मैं तुम्हे नहीं बोलता

मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?
छोडो मुझे, मेरी ज़िंदगी में क्यों ज़हर घोलते हो ?

मैं तो तुम्हे नहीं कहता बदलने को ?
तुम मुझे क्यों बदलने को बोलते हो ?
मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?

मेरे दिल की जानिब क्या ताकते रहते हो ?
अपने सड़े हुए दिल को क्यों नहीं टटोलते हो ?
मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?

मैं अजब हूँ, तुम अलग हो, सब अलग-अलग,
मुझे क्यों पुराने तराज़ू में तोलते हो ?
मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ?

3 thoughts on “मैं तुम्हे नहीं बोलता

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