महबूब का महाबूब देख कर खड़ा हो गया,मेरा ईमान जो अब तक सोया था ।
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उसने बदल दिए
उसने बदल दिए अपने रास्ते ।मैं हिलाता रह गया उसके वास्ते ।
क्यों देती रहती हो
क्यों देती रहती हो सबको,गालियाँ भर-भर कर ?हम तो सब प्यार तुझे करते हैं,मर-मर कर ।
इतने बड़े-बड़े
इतने बड़े-बड़े थे,उसके दुःख ।कुछ बांट लेती,तो मिलता थोड़ा सुख ।
दो बड़े-बड़े
दो बड़े-बड़े थे,तिल उसके गालों पर ।मैं तो मर ही मिटा,उन सालों पर ।
मेरा लंबा था
मेरा लंबा था,उसका गहरा ।मेरा रास्ता,उसका इंतज़ार ।
ऐसा लगाया शॉट
ऐसा लगाया शॉट कि हो गया पिछवाड़ा सुन ।डॉक्टर बड़ा ही ज़ालिम था पर था उसमें गुण ।
हिलाओ ना !
हिलाओ ना ! हिलाते कयों नहीं हो ?दवाई पर लिखा है ना,हिलाकर पियो ।
तमन्नों के बहलावे में
तमन्नों के बहलावे में आख़िर आ गया ।अपना सामान लेकर ना जाने कहाँ आ गया ।
बहुत दिनों से
बहुत दिनों से घुसाया नहीं सामान माले पर ।कुछ नंगी कहानियाँ लटक रही हैं जाले पर ।
तेरे आने से
तेरे आने से सेक्शन हुआ था गरम,तूने मुझे छोड़ दिया, बेवफ़ा सनम ।तूने दिल के साथ मेरा चश्मा भी तोड़ दिया ।और मैंने इस उम्मीद में चश्मा नहीं बनाया,कि अब देखना किसे है, बेवफ़ा सनम ।
मैं अपना ही पकड़ कर बैठा रहा
मैं अपना ही पकड़ कर बैठा रहा,पुराना ज़माना ।खड़ा भी हुआ, सोया भी,तब तक सारा ज़माना ।
यार ही रब है
यार ही रब है। यार ही सब है ।यार का क्या कहना ?यार अजब है ।
पक्कड़ कर हाथों से
पक्कड़ कर हाथों से,दबाया मैंने उसका साथ ।ज़ोर से मेरे गालों पर,मिली मुझे एक सौगात ।
उसने खड़ा कर के छोड़ दिया
उसने खड़ा कर के छोड़ दिया,मेरे अंदर के स्वाभिमान को ।मैं रात भर हिलाता रहा,अपने अंदर के सोए इंसान को ।
तेरी प्यास मैं कैसे बुझाऊँ ?
तेरी प्यास मैं कैसे बुझाऊँ ? मैं पानी तो नहीं ।मुझे तुझसे प्यार है, कोई मेहरबानी तो नहीं ।
कुछ बेक़रारी भी थी
कुछ बेक़रारी भी थी, तरार भी ।रात लंबी भी थी, ईमानदार भी ।
दानव
एक है दानव ।नाम है उसका मानव ।
भारत
सौगंध खाता हूं कि विश्वास की इमारत नहीं तोड़ूंगा ।अपने देश को हिंदुस्तान नहीं भारत बोलूंगा ।
शराब छोड़ दी मैंने
शराब छोड़ दी मैंने ।शराफ़त छोड़ दी मैंने ।शराफ़त छोड़ दी मैंने ।और भी कुछ बाकी था तो,शररत छोड़ डी मैंने |
किस्से और कहानियों का दौर
किस्से और कहानियों का दौर नहीं रहा ।अब मैं शराब की ओर नहीं रहा ।
आज़ादी
सारी बोतल बाथरूम में बहादी ।हो मुबारक मुझको यह आज़ादी ।
मगर मैं लड़ता हूं
कभी मैं टूटता हूं, कभी मैं जुड़ता हूं ।कुछ ऐसे ही सौ बार, मगर मैं लड़ता हूं ।
मेरी और उसकी
मेरी और उसकी बहुत जमती है ।वह मुझसे दूर रहता है और मैं उससे ।
चमगादड़
चमगादड़ जैसे वीरानों में ।मशहूर हूं मैं दीवानों में ।
हम दोनों
हम दोनों ही कुछ आगे बढ़े ।मैं उसकी तरफ़, वह मुझसे दूर ।
कुछ तो बात है मुझमें
कुछ तो बात है मुझमें,मैं अब तक ज़िंदा हूं ।
मुझे इतना मिस मत करो
मुझे इतना मिस मत करो, यारों ।कहीं मिस करते-करते मिसाइल ना बन जाओ ।
मैं अहमक़ हूं
मुझे इल्म-ए-जहान हासिल नहीं ।मैं अहमक़ हूं, फ़ाज़िल नहीं ।
हर कोई भिखारी है
जिंदगी की लोकल ट्रेन में, हर कोई सवारी है ।किस से मांगने जाएं, हर कोई भिखारी है ।
ख़यालों का गुलदस्ता
कुछ तो इस्तीरार से गहरा वाबस्ता है ।जिंदगी मुसलसल ख़यालों का गुलदस्ता है ।
शराब पी जाय
जिंदगी थोड़ी ख़राब की जाय ।ख़ुदा का हुक्म है, शराब पी जाय ।
दुनिया जीना चाहती है
कुछ तो चैन के घुट पीना चाहती है ।कैसे भी हो, दुनिया जीना चाहती है ।
चाहत रूह से करो
मांगते नहीं, ना पीर, ना फ़कीर से ।चाहत रूह से करो, नाकी शरीर से ।
जहाँ मोहब्बत, वहाँ तबाही
सारा जहान देगा गवाही ।जहाँ मोहब्बत, वहाँ तबाही ।
मेरी रज़ा
यही मेरी रज़ा है ।माफ़ी मेरी सज़ा है ।
मुझे किसने मारा
वैसे तो मेरी लियाक़त नहीं ।पर पेश यह क़ता है ।यूं तो लिखने का शौक़ है मुझे,पर इसमें मेरी क्या ख़ता है ?वैसे तो खुली किताब है मेरी ज़िंदगी,पर मुझे किसने मारा यह सिर्फ़ मुझे पता है ।
पुराने रिश्तों की कब्र
पुराने रिश्तों की कब्र खोदते हो ?कभी खंडर देखा है शाम के बाद ?
सैलेरी
यह क्या जादू है तेरा, सैलेरी ?हर जगह तु ही तु नज़र आती है ।
रकीबों को जमा करना
रकीबों को जमा करना मेरा शौक है ।रफ़ाकत साली मुझे रास नहीं आती ।
जीवन इतना परेशान
जीवन इतना परेशान कभी नहीं था ।मन इतना पशेमान कभी नहीं था ।रात गहरी नज़र आती है,पर इतमीनान इतना कभी नहीं था ।
जब नींद आती है
जब नींद आती है, ख़्वाब बुनने लगता हूं ।जब नशा टूटता है, होश चुनने लगता हूं ।
आंखें तेरी
आंखें तेरी जैसे आईना ।दिखती हिरन है,पर है तु हाईना ।
कल रात मेरी मौत हो गयी
कल रात मेरी मौत हो गयी ।ना जाने जान कहाँ लेकर आ गया ।एक गलती मुझसे हो गयी ।क़ातिल को अपने घर लेकर आ गया ।
आज शनिवार है
आज शनिवार है पर मन सोगावर है ।कहाँ है तु, मेरे यार ? तेरा इंतज़ार है ।
हमसफ़र नही तो
हमसफ़र नही तो हमदर्द तो बनने दे ।पूरी ग़ज़ल नही तो फ़र्द तो बनने दे ।कुछ भी करके तुझसे जुड़ा रहना चाहता हूं ।सेरिडॉन नहीं तो सरदर्द तो बनने दे ।
बात से बात बढ़ाओ
बात से बात बढ़ाओ तो कोई बात तो बने ।वरना बेबात ही रह जाएंगे और बात रह जाएगी ।
नए ग़म
तिश्नगी ज़्यादा है ।समंदर है कम ।मसर्रत पुरानी है ।नए है ग़म
तदबीर उल्टी पड़ गयी
तदबीर उल्टी पड़ गयी, जब तकदीर कम पड़ गयी ।ताबीर इतनी ज़्यादा हुई, जब तहरीर कम पड़ गयी ।
दस्त-ए-क़िस्मत
दस्त-ए-क़िस्मत ने फाड़ के फेंक दिया,निकल गई सरकशी जो बाकी थी ।सर इधर गिरा, दामन उधर गिरा,बस यही एक ख़ुदकशी बाकी थी ।
यार अजब है
यार ही रब है। यार ही सब है।यार का क्या कहना ?यार अजब है।