चकले की एक शाम

शाम का समय है | गाडियों के हॉर्न, गालियों और ९० के दशक के गाने माहोल बना रहे है | अलग-अलग उम्र की औरतें माचिस की डिब्बी जैसे झोपड़ियों के बाहर खडी हैं | परेशान, कमीने, गुसैल और भूखे मर्द उन औरतों को अश्लील निगाहों से देख रहे | पुलिस की गाडी बार-बार चक्कर मार रही है | कुछ नंगी आखें ग्राहक के शिकार में है |

देर रात, एक नाबालिग़ लड़की को काली-पीली टैक्सी से घसीटकर बाहर लाया जा राह है | उसे खूब पीटा जा रहा है | वो सहायता के लिए पुकार रही है पर कभी कोई नहीं आता | उस अबला को माचिस की डिब्बी जैसे एक झोपडी में ले जाया जाता है और बंद कर दिया जाता है |

कमरा धुएं से भरा हुआ है | कुछ देर बाद एक लम्बी चीख़ के बाद ज़ोर-ज़ोर से रोने की आवाज़ आती है |

यही है चकले की एक शाम |

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