आज परस्पर शराब पीयेंगे मैं और तु |
और फ़िर मृदुल भाव से करेंगे गुतुर्गु |
साक़ी तेरे मैकदे का दरवाज़ा कभी ना बंद हो |
सब आओ, जग भी लाओ, पीकर बोलो हाला हु |
चाँद के ऊपर बैठकर हम पीयेंगे ऐसी है कल्पना |
जीवन थोडा है, प्यास बड़ी, खत्म हो दौर है आरज़ू |
तु पीने की कीमत तो बोल, साक़ी ?
मैं अपने आप को निछावर कर दूंगा,
जैसे हुए थे निछावर प्रेम में लैला-मजनू |
