तेरा कुछ

तेरा कुछ जायेगा नहीं, मेरा कुछ रहेगा नहीं |
ऐसा क्यों सोचते हो की ज़माना कुछ कहेगा नहीं |

आखिर सामने आ ही जायेगा वो कतरा बनकर,
पानी ही सही, बह ही जाएगा, कुछ सहेगा नहीं |

छलक ही जाएगा घड़ा गर ज़्यादा भरोगे,
ऐसा तो होता ही नहीं के कुछ बहेगा नहीं |

बात अजब सी सही, पर जान लो दिल में,
तेरा कुछ जायेगा नहीं, मेरा कुछ रहेगा नहीं |

2 thoughts on “तेरा कुछ

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