एक सैलाब आने को है |
उसका जवाब आने को है |
अपना घर ज़रा पक्का कर लूँ,
सावन बेहिसाब आने को है |
मेरे ही इश्क़ में क़यास नहीं था,
वह एक और नक़ाब भी दिखने का |
संभल जाने में ही भलाई है |
ख़ुदा एक सबक सिखाने को है |
मैं ही मैं हूँ वह अजब,
जिसे खुद अभी अज़ाब सुनाने को है |
