फ़िर ट्रेन में लटककर जाने का मज़ा कुछ और है |
वह उम्र भी मस्त थी, इस उम्र का मज़ा कुछ और है |
रगों में चालीस के कीड़े दौड़ रहे है |
मज़ा पहले भी था पर अब मज़ा कुछ और है |
शराब की बोतल ही अपना स्विमिंग पूल थी,
अब शराब को हाथ से पीने का मज़ा कुछ और है |
पहले रोज़ मिलते-जुलते थे सब यार अजब,
अब व्हात्सप्प पर मिलने-जुलने का मज़ा कुछ और है |
आगे कितने दिन बचे है पता ही नहीं |
यह दिन गिनने का मज़ा कुछ और है |
Reblogged this on The Shubham Stories.
I’m so grateful!
🙏❤