एक था दानव

एक था दानव ।
नाम था उसका मानव ।
छल-कपट की कला थी चट्टान जैसी,
हृदय से था वह पालव ।
बातें थी उसकी दल-दल सी गाढ़ी ।
दिमाग में था तानव ।
निपुण व्यापारी था, खरीदें बेचने का पंडित ।
बेच दिया सारा संसार एक दिन उसने,
बन गया महामानव ।
फ़िर, अचानक से उसकी आँख खुली ।
देखा तो वह था केवल एक दानव ।
नाम था उसका मानव ।

Leave a Reply