वक़्त गुज़रता है, पैर भी फिसलता है ।
ज़िंदगी में यार, सब कुछ कहाँ मिलता है ।
और आगर सब कुछ मिल भी जाए तो,
किसने दिया, कितना दिया, कहाँ पता चलता है ।
वक़्त गुज़रता है, पैर भी फिसलता है ।
ज़िंदगी में यार, सब कुछ कहाँ मिलता है ।
और आगर सब कुछ मिल भी जाए तो,
किसने दिया, कितना दिया, कहाँ पता चलता है ।