याद है मुझे

याद है मुझे, वो मुलाक़ात आखरी थी |
तेरे-मेरे बीच में वो बात आखरी थी |

तूने मुझे उठवा लिया दुनिया से,
मुझे याद है, वो कायनात आखरी थी |

तेरे ख़ल्क़ मैं नागवार ही रहा,
तेरी बनायीं हुई मख़लूक़ात आखरी थी |

तेरे ही जलवों पर सब लूटा दिया,
मुझे याद है, वो इल्तिफ़ात आखरी थी |

अपने आप को खुद ही दफ़न कर आया हूँ,
मेरी यहाँ ये वजिबात आखरी थी |

अब इसके बाद नहीं फ़ना होगा ये अजब,
मुझे याद है, वो वफ़ात आखरी थी |

9 thoughts on “याद है मुझे

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