मन तो चाहता ही रहा

मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
सात सुरों के गीत गाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

रक़्स की रात में,
हर शख़्श की बात में,
ना जाने क्यों, जाने क्यों ?
रात भर याद आता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

इस डाल से उस डाल,
इस हाल से उस हाल,
सोच की पतंग उड़ाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

मुझे बुला रही है वो शफ़क़,
कुछ ख्वाबों की वो कसक,
जिस से रिश्ता निभाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

हर नज़ारा छू लूँ फिर से,
काश, छू लूँ फिर से,
वो आकाश, वो अंबर बुलाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

9 thoughts on “मन तो चाहता ही रहा

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