ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |
गुज़रे दिनों की धुप थी क़बूल,
क्यों बारिश कहाँ से ले आयी ?

किसी अटके हुए पल की तरह |
किसी माथे की बल की तरह |
किसी सवाल-ए-बेहाल की तरह|
किसी जले हुए काल की तरह |

गोया खींच के वहाँ से ले आयी,
खुश थे जहाँ से ले आयी |
ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |

ना खबर थी अपनी,
किसी और की क्यों रखते ?
उधार खुद अपने पर था,
किसी और का क्यों रखते ?

एक अपना ही दिल था सीने में बर्बाद |
मासूम दिल किसी और का क्यों रखते ?

इसलिए शायद ज़िंदगी यहाँ ले आयी,
यार अजब !
ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?
खुश थे जहाँ से ले आयी |

 

9 thoughts on “ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

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