तेरे आने से

तेरे आने से सेक्शन हुआ था गरम,तूने मुझे छोड़ दिया, बेवफ़ा सनम ।तूने दिल के साथ मेरा चश्मा भी तोड़ दिया ।और मैंने इस उम्मीद में चश्मा नहीं बनाया,कि अब देखना किसे है, बेवफ़ा सनम ।

मुझे किसने मारा

वैसे तो मेरी लियाक़त नहीं ।पर पेश यह क़ता है ।यूं तो लिखने का शौक़ है मुझे,पर इसमें मेरी क्या ख़ता है ?वैसे तो खुली किताब है मेरी ज़िंदगी,पर मुझे किसने मारा यह सिर्फ़ मुझे पता है ।

हमसफ़र नही तो

हमसफ़र नही तो हमदर्द तो बनने दे ।पूरी ग़ज़ल नही तो फ़र्द तो बनने दे ।कुछ भी करके तुझसे जुड़ा रहना चाहता हूं ।सेरिडॉन नहीं तो सरदर्द तो बनने दे ।