या तुम थी ?

ये मेरे बिस्तर पे सिलवटें कैसी,
रात का जादू था, या तुम थी ?
आ रही है जाबाज़ा दिलरूबा खुशबू,
रात का जादू था, या तुम थी ?

इत्र से भीगे मोहब्बत में,
हर सांस से पिघल गया तन |
लोहा पिघल मोम हुआ ज़मीन पर,
रात का जादू था, या तुम थी ?

कितने नमूने प्यार के,
दिखाए तुमने सारी रात |
अभी तन चहक रहा है,
रात का जादू था, या तुम थी ?

धीरे-धीरे, रफ्ता-रफ्ता,
हर अंग में दौड़ने लगी मोहब्बतें |
एक चुभन हुई अजब सी,
रात का जादू था, या तुम थी ?

 

8 thoughts on “या तुम थी ?

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