क्यों है ?

ऐसा ही है तो ऐसा क्यों है ?
ये दुनिया है तो खिलौना क्यों है ?

और अगर, ये खेल ही है मालिक |
तो खेल इतना घिनौना क्यों है ?

जब टूटकर बिखर ही जाना है |
तो फिर ये सपना सलोना क्यों है ?

सबको ही आता है बनना अजब,
फिर ये तमाशा, ये जादू-टोना क्यों है ?
ऐसा ही है तो ऐसा क्यों है ?

 

6 thoughts on “क्यों है ?

Thank you very much!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s