तन्हाईयां बोलती हैं

मन के समुंदर की गहराईयां बोलती हैं ।कोई नहीं बोलता जब तन्हाईयां बोलती हैं ।हर जुर्म की सज़ा मिलती है यहां,कोई नहीं बचता जब गवाहियां बोलती हैं ।जिंदगी की धूप भी अजब है ।अंधेरों में परछाइयां बोलती हैं ।जब दर्द हद्द से गुज़र जाता है,चीख़-चीख़ के रुसवाईयां बोलती हैं ।कोई नहीं बोलता जब तन्हाईयां बोलती … Continue reading तन्हाईयां बोलती हैं

पता तो करो

कौन है जो मोहब्बत बांट रहा है ?पता तो करो ।कौन है जो ग़म बांट रहा है?पता तो करो ?सब को गले लगा रहा है, प्रेम की बोली बोल रहा है ।मन निर्मल है, होटों पर सच है ।इतना घातक प्राणी इस जहान में, हाय रब्बा !कौन है वह अजब?पता तो करो |

आदतें अच्छी भी थीं

आदतें अच्छी भी थीं पर उनका खर्चा ना हुआ ।कितना भी प्रयत्न किया पर दिल सच्चा ना हुआ ।ना जाने कितने घर बदलने पड़े इस कंजूसी में,कभी ख़ुद निकला, कभी निकाला गया ।काम अच्छा ना था, अंजाम भी अच्छा ना हुआ ।

इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला

या मौला ! भर दे झोला ।इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।बातें तेरी जैसे बर्फ़ का गोला ।इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।तुम इंसान हो या शोला ?इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।आख़िर दिल तूने खोला ।इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।

ख़ामोशी की चीख

क्या कभी ख़ामोशी की चीख सुनी है ?क्या कभी चुप रहकर चिल्लाए हो ?क्या कभी रब को जबाज़ा देखा है ?क्या कभी ख़ुद इश्क़ में झल्लाए हो ?

तेरे आने से

तेरे आने से सेक्शन हुआ था गरम,तूने मुझे छोड़ दिया, बेवफ़ा सनम ।तूने दिल के साथ मेरा चश्मा भी तोड़ दिया ।और मैंने इस उम्मीद में चश्मा नहीं बनाया,कि अब देखना किसे है, बेवफ़ा सनम ।