मुझे इतना मिस मत करो, यारों ।कहीं मिस करते-करते मिसाइल ना बन जाओ ।
Category: आज़ाद शेर
मैं अहमक़ हूं
मुझे इल्म-ए-जहान हासिल नहीं ।मैं अहमक़ हूं, फ़ाज़िल नहीं ।
हर कोई भिखारी है
जिंदगी की लोकल ट्रेन में, हर कोई सवारी है ।किस से मांगने जाएं, हर कोई भिखारी है ।
ख़यालों का गुलदस्ता
कुछ तो इस्तीरार से गहरा वाबस्ता है ।जिंदगी मुसलसल ख़यालों का गुलदस्ता है ।
शराब पी जाय
जिंदगी थोड़ी ख़राब की जाय ।ख़ुदा का हुक्म है, शराब पी जाय ।
दुनिया जीना चाहती है
कुछ तो चैन के घुट पीना चाहती है ।कैसे भी हो, दुनिया जीना चाहती है ।
चाहत रूह से करो
मांगते नहीं, ना पीर, ना फ़कीर से ।चाहत रूह से करो, नाकी शरीर से ।
जहाँ मोहब्बत, वहाँ तबाही
सारा जहान देगा गवाही ।जहाँ मोहब्बत, वहाँ तबाही ।
मेरी रज़ा
यही मेरी रज़ा है ।माफ़ी मेरी सज़ा है ।
मुझे किसने मारा
वैसे तो मेरी लियाक़त नहीं ।पर पेश यह क़ता है ।यूं तो लिखने का शौक़ है मुझे,पर इसमें मेरी क्या ख़ता है ?वैसे तो खुली किताब है मेरी ज़िंदगी,पर मुझे किसने मारा यह सिर्फ़ मुझे पता है ।
पुराने रिश्तों की कब्र
पुराने रिश्तों की कब्र खोदते हो ?कभी खंडर देखा है शाम के बाद ?
सैलेरी
यह क्या जादू है तेरा, सैलेरी ?हर जगह तु ही तु नज़र आती है ।
रकीबों को जमा करना
रकीबों को जमा करना मेरा शौक है ।रफ़ाकत साली मुझे रास नहीं आती ।
जीवन इतना परेशान
जीवन इतना परेशान कभी नहीं था ।मन इतना पशेमान कभी नहीं था ।रात गहरी नज़र आती है,पर इतमीनान इतना कभी नहीं था ।
जब नींद आती है
जब नींद आती है, ख़्वाब बुनने लगता हूं ।जब नशा टूटता है, होश चुनने लगता हूं ।
आंखें तेरी
आंखें तेरी जैसे आईना ।दिखती हिरन है,पर है तु हाईना ।
कल रात मेरी मौत हो गयी
कल रात मेरी मौत हो गयी ।ना जाने जान कहाँ लेकर आ गया ।एक गलती मुझसे हो गयी ।क़ातिल को अपने घर लेकर आ गया ।
आज शनिवार है
आज शनिवार है पर मन सोगावर है ।कहाँ है तु, मेरे यार ? तेरा इंतज़ार है ।
हमसफ़र नही तो
हमसफ़र नही तो हमदर्द तो बनने दे ।पूरी ग़ज़ल नही तो फ़र्द तो बनने दे ।कुछ भी करके तुझसे जुड़ा रहना चाहता हूं ।सेरिडॉन नहीं तो सरदर्द तो बनने दे ।
बात से बात बढ़ाओ
बात से बात बढ़ाओ तो कोई बात तो बने ।वरना बेबात ही रह जाएंगे और बात रह जाएगी ।
नए ग़म
तिश्नगी ज़्यादा है ।समंदर है कम ।मसर्रत पुरानी है ।नए है ग़म
तदबीर उल्टी पड़ गयी
तदबीर उल्टी पड़ गयी, जब तकदीर कम पड़ गयी ।ताबीर इतनी ज़्यादा हुई, जब तहरीर कम पड़ गयी ।
दस्त-ए-क़िस्मत
दस्त-ए-क़िस्मत ने फाड़ के फेंक दिया,निकल गई सरकशी जो बाकी थी ।सर इधर गिरा, दामन उधर गिरा,बस यही एक ख़ुदकशी बाकी थी ।
यार अजब है
यार ही रब है। यार ही सब है।यार का क्या कहना ?यार अजब है।