ज़िंदगी हमे यह कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |
गुज़रे दिनों की धुप थी क़बूल,
क्यों बारिश कहाँ से ले आयी ?
किसी अटके हुए पल की तरह |
किसी माथे की बल की तरह |
किसी सवाल-ए-बेहाल की तरह|
किसी जले हुए काल की तरह |
गोया खींच के वहाँ से ले आयी,
खुश थे जहाँ से ले आयी |
ज़िंदगी हमे यह कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |
ना खबर थी अपनी,
किसी और की क्यों रखते ?
उधार खुद अपने पर था,
किसी और का क्यों रखते ?
एक अपना ही दिल था सीने में बर्बाद |
मासूम दिल किसी और का क्यों रखते ?
इसलिए शायद ज़िंदगी यहाँ ले आयी,
यार अजब !
ज़िंदगी हमे यह कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |
