मुझे प्रश्न करे

मुझे प्रश्न करे नील ध्रुव तारा,
और कितने दिन रहूँगा मैं बेसहारा |

जवाब कोई भी ना दे सका मैं सिर्फ,
राह ढूंढते बीत गया ये जीवन सारा |

ना जाने किसने ये प्रीत की लौ जलायी,
देख के सूरज की रोशिनी भी शरमाई |

अपने ही साये के पीछे घूमता रहा,
एक दिन देखा के मैंने तुम्हे हारा |

मैं राह नहीं ढूंढ़ता, वो ढूंढ़ती है मुझको |
मेरा ही मन सिर्फ समझता है मुझको |

मेरे चारों और सब कुछ खो गया,
मैं सिर्फ जैसे एक गतिहीन धारा |

मुझे प्रश्न करे नील ध्रुव तारा,
और कितने दिन रहूँगा  मैं बेसहारा |

 

 

4 thoughts on “मुझे प्रश्न करे

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