मैं हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हूँ |
मैं पंडित, मौलवी, मैं कसाई हूँ |
मुझसे ना पूछो ज़ात मेरी,
मैं वह फटे कपडे की सिलाई हूँ |
अलग-अलग है मेरे रूप जगत में,
कभी मैं किसान, कभी सिपाही हूँ |
मैं दिवाली हूँ, मैं ईद हूँ |
कभी मैं बहन, कभी भाई हूँ |
किसी मासूम पर ज़ुल्म की मैं दास्ताँ,
वह शर्म, वह दर्द, वह जगहंसाई हूँ |
कभी गरम जलता दिमाग हूँ |
कभी रोशिनी दिखती दियासलाई हूँ |
मैं ही हूँ प्रेम का आसमान,
मैं ही नफ़रत की खाई हूँ |
कभी दान की रोटी,
कभी काली कमाई हूँ |
सबसे खूबसूरत हूँ और अजब भी,
मैं अल्लाह, मूसा, नानक, साईं हूँ |
