दादर स्टेशन

जब धड़कने रुक जाए,होश उड जाए,पसीने छुट जाए,शरीर कांप जाए,खून सूख जाए,चैन खो जाए,इज्ज़त का कचरा हो जाए,आँख से समुंदर आ जाए,रग-रग में करंट दौड़ जाये,खून खौल जाए,भूखे भेडिये नज़र आएं,क़त्ल करने का मन बन जाए,कोई उम्मीद नज़र ना आये,इंसानियत से भरोसा उठ जाए,तब समझ जाना,दादर स्टेशन आ गया |