ए चाँद, मत निकलना तू,
मुझे तेरी आदत नहीं |
जिसे याद करते था तुझे देख कर,
अब वह दीलरुबा नहीं |
चाँद संभाल तेरी चांदिनी को,
बिखर ना जाये,
मत कर इतनी रोशिनी,
कहीं रात निकल ना जाए |
ए चाँद, तुझपर भी दाग है,
तुझसे हसीन मेरा यार,
दो आँखों का नूर है वह,
दो आँखों का इंतज़ार |
ए चाँद, नहाता है तू अपनी चांदिनी में,
पर दाग धो ना सका,
जिससे मैंने दिल लगाया,
वह दिल मेरा हो ना सका |
ए चाँद, मत निखर इतना,
कि मैं पतंगा नहीं,
छूना चाहते है तुझे,
पर मेरे पंख नहीं |
जिसे याद करते था तुझे देख कर,
अब वह दीलरुबा नहीं |
Beautifully written
Thanks a lot.