पुस्तक

रात दरवाज़े पर हुई दस्तक,
देखा तो थी एक पुस्तक |
मैंने उसे अंदर बुलाया, पानी पिलाया |
उसने भी प्रेम से मेरा दामन भर दिया |
रत गहरेरी थी पर पुस्तक ने उजाला कर दिया था |
अपने ज्ञान को सांझा कर दिया था |
बात कठिन थी,
पर पहुंची दिल से दिल तक |
जैसे क़यामत से क़यामत तक |
रात दरवाज़े पर हुई दस्तक,
देखा तो थी एक पुस्तक |

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