दिखाई देता है

जहाँ तक सेहरा दिखाई देता है |
मेरी तरह अकेला दिखाई देता है |

ना कोई फूल है दामन में, ना रंग है कोई और,
ना आगाज़, ना कोई अंजाम दिखाई देता है |

मेरी तरह वो भी आतिश है,
में भी वीरान, वो भी बर्बाद दिखाई देता है |

हो फुर्सत तो देखिये ज़ख्मों को,
यहाँ हर नज़ारा धुंधला दिखाई देता है |

वो सेहरा है और मैं इंसान अजब,
फिर भी कितना मरासिम दिखाई देता है |

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