तीन बजे वाला थप्पड़

रात आधी जली, आधी बुझी सी थी | जैसे सूरज पर किसी नटखट कमीने ने पानी डाल दिया हो ना, एकदम वैसी | ग्रांट रोड रेलवे स्टेशन के नेमप्लेट के नीचे, अपने नकली जे.बी.एल. के हेडफोंस में नाइनटीस के कुमार सानु के गाने सुनते-सुनते, साहिल ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था | कम से कम लग तो ऐसा ही रहा था |

देर रात हो चुकी थी | अँधेरा तो शहर को पकड़ चूका था पर साहिल ने अब तक ट्रेन नहीं पकड़ी थी | बस अपना सर आगे-पीछे हिला रहा था – मस्ती में बैठे-बैठे ही झूम रहा था | शायद खाली ट्रेन की फिराक़ में था |

एक खाली ट्रेन आई तो थी, पर उसके पहले सज-धज के एक सुंदर लड़की आयी और उसके बगल में आकर बैठ गयी | क्या लाल लिपस्टिक, क्या मिनिस, क्या गोरा रंग और क्या जवानी – एक साथ ब्यूटी का बम्पर पैकेज लग रही थी और पूरा ध्यान सिर्फ अपने स्मार्ट फ़ोन की ओर था |

साहिल को तो नमकीन जवानी का जोश था ही ऊपर से ये भी जलवा हाथ लग गया | शायद उसने मौके पे चौका मारने की सोच ली थी | सेक्शन गरम हो चूका था |

“हाय” कहके बात शुरू तो की पर लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया | फिर याद आया की हेडफोंस तो निकाले ही नहीं | हेडफोंस निकाला और फिर ट्राई किया |

हाय |

कुछ बात तो बनी पर एक ट्रेन ज़ोर से आवाज़ करती हुई प्लेटफार्म से निकली और लड़की ने क्या कहाँ कुछ पल्ले ही नहीं पड़ा |

एक खाली ट्रेन आयी | लड़की उस ट्रेन के लेडीज फर्स्ट क्लास डिब्बे में चढ़ गयी और “शिट यार” ऐसा मन में सोच के साहिल ट्रेन के लेडीज डब्बे के ठीक साथ लगे जेंट्स फर्स्ट क्लास डिब्बे में चढ़ गया | वो ट्रेन में चढ़ गया और उसकी आँखें उस सुंदर लड़की पर गड गयी |

हिंदी फिल्म रंग का गाना – तुम्हें देखें मेरी आँखें, इसमें क्या मेरी खता है – लूप में साहिल के नकली जे.बी.एल. के हेडफोंस में बज रहा था और वो बार-बार उस लड़की की और देखता और फिर अपने स्मार्ट से भी स्मार्ट फ़ोन में घुस जाता |

पर वो ये नहीं जानता था की वो लड़की भी उसे देख रही है |

लोकल ट्रेन अपने मस्ती में सन-सन करके एक स्टेशन से दुसरे स्टेशन पहुँच रही थी | सिर्फ एक बार उन दोनों की आखें टकराई | दोनों दिल कुछ ऐसे धडके की अगले ही स्टेशन पे दोनों उतर गए | लड़की उतरते ही ऑटो-रिक्शा स्टैंड के पास भागने लगी | साहिल भी बेशर्मों की तरह उसके पीछे भागने लगा | पता नहीं उस पर इस बार कौनसा जानवर सवार था ?

लड़की झट से एक ऑटो-रिक्शा मैं बैठी और चल दी | साहिल ने भी हाथ-पैर जोडकर एक ऑटो-रिक्शा वाले को उसका पीछा करने के लिए मना लिया | क्या सीन था – एकदम सुपर फिल्मी | लड़की का ऑटो-रिक्शा एक सुनसान जगह पर रुक गया और साहिल ने शायद इशारा समझ लिया और अपना ऑटो-रिक्शा भी रुका दिया |

लड़की ऑटो-रिक्शा वाले को पैसे देकर आगे चलने लगी | साहिल पीछे-पीछे कुत्ते के जैसे धीरे-धीरे भागने लगा |

अंजली सुनो, प्लीज़ रुक जाओ |

क्या है साहिल? क्यों मेरा पीछा कर रहे हो? मैं कबसे देख रही हूँ |

हाँ, मुझे तुमसे बात करनी है, इसलिए पीछा कर रहा हूँ |

बात करते-करते साहिल ने अंजली का हाथ पकड़ लिया | दोनों बोहोत गुस्से में लग रहे थे | रात काफी हो चली थी | चारों तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा था पर दिलों में बिजली की गडगडाहट काफी ऊंची थी |

अब क्या है साहिल, फिर से क्यों आ गए तुम ?

अंजली यार…

मैं तुम्हारी यार नहीं हूँ |

हाँ बाबा, सॉरी, अंजली, पिछली बार तुमने मुझे बोलने का मौका ही नहीं दिया | सब एकदम अचानक खत्म हो गया |

हाँ तो ?

मैंने अपनी गलतियों को रियलआईज़ कर लिया है | मैं समझ चूका हूँ | तुम्हे भी और खुद को भी |

साहिल, मुझे तुम्हरे सार ड्रामे पता है, स्टॉप दिस और भाग जाओ यहाँ से | समझ लेते तो पहले ही आ जाते | अब याद आई ?

हाँ अंजली, आ जाता पर हिम्मत नहीं हुई | और याद तो बोहोत आयी |

हाँ, वो बिस्तर वाले लम्हों की ही याद आयी होगी तुम्हे ?

नहीं अंजली, याद सब कुछ आया, हर पल, हर लम्हा पर सामने आने की हिम्मत नहीं हुई |

दोनों में काफी देर बातें चली और अचानक अंजली ने साहिल के दाहिने गाल पर एक कस के थप्पड़ जड़ दिया |

कुछ देर तक दोनों एक दुसरे को देखते रहे और फिर अंजली वहां से चली गयी | थोड़ी दूरी पर उसका किराये का मकान था | साहिल सर झुकाए, नीचे वाले होंठ को दबाये, अपने स्मार्ट से भी स्मार्ट फ़ोन में घुस गया | टाइम देखा – तीन बज चुके थे |

साहिल निराश था | सालों बाद अपनी गलतियों का एहसास हुआ था और उन गलतियों की माफ़ी मांगने की हिम्मत हुई थी | अंजली तो अचानक ही रिश्ता तोड़कर चली गयी थी | उन दोनों में क्या हुआ था ये तो सिर्फ उन दोनों ही पता था पर उलझन को सुलझाने की पहली पहल सहिल ने की थी | उसे लगा था की पूरी कहानी सुनने के बाद शायद अंजली का दिल बदल जायेगा पर अफ़सोस, ऐसा हुआ नहीं |

रात की खामोशियों में आधी-अधूरी कोई पुरानी कहानी पूरी करने की कोशिश हुई, कुछ बातें मैली और कुछ क्लियर हुई | रात की खामोशियों में शुरुआत का दी एंड और दी एंड की शुरुआत हुई |

थप्पड़ तो बोहोत करारा था, काश मैंने भी एक लगाया होता तो उसका भी दिमाग ठिकाने आया होता |

ऐसा सोचते हुए साहिल ने फिर अपने नकली जे.बी.एल. के हेडफोंस सर पर लगाये और नाइनटीस के कुमार सानु के गाने सुनते-सुनते ऑटो-रिक्शा की तलाश में लग गया |

बड़ी मुश्किल से एक ऑटो-रिक्शा मिला और बैठते ही एक एस.एम्.एस. आया – प्लीज़ कम होम | आई एम् सॉरी |

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