एक नुस्ख़ा है

एक नुस्ख़ा है !
इसका है, उसका है |
मगर काम पक्का होगा |
आज नहीं तो कल अच्छा होगा |

एक नुस्ख़ा है !
गरुड़ की आँख,
आदमी की काख,
छिपकली की पूछ,
पानवाले की मूछ,
मंत्री की कुर्सी की टांग,
मुर्गे की बांग,
संत्री की लाल बत्ती,
दुश्मनों की कट्टी,
इन सबको एक मटके में भरो,
और धीरज धरो |
फिर डालो खुन्नस,
पिला-मीठा अनानास,
राम-रहीम-इसा-मूसा ,
सनसनसन-सुसा-सुसा |
दांडी का थोड़ा नमक डालो,
बॉलीवुड की चमक डालो,
हिला मस्त रपा-रप ,
एकदम घपाघप |
माँ की दाल,
भालू की खाल,
करोड़ों का घोटाला ,
बिना चाबी का ताला,
ये सब डालके घुमाओ ,
थोड़ा बहार घूम आओ |

एक नुस्ख़ा है!
जो कर देगा कमाल,
बदल देगा हाल |
ये सब मिलके जब खाएंगे ,
तब जाकर अच्छे दिन आएंगे |

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