मज़ा कुछ और है

फ़िर ट्रेन में लटककर जाने का मज़ा कुछ और है |
वो उम्र भी मस्त थी, इस उम्र का मज़ा कुछ और है |

रगों में चालीस के कीड़े दौड़ रहे है |
मज़ा पहले भी था पर अब मज़ा कुछ और है |

शराब की बोतल ही अपना स्विमिंग पूल थी,
अब शराब को हाथ से पीने का मज़ा कुछ और है |

पहले रोज़ मिलते-जुलते थे सब यार अजब,
अब व्हात्सप्प पे मिलने-जुलने का मज़ा कुछ और है |

आगे कितने दिन बचे है पता ही नहीं |
ये दिन गिनने का मज़ा कुछ और है |

3 thoughts on “मज़ा कुछ और है

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