खड़े ** पे धोखा

अबला डिम्पी आखिर १८ साल की हो ही गयी |

इसी ख़ुशी में, आदि ने एक शानदार पार्टी का आयोजन किया और हॉस्टल के कुछ ख़ास दोस्तों को बुलाया था | सेक्टर २६ के एक छोटे-मोटे रेस्टोरेंट में पार्टी चल रही थी और उसने ऊपर अपने और डिम्पी के लिए एक सिंगल रूम बुक किया हुआ था |

सारा हॉस्टल आदि-डिम्पी के प्रेम-सीन को जानता था | दोनों की जोड़ी खूब जचती थी, जैसे – रोमियो और जूलिएट, खून और रवानी, व्हिस्की और पानी, कॉनडॉम और सिगरेट इत्यादि-इत्यादि |

आह !

सुंदर जोड़ी थी |

प्रेम-सीन तो दो साल से चल रहा था पर सेक्स-सीन नहीं बन पा रहा था | बस यही बात आदि को बोहोत खलती थी | सब कुछ हो चूका था, सिवाय उस प्रेम-निर्वाण के | होता भी कैसे, डिम्पी ने उसके सामने ज़िद्द पकड़ रखी थी—जब तक १८ की नहीं हो जाउंगी, नो सेक्स |

बेचारा आदि, करता भी क्या ?

आदि सीदा-सादा और अपने माँ-बाप का इकलौता लड़का था | थोड़ी शराफत अभी बाक थी और माँ-बाप ने भी सेफ-एंड-स्लो सेक्स के सलाह दे रखी थी |

कंट्रोल नहीं हो रहा था |

पर आज आखिर वो दिन आ ही गया था | खूब पीने-पिलाने के बाद आदि और डिम्पी अपने बुक किये हुए सिंगल रूम में घुस ही गए | झट दरवाज़ा बंद करके, आदि नशे में धूत डिम्पी को लेकर बिस्तर पर कूद पड़ा |

सालों से भूखा-प्यासा सेक्स-ऋतू से वंचित उसने डिम्पी को एक ही मिनट में अधनंगा कर दिया | डिम्पी भी इस प्रेम-सावन और शराब में मस्त थी |

डिम्पी, आज आखिर वो दिन आ ही गया |

येस डिअर |

आई लव यू वैरी मच |

मुझे बोहोत अच्छा लग रहा है, आदि |

आह ! आह !

आदि, मुझे कभी छोड़ोगे तो नहीं ना ?

नहीं यार डिम्पी, क्या बात करती है तू ? मैं शादी भी सिर्फ तुझसे ही करूँगा |

आदि |

तुझे अच्छा लग रहा है ना डिम्पी ?

येस |

आई लव यू वैरी मच |

आदि, हम आज ही शादी कर लेते है ना ?

ये सुन के आदि हक्का-बक्का रह गया | तुरंत उठा और दीवार पर पीठ लगाकर बैठ गया | दिमाग में वैसे ही सेक्स के इलावा कुछ और सोचने के क्षमता नहीं थी, ऊपर से शादी की बात ?

वो भी १८ में ?

क्या बात कर रही हो ?

सही बात कर रही हूँ | मैं तुझे तन-मन से तो पति तन-मन ही चुकी हूँ अब बस तू मेरी मांग भर दे |

क्या बोल रही है ? शादी को तो टाइम है ना ?

है, पर आज ही क्यूँ ना जब हनीमून भी होने ही वाला है तो ? टेम्पोररी शादी ?

ठीक है |

आदि का दिमाग भी तेज़ था | उसने झट से बाजू में पड़े कांच के ग्लास को तोडा, और उसके एक टुकड़े से अपने लेफ्ट हाथ के अंगूठे को काट कर डिम्पी की मांग में भर दी |

दोनों एक दुसरे को लिपट गए |

डिम्पी ज़ोर से चिल्लाई |

आदि, फ़क मी !

सच ?

हाँ, आज मैं पूरी तरह तेरी हो गयी हूँ | तू जो चाहता है कर सकता है मेरे साथ |

वाह !

आदि, कॉनडॉम है ना ?

हाँ, और सिगरेट भी |

खून सूख गया था | नशा बढ़ रहा था |

उसने रूम की लाइट बंद की और दोनों एक दुसरे में डूब गए | एक हो गए, जैसे – रोमियो और जूलिएट, खून और रवानी, व्हिस्की और पानी, कॉनडॉम और सिगरेट इत्यादि-इत्यादि |

१८ सालों का गरम लावा था | काफ़ी देर तक उबलता रहा फ़िर घनघोर बारिश में भीग कर भुझ गया | आदि मन ही मन अपनी प्रचंड उपलब्धि से खुश था |

डिम्पी टोटल-टल्ली हो चुकी थी | अँधेरे कमरे एक दुसरे की बाँहों में दोनों बातें करने लगे |

डिम्पी, थैंक्स अ लॉट |

आदि !

आज तुमने मुझे एक अनोखा गिफ्ट दिया है | १८ साल से जो तुमने किसीको नहीं दिया वो मुझे दिया | पर सच बता, कैसा लागा पहली बार ?

मस्त !

पर डिम्पी, एसा क्यूँ लग रहा था की सब इतनी आसानी से हो गया ? कुछ दर्द भी नहीं हुआ दोनों को और खून भी नहीं निकला ज़रा भी ?

आदि, मैं स्पोर्टस में थी ना इसलिए |

अच्छा ?

डिम्पी वैसे ही टोटल-टल्ली हो चुकी थी और वैसे भी शराब सच ही बुलवाती है |

बचपन में एक बार दूर के अंकल ने ज़बरजस्ती की थी | भाई से बताया तो उसने सुना नहीं | फ़िर थोड़े साल के बाद स्कूल में भाई एक दोस्त घर आया, उसको मैं बोहोत अच्छी लगती थी – उसके साथ हुआ | उसके साथ काफी बार हुआ | स्कूल के लास्ट इयर में मेरा एक बॉयफ्रेंड था – उसके साथ हुआ एक-दो बार | उसका एक कुत्ता था – सुने साथ भी ट्राय किया | कॉलेज में फर्स्ट इयर में फैशन शो डायरेक्टर के साथ हुआ एक बार | वो डायरेक्टर मुझे एक-दो बार पेज-३ में ले गया था | तुझसे छुपके गयी थी | वहां ग्रुप सेक्स हुआ था एक बार…और एक बार…पर आई लव यू आदि…शादी…

कुछ तो और बोलने की कोशिश करते-करते आखिर हुई १८ साल की अबला डिम्पी सो गयी | कभी हवस का शिकार बनी, कभी काम-उत्तेजना की | कभी मन नहीं रुका, कभी तन | पर शराब कभी किसीसे झूठ नहीं बुलवाती |

शरीर के सारे खड़े पुर्जे बैठ गए थे तो आदि बिस्तर से उठा और उसने रूम की लाइट ऑन की | उसे अपनी टेम्पोररी शादी का गिफ्ट समज ही नहीं आ रहा था | उसने अपने कटे अंगूठे को देखा |

खून सूख गया था |

फ़िर डिम्पी की खून भरी मांग को देखा |

खून सूख गया था |

कभी अपने कटे अंगूठे को देखता, कभी डिम्पी की खून भरी मांग को |

देखता ही रह गया |

 

3 thoughts on “खड़े ** पे धोखा

  1. ultra modern life style ko bakhubi prastut kiya h aapne..
    Aap accha lihte hai…
    I invite you to please visit my vblog and give me your two minutes and listen to my poem, would be happier if you share feedback.

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