सर झुकेगा नही,
लहू से नहाकर आएंगे |
लोहे की दीवार तोड़ कर,
मंज़िल तक पहुँच जायेंगे |
इंसानियत है तलवार हमारी,
कभी ना हम घबराएंगे |
ए ख़ुदा,
तेरे घर में अपना नाम-ए-शहर रोशन कर आएंगे |
सलाम मुंबई !
सर झुकेगा नही,
लहू से नहाकर आएंगे |
लोहे की दीवार तोड़ कर,
मंज़िल तक पहुँच जायेंगे |
इंसानियत है तलवार हमारी,
कभी ना हम घबराएंगे |
ए ख़ुदा,
तेरे घर में अपना नाम-ए-शहर रोशन कर आएंगे |
सलाम मुंबई !