कहत कबीर जग में, भांति भांति के लोग ।कुछ हैं मादरचोद, कुछ बहुते मादरचोद ।
Category: आज़ाद शेर
शराब पीते रहो
आजकल यही आशीर्वाद देता हूं,कि जीते रहो, ज़ख्मों को सिते रहो,और कुछ ना काम आए तो,शराब पीते रहो ।
उस्ताज़
मैंने तो सोचा की वह उस्ताद है ।पर वह तो उस्ताज़ निकला ।
मैं कहीं खो गया हूं
मैं कहीं खो गया हूं ।जागते हुए सो गया हूं ।
बादलों का घेराव है
बादलों का घेराव है ।आज सोच में ठहराव है ।
जग में सुंदर हैं
जग में सुंदर हैं दो नाम ।एक है बर्फ़, एक है जाम ।
इश्क़
इश्क़ एक तरफ़ा हो तो सज़ा है ।दो तरफ़ा हो तो मज़ा है ।
कैफ़ीयत
रहता हूं मैं आजकल कुछ ख़याल में ।सोचता हूं जोड़ लूं कैफ़ीयत अपने नाम में ।
अहल-ए-दिल
अहल-ए-दिल दीखते तो थे वह शक़्ल से।दिल का सौदा कर दिया उसने अकल से।
फिर दिल टूट गया
आज फिर दिल टूट गया ।आज फिर ख़ुदा ने लूट लिया ।
इंसान हूं
धरती पर सामान हूं ।तुक्के से इंसान हूं ।
तन्हाईयां बोलती हैं
मन के समुंदर की गहराईयां बोलती हैं ।कोई नहीं बोलता जब तन्हाईयां बोलती हैं ।हर जुर्म की सज़ा मिलती है यहां,कोई नहीं बचता जब गवाहियां बोलती हैं ।जिंदगी की धूप भी अजब है ।अंधेरों में परछाइयां बोलती हैं ।जब दर्द हद्द से गुज़र जाता है,चीख़-चीख़ के रुसवाईयां बोलती हैं ।कोई नहीं बोलता जब तन्हाईयां बोलती … Continue reading तन्हाईयां बोलती हैं
अजायबघर
दिखती नहीं पर है ।दुनिया अजायबघर है ।
छाता
बादल आए, बरसे और गए भी ।मैं अभी तक छाता ही ढूंढ रहा हूं ।
चार दोस्त
चार दोस्त निभाने के लिए ।चार दोस्त उठाने के लिए ।
आज शराब बीमार है
आज शराब बीमार है ।मयखाना बंद रहेगा ।
मैंने दुनिया बदलने का ख़्वाब
मैंने दुनिया बदलने का ख़्वाब दफ़न कर दिया ।अपने आप को बदलने का काम दफ़'अतन कर दिया ।
ख़ुदा मेरे पीछे पड़ गया
मौत से क्या बच निकला मैं,ख़ुदा मेरे पीछे ही पड़ गया ।
शराब की एक खास बात
शराब की एक खास बात है ।असली मज़ा सब के साथ है ।
अजल
अज़ल से यही कहानी है ।अजल ही जिंदगानी है ।
हिकायत
मेरी यही हिकायत है ।मुझे तुमसे शिकायत है ।
मुश्त-ए-ख़ाक
ज़िंदगी क्या है ?मुश्त-ए-ख़ाक है ।
मेरे शेर
मेरे शेर कोई पढ़ता नहीं ।इसीलिए मुझसे कोई लड़ता नहीं ।
रिंद
मुझे क्या ख़ुदा से ?मैं तो रिंद हूं ।
मयकदा
यहीं पर तो असल में ख़ुदा निकला ।बुतखाने से अच्छा तो मयकदा निकला ।
दिल-पिशोरी
नज़रों से ईमान की चोरी हो रही है ।यह क्या दिल-पिशोरी हो रही है ?
दिल-गिरफ़्ता
बड़ा ही लंबा यह हफ़्ता है ।दिल मेरा दिल-गिरफ़्ता है ।
पता तो करो
कौन है जो मोहब्बत बांट रहा है ?पता तो करो ।कौन है जो ग़म बांट रहा है?पता तो करो ?सब को गले लगा रहा है, प्रेम की बोली बोल रहा है ।मन निर्मल है, होटों पर सच है ।इतना घातक प्राणी इस जहान में, हाय रब्बा !कौन है वह अजब?पता तो करो |
दीवारें
कभी शांत हैं, कभी मचाती हैं शोर ।यह दीवारें है, आपकी दोस्त |
ना सोचा, ना समझा
ना सोचा, ना समझा और बात की ।मिली बड़ी सज़ा मुझे उस बात की ।
हाल बेहूदा
ना सनम मिला,ना ख़ुदा मिला ।यहाँ-वहाँ भी ख़ुदा मिला ।मेट्रो के चक्कर में,हर हाल बेहूदा मिला ।
मेरा रंगीन पानी
वैसे तो रंग हमेशा उतरता है ।पर मेरा रंगीन पानी चढ़ता है।
फ़रिश्ता
मेरे लिए लाया खुशी का रिश्ता ।मेरे लिए आया एक फ़रिश्ता।
तुम मुस्कुराओगे तो
तुम मुस्कुराओगे तो थोड़ा सहारा होगा ।वरना यह जग सारा नागवारा होगा ।
मैंने अपनी जान
मैंने अपनी जान उसके कदमों पर रख दी ।ज़रा सी चीज़ थी, उसने नाजाने उठाकर कहाँ रख दी ।
रातों को नाजाने कहाँ
रातों को नाजाने कहाँ चला जाता हूं मैं ।शायद आपके ख़्वाबों में चला आता हूं मैं ।
आजकल टुकड़ों-टुकड़ों में
आजकल टुकड़ों-टुकड़ों में सो रहा हूं ।तुम्ही बोलो की मामला क्या है ?
यह साल
यह साल मेरे लिए अच्छा था ।किसी के दिल में उतरा, किसी के दिल से उतरा ।
तुम्हें एक दिन कुत्ता काटेगा
जैसे लोहा, लोहे काटता है |जैसे ज़हर, ज़हर को मारता है |वैसे ही,तुम्हें एक दिन कुत्ता काटेगा ।
अगर मोहब्बत में तुम आज़ाद नहीं हो,तो मोहब्बत में तुम शाद नहीं हो ।
जिसको समझता था
जिसको समझता था सख़्त बर्फ़ की तरह ।वह कमबख़्त पिघल गया लोहे की तरह ।
हार गया आज
हार गया आज, जीत गया माज़ी ।हार गए हम अपनी उलफ़त की बाज़ी ।
किसे ख़बर थी
किसे ख़बर थी बढ़ेगी और तारिकी ।चुनने लगेंगे हम अपने रिश्ते की बारीकी ।
यह कैसी खुदगर्ज़ी ?
यह कैसी खुदगर्ज़ी ? क्या है तेरी मर्ज़ी ?मेरी रूह लौटा दे, इतनी तो कर हमदर्दी ।
भीगी रात थी
भीगी रात थी मगर ।हाथों में हाथ था मगर ।कुछ ना हुआ आगे,कोई उम्मीद ना आयी नज़र ।
भूखे भेड़िए
भूखे भेड़िए हो तो आयेंगी काम ।रात-दिन, सुबह-शाम ।डबल मज़ा है और कम दाम,सौतेली रांडें हैं इनका नाम ।
आदतें अच्छी भी थीं
आदतें अच्छी भी थीं पर उनका खर्चा ना हुआ ।कितना भी प्रयत्न किया पर दिल सच्चा ना हुआ ।ना जाने कितने घर बदलने पड़े इस कंजूसी में,कभी ख़ुद निकला, कभी निकाला गया ।काम अच्छा ना था, अंजाम भी अच्छा ना हुआ ।
इश्क़
इश्क़ ही आग़ाज़ ।इश्क़ ही अंत ।मैं भी इश्क़, तू भी इश्क़ ।इश्क़ हर ग्रंथ ।
चलो मार लेते हैं
चलो मार लेते हैं,पड़ोसन की बाज़ी ।चलो कर लेतें हैं,उसको राज़ी ।
लगे रहो, डटे रहो
लगे रहो, डटे रहो, मत डर ।खड्डा ही है सांप का असली घर ।
डालो ना !
डालो ना ! डालो ना !ऐसा कचरे के डब्बे पर लिखा था ।
इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला
या मौला ! भर दे झोला ।इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।बातें तेरी जैसे बर्फ़ का गोला ।इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।तुम इंसान हो या शोला ?इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।आख़िर दिल तूने खोला ।इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला ।
मेरी तो मार दी
मेरी तो मार दी है महंगाई ने ।अब तो उठ ही नहीं पाता मैं अपने पैरों पर ।
मोहब्बत का मज़ा
तु मेरी ले ले ।मैं तेरी ले लूं ।हम दोनो ले लें ।अपनी मोहब्बत का मज़ा ।
ऐसे ना दिखाओ
ऐसे ना दिखाओ.नज़ाकत,कहीं उठ ना जाए,सारा ज़माना ।
यह मेरा दिल
यह मेरा दिल,क्या है इसका मुस्तक़बिल ?
रात चुप-चाप चली आती है ।जब उसकी बात चली आती है ।
मेरे सारे जज़्बात
मेरे सारे जज़्बात तू ही तो है ।मैं खुश है कि साथ तू ही तो है ।
तुझसे मोहब्बत है मुझे
तुझसे मोहब्बत है मुझे ।सिर्फ़ तेरी रग़बत है मुझे ।
तेरी मेरी कहानी
तेरी मेरी कहानी का वृत्तांत मैंने सबको कर दिया है ।अब क्या कहेंगे लोग ? शांत मैंने सबको कर दिया है ।
दिल की कर्कशनाद
दिल की कर्कशनाद दूर तक गयी ।हिकायत उसके बाद दूर तक गयी ।
ख़ामोशी की चीख
क्या कभी ख़ामोशी की चीख सुनी है ?क्या कभी चुप रहकर चिल्लाए हो ?क्या कभी रब को जबाज़ा देखा है ?क्या कभी ख़ुद इश्क़ में झल्लाए हो ?
शेर-ओ-शायरी भी इबादत है
जैसे शेर-ओ-शायरी भी इबादत है ।वैसे ही दिल पिशोरी मेरी आदत है ।
गंदे गोश्त की कहानी
बिस्तर पर गुज़री मेरी अंधी जोश-ए-जवानी ।क्या सुनाऊं तुम्हे मेरे गंदे गोश्त की कहानी ।
मो से ना बनाओ बत्तियां
मो से ना बनाओ बत्तियां ।सारी रात ना सोइं रत्तियां ।
रायता
इतना क्यों फ़ैला रखा है रायता ?मांग लो अगर चाहिए सहायता ।
खोल कर रख दिया
खोल कर रख दिया है मैंने तुम्हारे सामने,अपने दुःख का पिटारा ।क्या दे सकोगी मुझको ?फ़िर से वह प्यार दोबारा ?
क्या नंगा ही करके रहोगी ?
क्या नंगा ही करके रहोगी ?मेरे राज़ों को ।क्या चूस कर ही रहोगी ?मेरा ख़ून ।
आग और बर्फ़
वह आग है और मैं बर्फ़ ।हम दोनों में क्या हैं फ़र्क ?हम दोनों जलाते हैं ।
मेरे हाथों में
मेरे हाथों में है उसकी तस्वीर ।उसके हाथों में है मेरी तक़दीर ।
वह मुझपर पत्थर फेंकता रहा
वह मुझपर पत्थर फेंकता रहा ।मैं मुस्कुराता-खड़ा देखता रहा ।
पीले मेरे हाथों से पानी
पीले मेरे हाथों से पानी, प्यास लगी होगी ।कुछ टूटे-फूटे अरमानों को आस लगी होगी ।
अपना खोल कर
अपना खोल कर,दिल बताती क्यों नही ?कितना गहरा है,प्यार बताती क्यों नहीं ?
महबूब का महाबूब
महबूब का महाबूब देख कर खड़ा हो गया,मेरा ईमान जो अब तक सोया था ।
उसने बदल दिए
उसने बदल दिए अपने रास्ते ।मैं हिलाता रह गया उसके वास्ते ।
क्यों देती रहती हो
क्यों देती रहती हो सबको,गालियाँ भर-भर कर ?हम तो सब प्यार तुझे करते हैं,मर-मर कर ।
इतने बड़े-बड़े
इतने बड़े-बड़े थे,उसके दुःख ।कुछ बांट लेती,तो मिलता थोड़ा सुख ।
दो बड़े-बड़े
दो बड़े-बड़े थे,तिल उसके गालों पर ।मैं तो मर ही मिटा,उन सालों पर ।
मेरा लंबा था
मेरा लंबा था,उसका गहरा ।मेरा रास्ता,उसका इंतज़ार ।
ऐसा लगाया शॉट
ऐसा लगाया शॉट कि हो गया पिछवाड़ा सुन ।डॉक्टर बड़ा ही ज़ालिम था पर था उसमें गुण ।
हिलाओ ना !
हिलाओ ना ! हिलाते कयों नहीं हो ?दवाई पर लिखा है ना,हिलाकर पियो ।
तमन्नों के बहलावे में
तमन्नों के बहलावे में आख़िर आ गया ।अपना सामान लेकर ना जाने कहाँ आ गया ।
बहुत दिनों से
बहुत दिनों से घुसाया नहीं सामान माले पर ।कुछ नंगी कहानियाँ लटक रही हैं जाले पर ।
तेरे आने से
तेरे आने से सेक्शन हुआ था गरम,तूने मुझे छोड़ दिया, बेवफ़ा सनम ।तूने दिल के साथ मेरा चश्मा भी तोड़ दिया ।और मैंने इस उम्मीद में चश्मा नहीं बनाया,कि अब देखना किसे है, बेवफ़ा सनम ।
मैं अपना ही पकड़ कर बैठा रहा
मैं अपना ही पकड़ कर बैठा रहा,पुराना ज़माना ।खड़ा भी हुआ, सोया भी,तब तक सारा ज़माना ।
यार ही रब है
यार ही रब है। यार ही सब है ।यार का क्या कहना ?यार अजब है ।
पक्कड़ कर हाथों से
पक्कड़ कर हाथों से,दबाया मैंने उसका साथ ।ज़ोर से मेरे गालों पर,मिली मुझे एक सौगात ।
उसने खड़ा कर के छोड़ दिया
उसने खड़ा कर के छोड़ दिया,मेरे अंदर के स्वाभिमान को ।मैं रात भर हिलाता रहा,अपने अंदर के सोए इंसान को ।
तेरी प्यास मैं कैसे बुझाऊँ ?
तेरी प्यास मैं कैसे बुझाऊँ ? मैं पानी तो नहीं ।मुझे तुझसे प्यार है, कोई मेहरबानी तो नहीं ।
कुछ बेक़रारी भी थी
कुछ बेक़रारी भी थी, तरार भी ।रात लंबी भी थी, ईमानदार भी ।
दानव
एक है दानव ।नाम है उसका मानव ।
भारत
सौगंध खाता हूं कि विश्वास की इमारत नहीं तोड़ूंगा ।अपने देश को हिंदुस्तान नहीं भारत बोलूंगा ।
शराब छोड़ दी मैंने
शराब छोड़ दी मैंने ।शराफ़त छोड़ दी मैंने ।शराफ़त छोड़ दी मैंने ।और भी कुछ बाकी था तो,शररत छोड़ डी मैंने |
किस्से और कहानियों का दौर
किस्से और कहानियों का दौर नहीं रहा ।अब मैं शराब की ओर नहीं रहा ।
आज़ादी
सारी बोतल बाथरूम में बहादी ।हो मुबारक मुझको यह आज़ादी ।
मगर मैं लड़ता हूं
कभी मैं टूटता हूं, कभी मैं जुड़ता हूं ।कुछ ऐसे ही सौ बार, मगर मैं लड़ता हूं ।
मेरी और उसकी
मेरी और उसकी बहुत जमती है ।वह मुझसे दूर रहता है और मैं उससे ।
चमगादड़
चमगादड़ जैसे वीरानों में ।मशहूर हूं मैं दीवानों में ।
हम दोनों
हम दोनों ही कुछ आगे बढ़े ।मैं उसकी तरफ़, वह मुझसे दूर ।
कुछ तो बात है मुझमें
कुछ तो बात है मुझमें,मैं अब तक ज़िंदा हूं ।