कितना ख़ामोश यह पानी है

कितना ख़ामोश यह पानी है |
सबकी अपनी-अपनी कहानी है |

कोई ना जाने इसका राज़,
यह कहानी किसी ने ना जानी है |

जो दिल में है वह कह दो आज |
यहाँ कोई नहीं जो अंतर्यामी है |

प्यार, इश्क, मोहब्बत है काफ़ी,
ज़िंदगी फानी है, आनी है, जानी है |

यह ग़ज़ल अजब है पर मेरी ज़ुबानी है |
कितना ख़ामोश यह पानी है |

2 thoughts on “कितना ख़ामोश यह पानी है

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