खरीदूं ? मुझे समझ नहीं आता | मुद्दत से उनके दिल से बात करने की कोशिश की,किस अदा से बयां करूँ ? मुझे समझ नहीं … Continue reading समझ नहीं आता

नेता

परसों तुझे टीवी पर देखा,अरे ! तू तो कमाल बन गया |तू तो बादशाह था, साला अभी हमाल बन गया | सारे देश को बेचने का बोझ तूने ही उठा लिया |सारे बचत का पैसा तूने अकेले ही लूटा दिया |गज़ब है ! तेरे हाथ में पेन होता तो टैगोर बन जाता |तेरे हाथ में … Continue reading नेता

मुझे वह सब याद है

मुझे वह सब है याद जो कभी हुआ ही नहीं |वह एक आशियाँ आबाद जो कभी हुआ ही नहीं | मुझे वह सब याद है तेरे-मेरे तालुकात,और वह एक इत्तिहाद जो कभी हुआ ही नहीं | मुझे वह सब याद है तेरी हिचकिचाहट,और वह संग, फुवाद जो कभी हुआ ही नहीं | मुझे वह सब … Continue reading मुझे वह सब याद है

मयखाने में

एक शमा जलाये रखना मयखाने में |मैं आऊंगा रात मैखाने में | उनकी याद है दिल में,उनकी साँसों में मेरी साँस है |उनकी आदत है बेइन्तहां मुझे,उनकी तस्वीर लगाये रखना मयखाने में | प्यार के गीत मैं गुनगुनाता हूँ सदा,मौत ने मेरी बनाया है मुझे रिंद-ए-मयकादा |उनकी बदन की खुशबू की आदत है बेइन्तहां मुझे,कुछ … Continue reading मयखाने में

मेरे गाँव की बात

दिन हो, या हो चांदिनी रात,बजते ताशे जैसे दूल्हे की बारात |ऐसा प्यारा गाँव है मेरा और मेरे गाँव की बात | दिन में सूरज की पूजा होती,रात में होता काम दूजा |सभी मिलकर रहते है, ज्ञानी, पंडित हो या खोजा | लस्सी और शराब की नदियाँ बहती है,ऐसी है अपनी ठाट |ऐसा प्यारा गाँव … Continue reading मेरे गाँव की बात

मेरा परिचय

मैं हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हूँ |मैं पंडित, मौलवी, मैं कसाई हूँ | मुझसे ना पूछो ज़ात मेरी,मैं वह फटे कपडे की सिलाई हूँ | अलग-अलग है मेरे रूप जगत में,कभी मैं किसान, कभी सिपाही हूँ | मैं दिवाली हूँ, मैं ईद हूँ |कभी मैं बहन, कभी भाई हूँ | किसी मासूम पर ज़ुल्म की … Continue reading मेरा परिचय

लेकिन

कुछ मैं भी करता हलाल लेकिन |जीवन में रहा सिर्फ़ मलाल लेकिन | करता मैं भी दुनिया मैं मसीहाई,अजब ही रहा मैं फिलहाल लेकिन | बन जाते मेरे भी हाथ देने वाले,ख़ुदा ने रखा मुझे बेहाल लेकिन | दिखाना चाहता था चांदिनी रात उसको,उस रात रंग चाँद का था लाल लेकिन |

लाशें

हर तरफ़ पड़ी है लाशें |बेबस, बेशक खड़ी है लाशें | नंगी आँखें समुंदर गोया,आधी जली फुलझड़ी है लाशें | अपनी की क़बर कंधो पर लादे,बेख़ौफ़ मौत से बड़ी है लाशें | क़ुरबानी के नाज़-मीनार के तले,ज़िंदा मिसाल गड़ी है लाशें | सफ़ेद उड़ान कैदी वक़्त की,पैरों में हथकड़ी है लाशें | यह मंज़र देगा … Continue reading लाशें

क्यों कहते हो मुझसे ?

क्यों कहते हो मुझसे के यार ना करो ?क्यों कहते हो मुझसे के प्यार ना करो ? खुद तो मांगते हो ख़ुदा से हज़ार आँखें,मुझसे कहते हो के आँखें चार ना करो | शौक़ है तुमको क़त्ल-ए-सर-ए-आम का,मुझसे कहते हो जान निसार ना करो | खुद तो मोज़ेचा बने फिरते हो जहान में,मुझसे कहते हो … Continue reading क्यों कहते हो मुझसे ?

शराफ़त छोड़ दी मैंने

कितनी बार कहूँ ?शराफ़त छोड़ दी मैंने | अब शराब नहीं पीता,उनके जैसे नहीं जीता |शराब तो शरीफ़ लोग पीते है | शराब पिके झूमते है |औरों की बातें करते है |गंदी-गंदी बातें |झूठ बोलते है |कभी शेर, कभी बंदर,कभी सुअर बन जाते है | अब शराब नहीं पीता,उनके जैसे नहीं जीता |शराब तो शरीफ़ … Continue reading शराफ़त छोड़ दी मैंने

क्यों है ?

ऐसा ही है तो ऐसा क्यों है ?यह दुनिया है तो खिलौना क्यों है ? और अगर, यह खेल ही है मालिक |तो खेल इतना घिनौना क्यों है ? जब टूटकर बिखर ही जाना है |तो फ़िर यह सपना सलोना क्यों है ? सबको ही आता है बनना अजब,फ़िर यह तमाशा, यह जादू-टोना क्यों है … Continue reading क्यों है ?

क्या मैं सिर्फ़ एक औज़ार हूँ ?

हर तरफ़ भागता-दौड़ता,कभी मसरूफ, कभी बेकार हूँक्या मैं सिर्फ़ एक औज़ार हूँ ? कभी इतना बड़ा धोखा,कभी घमासान वार हूँ |क्या मैं सिर्फ़ एक औज़ार हूँ ? लोग रोज़ खरीदते है मुझे,सस्ते दामों का बाजार हूँ |क्या मैं सिर्फ़ एक औज़ार हूँ ? मेरी इंसानियत कमज़ोर है,वहशत में बेशुमार हूँ |क्या मैं सिर्फ़ एक औज़ार … Continue reading क्या मैं सिर्फ़ एक औज़ार हूँ ?

कुछ ऐसे, कुछ वैसे

हर सु निफाक़ छायी है, कुछ ऐसे, कुछ वैसे |अँधेरी शफ़क़ आयी है, कुछ ऐसे, कुछ वैसे | चूस लो मेरे खून का आखरी क़तरा,दे दो मुझे ज़िंदगी का भी ख़तरा | बदल दिया है मेरे इस खून को लोहे से,और फ़िर...चुंबक से खिंचवाई है, कुछ ऐसे, कुछ वैसे | मेरे नाम पर लगी है … Continue reading कुछ ऐसे, कुछ वैसे

कोई है कहीं

कहीं ज़मीन, आसमान कहीं |कोई है कहीं, कोई है कहीं | अँधेरे को सूरज नहीं दरकार,एक मचलती हुई लौ ही सही |कोई है कहीं, कोई है कहीं | तू ज़िंदा है तो यह कर अजब,उतार ला स्वर्ग को यहीं |कोई है कहीं, कोई है कहीं | हर दिल बदल सकता है दिल,बना सकता है दुनिया … Continue reading कोई है कहीं

कोशिश जारी है

हे राम, हे राम,हे श्याम, हे श्याम |बचाओ !मामला भारी है, कोशिश जारी है | सिंग-किंग, गांधी-आंधी,चोर अधिकारी है, कोशिश जारी है | रात-दिन, सुबह-शाम, जिन-रम, श्याम-राम,सब आज्ञाकारी है, कोशिश जारी है | केस-ठेस, नोट-वोट, पैसा-वैसा,ऐसा सबने मारी है, कोशिश जारी है | पाना-खोना, खोना-पाना, खेल-खिलौना |सुपर !यह दुनिया सारी है, कोशिश जारी है |

कितने कमाल के है वह साहिर

बेवफाई करने में है वह माहिर |कितने कमाल के है वह साहिर | हमारा सब पूछ लेते है हाल |निकाल लेते है बाल की भी खाल | अपनी दास्ताँ नहीं करते पर ज़ाहिर |कितने कमाल के है वह साहिर |आ'उस की तरह देखते है आब |रक़्स फरमाते है लाजवाब | रक्स-ए-बिस्मिल उनका है ताहिर |कितने … Continue reading कितने कमाल के है वह साहिर

ख़ुदा-ख़ुदा क्या करते हो ?

ख़ुदा-ख़ुदा क्या करते हो ?ख़ुदाखाने में आओ तो सही |यह तो इबादत का एक तरीका है,तुम मैखाने आओ तो सही | हम बहा देंगे दरिया तुम्हारे लिए,तुम भी वो ज़माने लाओ तो सही | यह भी खुदा की ही ईजाद है,तुम भी यह निवाला खाओ तो सही | तुम्हारी भी होगी हर दुआ क़बूल, अजब,कभी तुम … Continue reading ख़ुदा-ख़ुदा क्या करते हो ?

कौन ?

लड़ के ग़म से जीत सकता है कौन ?बिना नशे के जी सकता है कौन ? आज तो बिन पीये ही मदहोश हो गया,यादों को इस दिल से छीन सकता है कौन ? कौन है जो मुझे अपना बनाये ?फ़िर से ज़िंदा कर सकता है कौन ? निकाल के ज़हर को इस दिल से,आँखों से … Continue reading कौन ?

कल रात मेरी मौत हो गयी

कल रात मेरी मौत हो गयी,ज़िंदगी ने झुकाया सर मेरा | ऐसा तो सिर्फ़ मेरे ही साथ हुआ,बारिश ने जलाया घर मेरा | उसी ने दिए ज़ख्म पर ज़ख्म,बना फिरता था जो चारागर मेरा | मैं पाना चाहता था खोने को,कुछ ना हो सका मगर मेरा | अजब, ख़ुदा से मुलाक़ात हो गयी,मिट ही गया … Continue reading कल रात मेरी मौत हो गयी

कहाँ से कहाँ तक

कहाँ से कहाँ तक आ गए हम,साहिल से तूफ़ान तक आ गए हम |ज़िंदगी का साथ तो निभाया बहुतपर चाहत से नफ़रत तक आ गए हम | जिसे दिया था साज़ दिल का,वह क्यों बैठा है होंठ कर बंद ?जाने क्या कमी थी गीतों में,महफ़िल से वीराने तक आ गए हम | वह कसमें जो … Continue reading कहाँ से कहाँ तक

कोई

मोहब्बत भरी दास्ताँ सुना रहा है कोई |ज़िंदगी को कब्रिस्तान दिखा रहा है कोई | छिल गए है कदम सजदा-ए-यार में,इस नास्तिक को देवस्थान दिखा रहा है कोई | बीत गयी सारी उम्र क़त्ल करते-करते,ज़माने बाद पाक-ए-स्तान दिखा रहा है कोई | भूल गए है रास्ता वतन की तिजारत में अजब,आखरी वक़्त में नक़्शा-ए-हिंदुस्तान दिखा … Continue reading कोई

किसी हथेली की मैल

किसी दिल की धड़कन बनकर चूर हुआ,किसी हथेली की मैल बनकर दुर हुआ | वक़्त से पहले ही मेरी जवानी पहुँच गयी,मेरे आने से पहले मेरी कहानी पहुँच गयी | किसी ज़रुरत की कीमत बनकर मजबूर हुआ,किसी हथेली की मैल बनकर दुर हुआ | ज़िंदगी इतनी वीरान हो गयी कर्म से,कांधो पर अपनी लाश उठा … Continue reading किसी हथेली की मैल

कहाँ जा रहे थे, कहाँ आ गए हम ?

कहाँ जा रहे थे, कहाँ आ गए हम ?आँखों से प्यार छलक गया, घिर आये सौ ग़म | वह अजब जो सिखाता था दूसरों को जीना,आज खुद ही ज़िंदगी की राह में हो गया है गुम | अगर यही जीना है,तो ज़िंदगी की शमा जलाये रखेंगे |उन्हें खो कर भी,उन्हें पाने की उम्मीद लगाये रखेंगे … Continue reading कहाँ जा रहे थे, कहाँ आ गए हम ?

कब रोका था

बारिशों ने, तूफानों ने, कब रोका था |मैंने आपको मुझे बुलाने से कब रोका था | कारवां मोहब्बत का राह में छूट गया,मुझे कोई मेरा अपना ही लूट गया | आहों ने, बाहों ने, कब रोका था |मैंने आपको मुझे बुलाने से कब रोका था | एक बेगुनाह मुजरिम की तरह करता रहा,मैं अपनी कारवाही,पर … Continue reading कब रोका था

काश

काश मैं जूती होती,तो आपके पैरों में होती | काश मैं धड़कन होती,तो आपके सीने में होती | काश मैं लिपस्टिक होती,तो आपके होठों पर सजता | काश मैं घुंघरू होता,तो आपके पैरों में बजता | काश मैं साड़ी होता,तो आपसे लिपट जाता | काश मैं तकिया होता,तो आपके सिमट जाता | काश मैं काजल … Continue reading काश

झूठा ख़ुदा

झूठा ख़ुदा बने रहने में बुरा क्या है ?ख़ुदा से जुदा बने रहने में बुरा क्या है ? सारी दुनिया सजदे कर रही झूठी-मूठी,थोड़ा बेहुदा बने रहने में बुरा क्या है ? मिल रहे है हर एक को रोज़-रोज़ जलवे अजब,थोड़ा गुमशुदा बने रहने में बुरा क्या है ? वैसे भी लोग ढूंढ ही रहे है … Continue reading झूठा ख़ुदा

जे रब्बा इश्क़ ना होए

क्या मज़ा जीने में ओये ?जे रब्बा इश्क़ ना होए | कौन तैरे, कौन डुबोये ?जे रब्बा इश्क़ ना होए | ना कोई जागे सारी रात,ना कोई दिन को सोये |जे रब्बा इश्क़ ना होए | कैसे दिल में आग लगे ?कैसे मीठे तीर चुभोए ?जे रब्बा इश्क़ ना होए | क्या कोई सपने पिरोये … Continue reading जे रब्बा इश्क़ ना होए

जन्मदिन मुबारक हो

जन्मदिन मुबारक हो मेरे मीत |तुमने दिल सबका लिया जीत | तू ही मन में, तु ही तन में,तू ही प्यार, तु ही प्रीत | तुझसे है सब रंग जहान के,तू ही संसार की मीठी रीत | सिर्फ़ एक मैं ही नहीं अजब,तेरी अदा भी जग से विपरीत |

यह उस वक़्त की बात है

यह उस वक़्त की बात है जब इश्क सच्चा हुआ करता था |यह उस वक़्त की बात है जब इश्क हुआ करता था | उसको देखते ही मौसम रंगीन,और सेक्शन गरम हो जाता था |उस से बस एक गुफ़्तगू की,बस एक गुफ़्तगू की दुआ करता था | आज फेसबुक पर अनफ्रेंड होने से भी तकलीफ़ … Continue reading यह उस वक़्त की बात है

ज़िंदगी चल रही है

दिल खुश है, कोई कमी नहीं खल रही है |सब थोड़ा है, मगर ज़िंदगी चल रही है | दोस्त ने बड़ी गाडी ली है, वाह !महेंगी है, दिखती भी है, तेज़ भी है |मेरी गाड़ी छोटी है या कभी तो होती भी नहीं,पर पार्टी में हम दोनों एक ही टाइम पर पहुँचते है |गाड़ी छोटी … Continue reading ज़िंदगी चल रही है

जल पड़ी मेरी दिल की मशाल

उसने लौ जला दी हमदर्दी की,छू कर रूह को कर दिया कमाल |उस ने जो पहनाई शॉल ठण्ड में,जल पड़ी मेरी दिल की मशाल | हाथ भागने लगे, पैर ने दुआ मांगी,ऐसा भी होता है, होता है हाल |जल पड़ी मेरी दिल की मशाल | मैं शुन्य, मेरा शुन्य,बदल गयी मेरी चाल |जल पड़ी मेरी … Continue reading जल पड़ी मेरी दिल की मशाल

जब मेरे हाथ खली थे

कुछ सपने हक़ीक़त, कुछ जाली थे |मैं तब बर्बाद हुआ जब मेरे हाथ खली थे | एक साफ़ दिल लेकर कितने पाप हो गए,कितने नाज़ुक फूल, कितने क़ातिल माली थे | एक-एक करके वह हर लकीर ले गया |शायद, सारे मेरे अरमान खयाली थे | सारी अला तो वही ले गया अजब,हम मूर्ख बंदे, वह … Continue reading जब मेरे हाथ खली थे

जब मेरी बारी थी

जब उनसे पुछा तो जवाब ही जवाब थे |जब मेरी बारी थी, सब लाजवाब थे | उनकी बात हुई तो सारी कायनात खुल गयी,जब मेरी बारी थी, तो सिर्फ हिजाब थे | उन्होंने कहा तो सारे रंग खिल गए,जब मेरी बारी थी, सिर्फ़ नक़ाब थे | उनकी नज़्म को मिली सारी वाह-वाह,जब मेरी बारी थी, … Continue reading जब मेरी बारी थी

जब भी यह दिल उदास होता है

जब भी यह दिल उदास होता है,कोई आस-पास नहीं होता है |ज़माने में अक्सर दर्द देता वही है,जो अपना बहुत ख़ास होता है | इंसान से बेहतर तक़दीर पत्थर की है |उसे क्या पता ग़म क्या होता है ? कोई जीते जी फना कर देता है,कोई छोड़ देता है हाथ बढाकर,जिनकी उम्र गुज़री हो जुर्म … Continue reading जब भी यह दिल उदास होता है

काला सूरज

लहू के नाम अलग-अलग अनेक है,पर हम दोनों के लहू का रंग एक है | अमीरों के लिए है अय्याशी और राशन |गरीबों के लिए सिर्फ़ उम्मीदें और आश्वासन | क़तार में से चुप-चाप धीरज निकल आया |सुबह होते ही एक काला सूरज निकल आया | यहाँ सत्ता, सट्टेबाज़ों की रेत की है |खेल में … Continue reading काला सूरज

जब आप से मिला

ख़ामोश आँखों से सब सूना दिखता था,जब आप से मिला, अंजुमन में आ गया | नाम हज़ारों की भीड़ में नुख्ता था,जब आप से मिला, अंजुमन में आ गया | हर कदम पर चलता था, रुकता था,जब आप से मिला, अंजुमन में आ गया | पहले बाज़ारों में नहीं बिकता था,जब आप से मिला, अंजुमन … Continue reading जब आप से मिला

इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला

रब्बा भर दे खुला है झोला,इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | उसको देख के दिल यह डोला,इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | अब तो दिल है उबलता शोला,इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | क्या तूने दरवाज़ा खोला,इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | लाइफ बना दे, आई ज़ोला,इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | अजब यह बम का गोला,इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला |

इधर भी है, उधर भी

कुछ मजबूरियाँ इधर भी है, उधर भी |आग दिल में इधर भी है, उधर भी | ख़ामोश हम भी है, वह भी है,तमस दिल में इधर भी है, उधर भी | देखें तो कितनी पास है, सोचें तो कितनी दूर |हाँ, वही है मेरी सुनी आँखों का नूर | ज़िंदगी से बढ़कर कोई सज़ा नहीं … Continue reading इधर भी है, उधर भी

मुझे याद करना

यह दिल जो कभी रूठ जाए, मुझे याद करना |चुपके से जब आंसू बहाये, मुझे याद करना | यह दुनिया बहुत छोटी है,हार के बाद ही जीत होती है |जब तुम्हे कोई हराये, मुझे याद करना | आशिक़ी तो दीवानों का काम है,मौत फ़िर ज़िंदा होने का नाम है |जब अपने साथ किसी को ना … Continue reading मुझे याद करना

हज़ार बार चले हम

ज़ेर-ओ-ज़बर उल्फ़त लेकर दिल में,खुद अपने तुड़के कर हज़ार बार चुके |बिछड़ने की आरज़ू लेकर दिल में,हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके | अपनी ही शर्मिंदगी का बोझ लेकर,सर क़दमों पर हज़ार बार झुके |जुदाई की तमन्ना का सोज़ ये के,हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके | कहीं आखरी भी आवाज़ सुनके हमारी,शायद … Continue reading हज़ार बार चले हम

हाथ नहीं आती

मेरी ख्वाइशें कभी मेरे साथ नहीं आती |यह तितली की तरह कभी हाथ नहीं आती | चलता ही रहता हुँ अपनी फरमाइश से,राह के अंत पर मंज़िल हाथ नहीं आती | एक सवाल करना था खुदा से मुझे,कब से उसकी कोई हद् हाथ नहीं आती | सोचता हूँ सबको अजब ही बना दूँ,पर कोई नयी … Continue reading हाथ नहीं आती

ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं

देखते है सब ग़म दूसरों का,ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं |इनमें भी तो कहानी छुपी है, इनमें भी तो वफ़ा है |इनमें भी तो ज़िंदगी है, इनकी दास्ताँ कोई पूछता नहीं |ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं | एक रात, मैं बैठा था आँखें बंद किये,अपना वफाओं का अज़र लिए |आँख लग गई और … Continue reading ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं

ग़ुलामाबाद

वह पल का नज़ारा हमेशा याद रहेगा |ग़ुलाम, ज़माना हमेशा तेरे बाद रहेगा | अच्छा ही हुआ की आँखें सलामत रही,तेरे दीदार से दिल हमेशा आबाद रहेगा | तूने जो जलायी है अमन की लौ दिल में,अब मुझे भी सब से हमेशा विदाद रहेगा | जो तूने बनायीं है जगह इस तरह दिल में,उस जगह … Continue reading ग़ुलामाबाद

गया तो था

गया तो था बड़ी ज़ोर-शोर से,लौट आया वापिस उसी ओर से | मन तो बिना पंख का पंछी,कभी कटा ही नहीं इस डोर से | बड़ी कठिन है राहें ज़ीस्त की,भागता ही रहा उस छोर तक, इस छोर से | कुछ हाल-ए-दिल ऐसा हुआ अजब,वह बयां करती रही आहिस्ता-आहिस्ता,और मैं बोलता रहा — ज़ोर से, … Continue reading गया तो था

फुर्सत से

मिलेंगे अपने आप से, इस दिल-ए-बेपाप से |बेनक़ाब फुरसत से, मगर कभी फुर्सत से | मैंने नहीं मांगे थे दर्द,कहाँ से आकर घिर गए ?मिटटी के घर पर मेरे बादल,ना जाने कहाँ से गिर गए ? मिलेंगे अपने दर्द से, आहें सर्द से |बेनक़ाब फुरसत से, मगर कभी फुर्सत से | मैंने नहीं मांगी थी … Continue reading फुर्सत से

एक सैलाब

एक सैलाब आने को है |उसका जवाब आने को है | अपना घर ज़रा पक्का कर लूँ,सावन बेहिसाब आने को है | मेरे ही इश्क़ में क़यास नहीं था,वह एक और नक़ाब भी दिखने का | संभल जाने में ही भलाई है |ख़ुदा एक सबक सिखाने को है | मैं ही मैं हूँ वह अजब,जिसे … Continue reading एक सैलाब

एक पिंजरा सोने का

सबसे अलग मेरा घर है,वह मकान कोने का |यह मेरा घर है, एक पिंजरा सोने का | मेरे घर की दीवारें सुनहरी है,और एक नायाब सा झूला सोने का |यह मेरा है, एक पिंजरा सोने का | सोने की सलाखों से देखता हुँ गगन,वही मिलेगा जो नतीजा है बोने का |यह घर है, एक पिंजरा … Continue reading एक पिंजरा सोने का

एक नया भगवन

ज़माने को फ़िर हैरान बनाना चाहता हूँ |मैं एक नया भगवन बनाना चाहता हूँ  | लोगों के दिल में डर को मेहमान बनाना चाहता हूँ |मैं एक नया भगवान बनाना चाहता हूँ | ज़िंदगी को और परेशान बनाना चाहता हूँ |मैं एक नया भगवान बनाना चाहता हूँ | सबसे ऊंचा शहर मैं मकान बनाना चाहता … Continue reading एक नया भगवन

एक चाबी

इस दुनिया में साला, भरी है कितनी खराबी,हर चाबी का एक ताला, हर ताले की एक चाबी | गले में डाले माला, घुमते हैं यह शराबी,हर चाबी का एक ताला, हर ताले की एक चाबी | खून तो सब ने कर डाला, लाज ना आई किसे ज़राभी,हर चाबी का एक ताला, हर ताले की एक … Continue reading एक चाबी

दुनिया तमाशा है

दुनिया तमाशा है बारी-बारी |सभी देखते है बारी-बारी | मदारी कौन ये सबको पता है,पैसे सब फेकते है बारी-बारी | दुनिया एक गरम तवा भी है,सब अपनी रोटी सकते है बारी-बारी | वही सामान को अलग-अलग लगाके,फ़िर वही बेचते है बारी-बारी |

दुनिया जीना चाहती है

दो-चार घूंट प्रेम के पीना चाहती है |जैसे भी हो दुनिया जीना चाहती है | भले नए ना मिले मौके रोज़-रोज़,पुरानी-फटी तक़दीर सीना चाहती है |जैसे भी हो दुनिया जीना चाहती है | अपने अंदर हो ना हो तस्वीर उसकी,जगह-जगह मंदिर-मदीना चाहती है |जैसे भी हो दुनिया जीना चाहती है | बस एक वक़्त क़र्ज़ … Continue reading दुनिया जीना चाहती है

दो ही महीनों में

दो ही महीनों में बेहाल हो गया |दो ही महीनों में दिल का यह हाल हो गया | फासले कईं थे दरमियाँ हमारे,दो ही महीनों में कमाल हो गया | जुदा थे तन से, मन से नहीं,दो ही महीनों में यह ख़याल हो गया | हर जानिब उनका ही चेहरा देखा,दो ही महीनों में दिल … Continue reading दो ही महीनों में

दिवाली

आयी दिवाली, आयी दिवाली,फ़िर झूम आयी दिवाली | रंग-बिरंगे फूल खिले है,दीप-धुप खूब जले है,आई शप्पत ! काय गम्मत झाली |आयी दिवाली, आयी दिवाली | सुख से दुःख को मात दिया है,प्रेम ने प्रेम का साथ दिया है,नए सपने, नयी दिशा लेकर,आयी दिवाली, आयी दिवाली | लायी खुशहाली, लायी खुशहाली,आयी दिवाली, आयी दिवाली | आज … Continue reading दिवाली

दिखाई देता है

जहाँ तक सेहरा दिखाई देता है |मेरी तरह अकेला दिखाई देता है | ना कोई फूल है दामन में, ना रंग है कोई और,ना आगाज़, ना कोई अंजाम दिखाई देता है | मेरी तरह वह भी आतिश है,में भी वीरान, वह भी बर्बाद दिखाई देता है | हो फुर्सत तो देखिये ज़ख्मों को,यहाँ हर नज़ारा … Continue reading दिखाई देता है

देर से आने का

बड़ा ही ग़म है अपने देर से आने का | ना जाने कौनसा सबब है देर से आने का ? थोड़ा जल्दी आता तो उनसे मुलाक़ात हो जाती |जुस्तजू थी जिसकी, उस मंज़िल से मुलाक़ात हो जाती | बड़े सितमगर थे वह भी, इंतज़ार ना किया,शायद उन्हें भी पता था हमारे देर से आने का … Continue reading देर से आने का

देखता हुँ मैं

एक ही दिन में दो दिन देखता हूँ मैं |अपने आप को रोते देखता हूँ मैं | रात पूरी गुज़री मसरूफियत में,बाकी सबको सोता देखता हूँ मैं | पाया तो कुछ नहीं इस तिजारत में,जो बचा है वह भी खोते देखता हूँ मैं | रूसवा हो गया अजब आँखों से खून देखके,इस जन्नत को दोहजक … Continue reading देखता हुँ मैं

छोटी सी बात थी

छोटी सी बात थी, फसाद हो गयी |खुशाल ज़िंदगी बर्बाद हो गयी | सारे जग को एक वजह मिल गयी,तेरी-मेरी लड़ाई शाद हो गयी | क्या तेरा भगवान ? क्या मेरा अल्लाह ?छोटी सी बात थी, रूदाद हो गयी | घर-घर, गली-गली, कफ़न-कफ़न,खून-ए-जंग यहाँ आदाब हो गयी | क़ैद थी नमरूद की रूह क़फ़स में,तेर-मेरी … Continue reading छोटी सी बात थी

चल पड़ा देखो-देखो

चल पड़ा देखो-देखो, मेरा चक्का इश्क़ का |दिल ने दिल से किया नाता पक्का इश्क़ का | ज़िंदगी से लिया वादा सौ टक्का इश्क़ का |चल पड़ा देखो-देखो, मेरा चक्का इश्क़ का | अजब तो है ऐसा मुरीद हक्का-बक्का इश्क़ का |चल पड़ा देखो-देखो, मेरा चक्का इश्क़ का | सब कुछ लूट गया, लगा ऐसा … Continue reading चल पड़ा देखो-देखो

चाहत या फ़िर नसीब

कोई है बहुत दूर, तो कोई है बहुत करीब |दो ही चीज़ों का खेल है सब,चाहत या फ़िर नसीब | क्या दिया ? क्या लिया ?यह सब झूठ है, बने बनाये है |हमारे दिल में जो आया हम वही करते आये है | हम तो निकले थे घर से पत्थरों की तलाश में,पत्थर तो ना … Continue reading चाहत या फ़िर नसीब

ब्रेक के बाद !

कुछ ग़ज़लों का सिलसिला रुक जाएगा,फ़िर बज़्म सजेगी, ब्रेक के बाद ! क़फ़स से अलग रहुँगा कुछ नफ़स,ज़ाहिर कभी छुपा, ब्रेक के बाद ! नए तजुर्बे की तस्वीर देखेंगे,देखेंगे ज़रूर, ब्रेक के बाद ! मिलेंगे, मिलेंगे फिर से अजब,अभी नहीं, ब्रेक के बाद !

फ़िर बात करते है

तुम अपना खून लाओ, मैं लाऊँ अपना खून,तुम सिंध की चादर लाओ, मैं लाऊँ कश्मीर की ऊन |फ़िर बात करते है तुम्हारी और मेरी दुश्मनी की | लाल बहारें बहुत देखली अब लाल चमन में,तुम अपने वहाँ से अमन लाओ, मैं लाऊँ यहाँ से सुकून |फ़िर बात करते है तुम्हारी और मेरी दुश्मनी की | … Continue reading फ़िर बात करते है

दिल से ना खेलो

दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा |मुस्कान पर ऐतबार नहीं, ना जाने कब लूट जायेगा | बिस्तर पर दो सिलवटे, इनका साथ छूट जाएगा |दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा | आँखें सच बोलती है, पकड़ा तुम्हारा झूठ जाएगा |दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा | … Continue reading दिल से ना खेलो

बहुत कुछ खोया

बहुत कुछ खोया पर बहुत कुछ पाया ही नहीं |हर वक़्त का वक़्त आ गया, मेरा वक़्त आया ही नहीं | क्या देखू मैं कोई और जलवे इस जहान के ?मैं सैलाब से कभी निकल पाया ही नहीं | कितने खिलाये मैंने परोस के निवाले उसको,उसने तो एक टुकड़ा भी कभी खिलाया ही नहीं | … Continue reading बहुत कुछ खोया

बहुत हो गया

बहुत हो गया, कुछ इंतजामात हो जाये |भाई, कोई पीने-पिलाने की बात हो जाए | मैं बदल दूंगा महफ़िल का अंजाम,एक बार शराब से मुलाक़ात हो जाए | कईं दिनों से ज़िंदगी थी नागवार,बड़ी रूखी- सुखी थी, कुछ बरसात हो जाए | आओ, शराब की कसम खा लेते है आज,बहुत हुई दुश्मनी, अब इतिफ़ात हो … Continue reading बहुत हो गया

बहुत दिनों बाद

बहुत दिनों बाद दिखा एक चेहरा पहचाना सा |इस शहर का कोई है राज़ गहरा पहचाना सा | कुछ जानी-मानी सी यह कैसी प्यास है ?कुछ जाना-माना सा है यह पहचाना सा | कितने रंगों की तस्वीर बन गयी है यह सुबह-सुबह,गुज़री रात की ख़ामोशी और अँधेरा पहचाना सा | निज़ाम है इस शहर का … Continue reading बहुत दिनों बाद

देखते है

यूँ तो रंग को लगता है एक अरसा उतरते-उतरते,देखते है क्या गुज़रती है बूँद पर गुहर होने तक | यूँ तो चला ही जाता है अँधेरा रात उतरते-उतरते,देखते है क्या होता है शमा पर सहर होने तक | यूँ तो गुज़र ही जाता है दिन नशे को उतरते-उतरते,देखते है क्या रंगत है शराब पर ज़हर … Continue reading देखते है

छोडो ना कोई काम कल पर

छोड़ो ना कोई काम कल पर,पल में ज़िंदगी बदल जाती है |इंसान बदल जातें है, दुनिया बदल जाती है |चेहरे बदल जातें है, तक़दीर बदल जाती है | इंसान वही है, फ़ितरत बदल जाती है,आँखें वही है, नज़रें बदल जाती है | ऐतबार किस पर करे हम, अजब,पलक झपकते मोहब्बत बदल जाती है | जाम … Continue reading छोडो ना कोई काम कल पर

चलिए कोई बात नहीं

आप हमारे साथ नहीं, चलिए कोई बात नहीं |आप हमारे हो ना सके, चलिए कोई बात नहीं | ज़िंदगी की धुप में अपनों की छाँव ना मिली,आपकी वफ़ा तक़दीर में नहीं, चलिए कोई बात नहीं | गैरों से प्यार मिला पर अपनों ने सितम ढाये,आप चले, हम रुक गए, चलिए कोई बात नहीं | दिल … Continue reading चलिए कोई बात नहीं

भारत का रहने वाला हूँ

है विपरीत जहाँ की रीत सदा,ऐसे जगह का हाल बताता हूँ |भारत का रहने वाला हूँ, भारत का हाल सुनाता हूँ | उंच-नीच, जाती-भाषा, यह सब का भेद मानते है |गीता-वेदों, क़ुरान-ग्रंथों के विपरीत ही बात दोहराते है | ऐसे ढोंगी लोगों से परम धर्म का सवाल उठाता हूँ |भारत का रहने वाला हूँ, भारत … Continue reading भारत का रहने वाला हूँ

बेमौत ना मरे

बेमौत ना मरे, तो क्या मरे ?मौत आकर भी ना मरे, तो क्या मरे ? ज़िंदगी के पीछे इतना हंगामा क्या ?खुद के लिए ना मरे, तो क्या मरे ? बारिश में ही तो भीगने का मज़ा हैऐसे ही मरे, तो क्या मरे ? एक बाज़ी खेल ही लो आज मेरे साथ,बिना हारे मरे, तो … Continue reading बेमौत ना मरे

बेइन्तहां, बेसबब

वह बीते लम्हों की किताब,वह कागज़ की कश्ती,वह यादों के गाने, वो प्यार की मस्ती,याद आता है मुझको सब, बेइन्तहां, बेसबब | गुज़रे थे जो पल चाहत के घर में |जलाये जो अरमान तेरे सफर में | वह तेरे बदन की खुशबु,वह तेरे होठों का गुलाब,वह तेरे ज़ुल्फ़ के झरने,वह तेरे चेहरे का आफताब,याद आता … Continue reading बेइन्तहां, बेसबब

बस एक कहानी है

यह मेरी है, मेरी है, ज़िंदगानी है,और कुछ नहीं, बस एक कहानी है | काश मैं इसके पन्ने बदल सकता,काश सिर्फ़ एक बार बदल सकता | मुझे इसे फ़िर एक बार सजानी है,और कुछ नहीं, बस एक कहानी है | वह जो गंदी लिखावट निशान छोड़ गयी,वह मेरी गलती पुरानी है | वह मेरी गलती … Continue reading बस एक कहानी है

बनाया तूने

अंगूर तूने बनाये, शराब बनाया तूने,मैं शेख था, ख़राब बनाया तूने | रास ना आयी तुझे जहान की रीत,पहले सुकून था, इज़्तराब बनाया तूने | तुझे शायद खुदा ने ख़ुदा बना दिया,मैं जी रहा था, सैलाब बनाया तूने | खुद तो आया ही नहीं पीने तुझे,शराब पी रहा था, अज़ाब बनाया तूने | मज़ाक बना … Continue reading बनाया तूने

बाग़म-ए-शाम थी

बाग़म-ए-शाम थी, ना राह-ए-हौसला था |बस प्यार की याद थी और उनका फैसला था | फ़िर भीगी हुई शाम ने पुकारा मेरे होठों को,फ़िर सुलगते अंगारों ने पुकारा मेरी चोटों को | ना, चाह थी, ना चाहतों का सिलसिला था,आँखों में तूफ़ान और दिल में ज़लज़ला था | पुकारता रहा यार को मेरे ताहद्-ए-नज़र,जाने उसने … Continue reading बाग़म-ए-शाम थी

ए भारत वंश

अपने ही वस्त्र उतार अपने को नग्न बनाया,ए भारत वंश तूने क्या नाम कमाया | राम और गौतम की यह धरती बेच डाली,तेरा ओछापन देख अंतकाल भी शरमाया | जो रोशिनी से मिटा सकता था अँधेरा,उसे ही नेत्रहीन का बेटा फ़रमाया | फ़िर महाभारत शुरू हो गयी,ए भारत वंश तूने क्या नाम कमाया | दूसरों … Continue reading ए भारत वंश

ए चाँद

ए चाँद, मत निकलना तू, मुझे तेरी आदत नहीं |जिसे याद करते था तुझे देख कर, अब वह दीलरुबा नहीं | चाँद संभाल तेरी चांदिनी को, बिखर ना जाये,मत कर इतनी रोशिनी,कहीं रात निकल ना जाए | ए चाँद, तुझपर भी दाग है, तुझसे हसीन मेरा यार,दो आँखों का नूर है वह, दो आँखों का … Continue reading ए चाँद

औरत

औरत तुझमें है दुर्गा और तुझमें है काली |तुझमें लक्ष्मी, सरस्वती और तुझमें शेरांवाली | तेरे ही दूध से हर वीर उस सरहद पर है फ़तेह,तुही अँधेरा मिटाये जग का, तुझमें ज्योतावाली | जब भरा पाप का घड़ा, तूने किया वध रावण का,तेरे ही से हर दिन मनाये होली, है तुझमें दिवाली | तुही जननी … Continue reading औरत

और हो मैकदे

बन गया है फसाद मज़हब का हत्यारा,और हो मैकदे देश में, यही है चारा | इंसान सब से जीता पर खुद से हारा,एक जाल और एक तो नक़ाब ने उसको मारा | मंदिर-मस्जिद बैर बढ़ाते, मेल कराती धारा,और हो मैकदे देश में, यही है चारा | चाहे हो सर ज़मीन, चाहे हो संसार सारा,अमन से … Continue reading और हो मैकदे

अपनी किताब में

अपनी बज़्म में मेरे लायक कुछ इंतज़ाम रखना,अपनी किताब में एक सफ़्हा मेरे नाम रखना | मुझे कोई शर्म नहीं है इस दुनिया से,नंगा करने का तमाशा सर-ए-आम रखना |अपनी किताब में एक सफ़्हा मेरे नाम रखना | बड़ी जल्दी में तूने बनाया इस जहान को,बस ! मिटाते वक़्त थोड़ा सा ध्यान रखना |अपनी किताब … Continue reading अपनी किताब में

और भी है अभी

वह खो गए तो क्या हुआ, रास्ते और भी है अभी |वह बिछड़ गए तो क्या हुआ, वास्ते और भी है अभी | खुश रहे, जहाँ भी वह रहे सदा,पुकारता है दिल उन्हें दे-दे के सदा | घूम के आएगी याद हमारी उन्हें भी कभी,कारवां और भी है, बहारें और भी है अभी | वह … Continue reading और भी है अभी

अपना मिलान

अपना मिलान तो होना ही था |दिल तेरे यहाँ खोना ही था | वह दौर एक मज़ाक ही तो था,वह एक सपन-सलोना ही था | बहुत कटी थी ज़िंदगी नागवार,तेरी गोद में सोना ही था | फ़ेंक ही दिया ना आखिर,यह जिस्म एक नमूना ही था | डूब गया गंगा में मैं,अपने पापों को धोना … Continue reading अपना मिलान

मैं भूल ही गया नाम अपना मेरा

ग़म ही नहीं आज सपना मेरा,तेरी आँखों में बनकर रहा अपना मेरा | ज़हर से नहीं तो याद से ही मार जाते,ना कांधों पर उठता शव अपना मेरा | होश ही ना रहा, क्या लिखता मैं ?ऐसा शायर अंदर का दफना मेरा | मैं तो हो गया अब सारे जहान का,सिर्फ़ हो ना सका खुद … Continue reading मैं भूल ही गया नाम अपना मेरा

अधूरा गीत

तेरे मिलान को कईं सदियाँ गयी बीत,सुनो, गा रहा यह मेरा अधूरा गीत | ना साज़ मिला, ना सुर, ना मिला संगीत,सुनो, गा रहा यह मेरा अधूरा गीत | मज़बूत कश्ती हार गयी, कच्चा घड़ा गया जीत,सुनो, गा रहा यह मेरा अधूरा गीत | सब संत कहते रीत ना जाने प्रीत,सुनो, गा रहा यह मेरा … Continue reading अधूरा गीत

अभी ग़म सोया है

एक ग़ज़ल लिख लूँ, अभी ग़म सोया है |हाल-ए-दिल लिख लूँ, अभी ग़म सोया है | उठेगा तो यह सर पर उठालेगा मेरा जहान,कागज़ पर कहानी लिख लूँ, अभी ग़म सोया है | उसने कहीं छुपा रखा है मेरा नसीब,अपनी ज़ुबानी लिख लूँ, अभी ग़म सोया है | उसको भी तोहफ़ा दिया जाए, चौंकाया जाए,उसकी … Continue reading अभी ग़म सोया है