तुझसे मिलने की आरज़ू

तुझसे मिलने की आरज़ू तो बोहोत थी, लेकिन,
तेरे दरवाजे तक आये हम औए रुक गए |

सीना चौड़ा था तेरे इश्क़ में, लेकिन,
मार गुरूर की ऐसी पड़ी के झुक गए |

वो सामने बैठा है, मेरा नहीं, लेकिन,
क़यामत ऐसी के टूट सब ताल्लुक गए |

काम ना आयी सब सीखी तीरंदाज़ी अजब,
क़ातिल बढे आये ऐसे के निशाने चूक गए |

 

4 thoughts on “तुझसे मिलने की आरज़ू

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