क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

empty-hands

हर तरफ भागता-दौड़ता,
कभी मसरूफ, कभी बेकार हूँ
क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

कभी इतना बड़ा धोखा,
कभी घमासान वार हुँ |
क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

लोग रोज़ खरीदते है मुझे,
सस्ते दामों का बाजार हूँ|
क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

मेरी इंसानियत कमज़ोर है,
वहशत में बेशुमार हुँ |
क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

इतनी भूखी हज़रतों में अजब,
अपनी जीत में, अपनी हार हूँ |
क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

 

3 thoughts on “क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

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