चुरा लाया हूँ मैं

मेरे यादों के झरोखे से,
एक पल चुरा लाया हूँ मैं |
इसको रखूँगा संभालकर,
जो कल चुरा लाया हूँ मैं |

बड़े जतन से पेड़ पे चढ़कर,
दो-चार आम तोड़ लिए है |
खाते है मिलकर यार,
चल, चुरा लाया हूँ मैं |

आजकल काफ़ी वीराना है ?
शायद माया जाल का ज़माना है ?
पुराने गानों के कैसेटों से,
हल-चल चुरा लाया हूँ मैं |

जिंदगी अभी छुपा-छुपी खेल रही है,
कुछ हम भी खेल लेते है,
कुछ गुब्बारे, कुछ गोटियाँ,
कुछ पल चुरा लाया हूँ मैं |

 

4 thoughts on “चुरा लाया हूँ मैं

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