उफ़क़ के उस पार

चांदिनी रात है, सोने की कायनात है,
एक नया जहान है उस पार |
मुस्कुराते दिन है, ख़ुशी के पल है,
हर राह की मंज़िल है |
उफ़क़ के उस पार |

कौन जिये इस बेक़द्र जहान में बेसबब ?
जाने कहाँ जाएँ कैसे, कहाँ और कब ?

आओ इंसानियत को ले जाते हैं दूर |
हर तरफ हो कोहे-ए-नूर ही कोहे-ए-नूर |

सुख है, अमन है, प्यार है, चाहत है उस पार |
इबादत है, मोहब्बत है, खुदाई है |
उफ़क़ के उस पार |

कीजिये मोहब्बत जिसके बदले मोहब्बत मिले |
कीजिये इबादत जिसके बदले जन्नत मिले |
ना कीजिये बेवफाई के सिलसिले,
कीजिये रोशिनी जिसके बदले शफ़क़ मिले |

एक ऐसे जहान की तमन्ना है मुझको,
जहाँ मोहब्बत मेहबूबा हो, तन्हाई भी हो यार |
एक ऐसा ही जहान है, यार अजब,
उफ़क़ के उस पार |

 

10 thoughts on “उफ़क़ के उस पार

  1. आप सर बहुत अच्छा लिखते है मैं आपकी पोस्ट पड़ता हु आप लिखते रहिये

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