प्रारंभ ही हुआ युद्ध से

प्रारंभ ही हुआ युद्ध से,
अब हसकर लड़ ख़ुद से ।
ले यलगार का हाला हाथ, 
अलग कर मिश्रित को शुद्ध से ।
अंत कोई अंतिम नियति नहीं, 
अब क्या डरना प्रारब्ध से ?

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