आखिर ख़ुदा हार गया

पल-पल ही साथ रहा बनके कोई हिस्सा,कभी मैं इतिहास बना, कभी कोई किस्सा | मुझसे रूठ कर मेरा यार गया,कम्बख्त, आखिर ख़ुदा हार गया | बंद पन्नो मैं सांस लूँ कब तक ?कब आज़ाद कोई कलम को दूँ दस्तक ? मेरे गहरे सपनो में रहने वाले,पत्थर क्यों ख़रीदे कोई गहने वाले ?एहबाब में फिर कोई मुझे … Continue reading आखिर ख़ुदा हार गया

आधा हिंदु, आधा मुसल्मान हूँ

मैं पवित्र हूँ, मुस्सलम ईमान हूँ,आधा हिंदु, आधा मुसल्मान हूँ | मुल्क की खूबसूरती, तिरंगा-ए-शान हूँ,आधा हिंदु, आधा मुसल्मान हूँ | दिवाली का अली हूँ, रमज़ान का राम हूँ,आधा हिंदु, आधा मुसल्मान हूँ | एक ही चेहरे के दो निशान हूँ,आधा हिंदु, आधा मुसल्मान हूँ | मैं ही कपूर हूँ, मैं ही खान हूँ,आधा हिंदु, … Continue reading आधा हिंदु, आधा मुसल्मान हूँ

आपका रोशन चेहरा

आपका रोशन चेहरा माहताब सा है,दीवानो के लिए आफ़ताब सा है | आपकी यह नीलम सी आँखें,गोया गहरे तालाब सा है | आपकी यह हसीन ज़ुल्फ़ें,शीतल नदी की धार सा है | आपके यह गुलाबी होंठ,खिले फूओं के बाग़ सा है | आपका मिलकर भी ना मिलना,एक दर्द भरा अज़ाब सा है | आपका तस्सवूर … Continue reading आपका रोशन चेहरा

आधा

आधी ज़िंदगी भी बीत गयी, आधा साल भी |आधी जुर्रत भी खत्म हुई, आधी मज़ाल भी | याद करके तुझे खुद पी लिया काला जाम |आधी हुई ज़िंदगी निहाल, आधी बेहाल भी | कुछ ना हो तो सिर्फ़ तजुर्बा भी है गवारा |आधी सब बात सच है, आधी ख़याल भी | सुनते ही होंगे उन … Continue reading आधा

आज ख़ुशी मिली है इतनी

आज ख़ुशी मिली है इतनी, नहीं कभी मिली है जितनी | खिल गए रंग तितली जैसे, मैं भी खिल गयी हूँ इतनी | आज मेरी राह को मंज़िल मिल गयी,साफ़ दीखता है मंजर,लहराते उड़ते जाना है वहाँ, हट गयी धुंध थी जितनी | मोर पंख खिलते सावन-बाधो में छम-छम जैसे,फूलों में फिरूँ भंवर करके हम-हम … Continue reading आज ख़ुशी मिली है इतनी

आ भी ना सकूँ

हम हो ना हो पर हर बज़्म याद रखेगी मुझको,मैं बीती तारीख़ नहीं के फ़िर लौट के आ भी ना सकूँ | अपनी आँख में ना रखना, खर्च कर देना मुझको,मैं वह अश्क़ नहीं के फ़िर लौट के आ भी ना सकूँ | और जब भी जी चाहे, बुला लेना मुझको अजब,मैं बीता वक़्त नहीं … Continue reading आ भी ना सकूँ

अजब हूँ

उर्दूआईज़ड हिंदी लिखता हूँ,फ़िर रोमनाईज़ड हिंदी लिखता हूँ |अजब हूँ, शायरी बड़ी गंदीआइज़ड लिखता हूँ | कभी बेक्ड, कभी डीप फ्राइड,कभी चॉपड, कभी डाइसड लिखता हूँ |अजब हूँ, शायरी बड़ी गंदीआइज़ड लिखता हूँ | अदना सा हूँ, पर बातें किंगसाइज़ड लिखता हूँ |अजब हूँ, शायरी बड़ी गंदीआइज़ड लिखता हूँ | दिमाग से हूँ बिलकुल देसी,पर सोच … Continue reading अजब हूँ