मुझे होश नहीं

नौ दिल-ए-गिरफ्तार हूँ, मुझे होश नहीं | मैं तेरा प्यार हूँ, मुझे होश नहीं | कोई साज़ छेड़ मिलान का, ए मेरे फनकार, मैं इतना बेक़रार हूँ, मुझे होश नहीं | ना रोके मुझे कोई बंधन बन कर ज़ंजीर, मैं हवा-ए-फरार हूँ, मुझे होश नहीं | अश्क़-ए-मुस्तक़बिल करेगा, बीमार-ए-दिल का इलाज़, मैं खुद नागवार हूँ, … Continue reading मुझे होश नहीं

मिलता नहीं रास्ता

कहाँ जाएगा मुसाफिर ? मिलता नहीं रास्ता | किस जानिब चलें ज़ीस्त ? मिलता नहीं रास्ता | कितनी झूठी कसम, और वादा कितना है सस्ता, कैसे सफर मुक्कमल हो ? मिलता नहीं रास्ता | नीचे ज़ुल्म-ए-ज़लज़ला, ऊपर खुदा हँसता, किसके पीछे चलें ? मिलता नहीं रास्ता | उसके हाथ में है तलवार जिसे दिया गुलदस्ता, … Continue reading मिलता नहीं रास्ता

मियां

पहले रब्ब का नाम लो, फिर करो क़बूल मियां | सबसे पहला आशिक़ वो, फिर वो नबी-रसूल मियां | झुका के सर उल्फत में, करूँ वो बंदगी | वक़्त सारा परस्तिश में, ऐसी गुज़रे ज़िंदगी मियां | फ़िक्र की माशूका है क़यामत, ज़िंदा को पहनाती कफ़न | लेहद तो फिर भी है शुक्र, होते सिर्फ … Continue reading मियां

मेरे जैसा ही था

पाप की गोद से जन्मा एक तारा, वो तारा जो मेरे जैसा ही था | वो भी था संसार से हारा, वो तारा मेरे जैसा ही था | भीख और उधार थी उसकी ज़िंदगी, उसका हिसाब मेरे जैसा ही था | दुनिया के एक हज़ार सवालों पर, उसका हर जवाब मेरे जैसा ही था | … Continue reading मेरे जैसा ही था

मेरा भारत महान ?

चुल्लू भर पीने को पानी नहीं | पेट भर खाने को नहीं धान | क्या सच में है मेरा भारत महान ? चाँद पर यंत्र भेज दिया, सस्ते में बिकता है ईमान | क्या सच में है मेरा भारत महान ? दूध से है पत्थर नहाता, भूखा रहे रहीम, प्यासा रहे राम | क्या सच … Continue reading मेरा भारत महान ?

मर जाऊंगा

इतनी तारीफ़ ना करो, मर जाऊंगा | बस ! और प्यार नहीं, मर जाऊंगा | अभी और नहीं पी सकता, बस दोस्त ! अभी घर जाऊँगा | इतनी ज़ोर लगाने की ज़रुरत नहीं, कच्ची दीवार हूँ, छूते ही गिर जाऊँगा | समेट लो ना मुझे मुट्ठी में, शीशा हूँ ना, बिखर जाऊँगा | ऐसे ही … Continue reading मर जाऊंगा

मन तो चाहता ही रहा

मन तो चाहता ही रहा | मन तो चाहता ही रहा | सात सुरों के गीत गाता ही रहा | मन तो चाहता ही रहा | मन तो चाहता ही रहा | रक़्स की रात में, हर शख़्श की बात में, ना जाने क्यों, जाने क्यों ? रात भर याद आता ही रहा | मन … Continue reading मन तो चाहता ही रहा

The Power Of Common Man: How A Group Of Individuals Electrified An Entire Village

Mission RISE: Rural India Solar Electrification is one such initiative that proves this fact. It’s one of its kinds of initiative in the nation that is entirely funded and managed by the people, for the people, and of the people. It all started in 2014 when I went on a no-money walking pilgrimage with two … Continue reading The Power Of Common Man: How A Group Of Individuals Electrified An Entire Village

मर रहा है

क्या हाल बताऊँ देश का ? देश में लगता है भगवान मर रहा है | वहाँ मेरा किसान मर रहा है, वहाँ मेरा जवान मर रहा है | कौनसे मज़हब की बात बताऊँ ? मज़हब तो भूखे गिद् खा गए | वहाँ मेरा हिंदू मर रहा है, वहाँ मेरा मुसल्मान मर रहा है हर एक … Continue reading मर रहा है

मैंने काला रंग चढ़ा रखा है

दुनिया ने खूब पंगा पड़ा रखा है, इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है | बेकार ही ज़िंदगी को मुअम्मा बना रखा है, इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है | दिल में इतनी नफरत का लोहा जड़ा रखा है, इसलिए मैंने काला रंग चढ़ा रखा है | सब ने सफ़ेद रंग में अपना रंग … Continue reading मैंने काला रंग चढ़ा रखा है

मैं तुम्हे नहीं बोलता

मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ? छोडो मुझे, मेरी ज़िंदगी में क्यों ज़हर घोलते हो ? मैं तो तुम्हे नहीं कहता बदलने को ? तुम मुझे क्यों बदलने को बोलते हो ? मैं तुम्हे नहीं बोलता, तुम मुझे क्यों बोलते हो ? मेरे दिल की जानिब क्या ताकते रहते हो ? … Continue reading मैं तुम्हे नहीं बोलता

While My Parents Were Dying, I Was Living On Her TV Serial

It was during 1995 when Ravi Rai—the man who revolutionized Indian television—launched Sailaab on Zee TV. This television serial took away the hearts of millions of youth; including me. I was just 15 then, fresh in college and the zephyr—sorry, but I just got to know about this word and can't resist using it—touched me too. … Continue reading While My Parents Were Dying, I Was Living On Her TV Serial

मैं रक़्क़ासा

मैं रक़्क़ासा मेरे यार की | मैं शौक़ीन मेरे प्यार की | मेरी आँखें गोया हज़ार माहताब, जन्नत अधूरी मिसाल मेरे निगार की | शराब ने सीखा मुझसे पीना, नशा बात करता मेरे ख़ुमार की | मुझसे है ये कायनात ज़ायेदा, दीवाने रह तकते मेरे इक़रार की | तेरा-मेरा मिलना तो तय था, देख दास्ताँ … Continue reading मैं रक़्क़ासा

मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ

मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | मैं घायल, मैं बेलगाम हूँ | ऐसा भी नहीं के बेज़ुबान हूँ | मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | ना मैं काबा, ना कब्रिस्तान हूँ | ना दरिया, ना रेगिस्तान हूँ | मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ | मैं ना हिंदू, ना मुसल्मान हूँ | … Continue reading मैं पशेमान हूँ, मैं इंसान हूँ

The 5 MONKEYS AND A LADDER Experiment

The most damaging phrase in the language is: It’s always been done that way. Grace Hopper A group of scientists placed five monkeys in a cage, and in the middle, a ladder with bananas on top. Every time a monkey went up the ladder, the scientists soaked the rest of the monkeys with cold water. … Continue reading The 5 MONKEYS AND A LADDER Experiment

She’s Not My Better Half, But Equal Half

This blog post is a special one. It’s on the energy and inspiration that made me create this blog in 2017. Any guesses? ये तो यारों सबको पता है, वह तो मेरे दिल में रहता है | If your answer is the wife, maybe you’re right to an extent but not exactly right. She’s more … Continue reading She’s Not My Better Half, But Equal Half

The 3 Wise Monkeys Of Gandhi

The 3 wise monkeys and the associated proverb are known throughout Asia and in the Western world. The phrase see no evil, hear no evil, speak no evil first emerged in Japan in the 17th century and was later adopted worldwide as a message of peace and tolerance due to Mahatma Gandhi's visual metaphor of … Continue reading The 3 Wise Monkeys Of Gandhi

मैं नहीं जानता

जिसका कोई नहीं उसका कौन है, मैं नहीं जानता | मेरे नसीब का मालिक कौन है, मैं नहीं जानता | कौन अल्लाह ? कौन भगवान ? मुझे नहीं मालूम | ना पुराण, ना क़ुरान कौन है, मैं नहीं जानता | मुझे तो सिर्फ घर समझ आता है | क्या हिंदुस्तान ? क्या पाकिस्तान ? मैं … Continue reading मैं नहीं जानता

मैं खुनी हूँ, मैं खुनी

मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मैंने क़त्ल किया अरमानों का, मैंने क़त्ल किया फरमानों का, मैं खुद ही खुद का क़ातिल, मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मेरा चार नहीं दो-दूनी, मैं खूनी हूँ, मैं खूनी | मुझसे निग़ाहें नजर-बट्टू, मेरे दिमाग में पागल लट्टू, मैं शमशान का … Continue reading मैं खुनी हूँ, मैं खुनी

मैं इंसान हूँ

मैं इंसान हूँ, मेरा मज़हब कोई नहीं है | मैं इंसान हूँ, इसमें गज़ब कोई नहीं है | मैं ही मैं हूँ, चारों जानिब, मैं ही ख़ुदा हूँ, मेरा रब्ब कोई नहीं है | मैंने बनाया और फिर मैंने मिटाया | मैंने काटा और मैंने ही कटाया | मैं ही क़त्ल हूँ, क़ातिल भी मैं, … Continue reading मैं इंसान हूँ

मैं ही गुन्हेगार नहीं

तुम भी शामिल हो, मैं ही गुन्हेगार नहीं | तुम क्यों मेहमिल हो ? मैं ही गुन्हेगार नहीं | एक वार तुमने किया, एक वार किया मैंने, तुम भी घायल हो, मैं ही फ़िगार नहीं | मिले क्यों मुझे ही कफ़न का इनाम खुदा से ? तुम भी बिस्मिल हो, मैं ही निगार नहीं | … Continue reading मैं ही गुन्हेगार नहीं

मैं आइना हूँ

मैं आइना हूँ, मैं सच बोलता हूँ आपकी छवि बताता हूँ, सच और झूठ तोलता हूँ, मैं आइना हूँ, मैं सच बोलता हूँ | भला करो, भला होगा, बुरा करो, बुरा होगा, मैं लोगों को ये बात याद दिलाता हूँ | मैं आइना हूँ, मैं सच बोलता हूँ | मैं जोड़ता हूँ इंसान को इंसान … Continue reading मैं आइना हूँ

Soporific

Ringa-ringa roses. Pocket full of dozes. All kind of narcotics, COCIANE, LSD and MATRIX. Take them all if you want to get high. There will be no one to hear your sigh. Feel less pain—take COCAINE. Afraid of Mr.D—have LSD. Know the knack—sniff SMACK. Become top brass—smoke GRASS. Avoid anthrax—get high on MANDRAX. Be devilish—consume … Continue reading Soporific

What Is Pride? And Why It Maybe Dangerous?

This blog post is one of those ideas that keep creeping into my mad mind. I am not a learned man and so this may or maybe not be relevant for you at all, but do take a look at my perspective. Alright?! I love interrobang—it gives me so much freedom to express. But anyway, … Continue reading What Is Pride? And Why It Maybe Dangerous?

25 Ways To Help a Fellow Human Being

Don’t know where to start? Here are some ideas. So, take just a few minutes today, and do a kindness for another person. It can be something small, or the start of something big. Ask them to pay it forward. Put a smile on someone’s face. Smile and be friendly: Sometimes a simple little thing like … Continue reading 25 Ways To Help a Fellow Human Being

यूँही

खत्म कर दो सब प्यार के किस्से तुम, यूँही | जी लेने दो मुझे ख्वाब-ए-गफलत में, यूँही | तुम आज आयी हो जब मेरे हाथ खाली है ? ले जाओ और कुछ नहीं तो मेरी जान तुम, यूँही | इन सपनों से कोई पूछे की नींद से दोस्ती क्यों है ? इस मायूसी से कोई … Continue reading यूँही

ये उस वक़्त की बात है

ये उस वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी अंजान थी | ये उस वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी बेजान थी | दुनिया का पहला निवाला चखा था हाथों से, ये उस वक़्त की बात है, जब ज़िंदगी हैरान थी | हम दोनों ने एक ही थाली से खाया था निवाला, ये उस वक़्त की … Continue reading ये उस वक़्त की बात है

मैं आदमी

आज़ाद देश का ग़ुलाम बंदा हूँ | मैं इंसान नहीं, एक धंधा हूँ | चुप रहो तो कहते है मुझे खुदगर्ज़, लड़ता हुँ तो कहते है के खून गंदा है | कहाँ है जलाना मेरे बस में ? मैं सूरज नहीं, चंदा हूँ | मुझे में नहीं है झूठ बोलने का ढंग, मैं आदमी ही … Continue reading मैं आदमी

समझ नहीं आता

वो मुझे समझ नहीं पाते, मैं उन्हें समझ नहीं पाता | ये कैसा रिश्ता है अजब ? मुझे समझ नहीं आता | खुदामंडी में बहुत से खुदा बिक रहे है, कौनसा ख़ुदा खरीदूं ? मुझे समझ नहीं आता | मुद्दत से उनके दिल से बात करने की कोशिश की, किस अदा से बयां करूँ ? … Continue reading समझ नहीं आता

नेता

परसों तुझे टीवी पे देखा, अरे ! तू तो कमाल बन गया | तू तो बादशाह था, साला अभी हमाल बन गया | सारे देश को बेचने का बोझ तूने ही उठा लिया | सारे बचत का पैसा तूने अकेले ही लूटा दिया | गज़ब है ! तेरे हाथ में पेन होता तो टैगोर बन … Continue reading नेता

मुझे वो सब याद है

मुझे वो सब है याद जो कभी हुआ ही नहीं | वो एक आशियाँ आबाद जो कभी हुआ ही नहीं | मुझे वो सब याद है तेरे-मेरे तालुकात, और वो एक इत्तिहाद जो कभी हुआ ही नहीं | मुझे वो सब याद है तेरी हिचकिचाहट, और वो संग, फुवाद जो कभी हुआ ही नहीं | … Continue reading मुझे वो सब याद है

मैखाने में

एक शमा जलाये रखना मैखाने में | मैं आऊंगा रात मैखाने में | उनकी याद है दिल में, उनकी साँसों में मेरी साँस है | उनकी आदत है बेइन्तहां मुझे, उनकी तस्वीर लगाये रखना मैखाने में | प्यार के गीत मैं गुनगुनाता हूँ सदा, मौत ने मेरी बनाया है मुझे रिंद-ए-मैक़दा | उनकी बदन की … Continue reading मैखाने में

मेरे गाँव की बात

दिन हो, या हो चांदिनी रात, बजते ताशे जैसे दूल्हे की बारात | ऐसा प्यारा गाँव है मेरा और मेरे गाँव की बात | दिन में सूरज की पूजा होती, रात में होता काम दूजा | सभी मिलकर रहते है, ज्ञानी, पंडित हो या खोजा | लस्सी और शराब की नदियाँ बहती है, ऐसी है … Continue reading मेरे गाँव की बात

मेरा परिचय

मैं हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हूँ | मैं पंडित, मौलवी, मैं कसाई हूँ | मुझसे ना पूछो ज़ात मेरी, मैं वो फटे कपडे की सिलाई हूँ | अलग-अलग है मेरे रूप जगत में, कभी मैं किसान, कभी सिपाही हूँ | मैं दिवाली हूँ, मैं ईद हूँ | कभी मैं बहन, कभी भाई हूँ | किसी … Continue reading मेरा परिचय

लेकिन

कुछ मैं भी करता हलाल लेकिन | जीवन में रहा सिर्फ मलाल लेकिन | करता मैं भी दुनिया मैं मसीहाई, अजब ही रहा मैं फिलहाल लेकिन | बन जाते मेरे भी हाथ देने वाले, ख़ुदा ने रखा मुझे बेहाल लेकिन | दिखाना चाहता था चांदिनी रात उसको, उस रात रंग चाँद का था लाल लेकिन … Continue reading लेकिन

Positive Ideas To Stop Negative Thinking

Negative thinking can ruin your life. It’s not a joke; this is one of the major obstacles to happiness. Even when you’re on your way to achieving something great, the negative thoughts can stress you out. I said the wrong thing again. How could I be so stupid? I hate this job. But I couldn’t … Continue reading Positive Ideas To Stop Negative Thinking

लाशें

हर तरफ पड़ी है लाशें | बेबस, बेशक खड़ी है लाशें | नंगी आँखें समुंदर गोया, आधी जली फुलझड़ी है लाशें | अपनी की क़बर कन्धों में लादे, बेख़ौफ़ मौत से बड़ी है लाशें | क़ुरबानी के नाज़-मीनार के तले, ज़िंदा मिसाल गड़ी है लाशें | सफ़ेद उड़ान कैदी वक़्त की, पैरों में हथकड़ी है … Continue reading लाशें

Y-सिंड्रोम

मोहित का दिमाग भी उसकी वासना जैसा ही गरम और अस्थिर था | ये डूड तो कभी एक जगह पर टिकता ही नहीं था | कभी इस डाल तो कभी उस डाल, कभी इधर डाल तो कभी उधर डाल | क्या ? अपनी नाक | आप क्या समझ बैठे ? लेकिन दिमाग में - इस … Continue reading Y-सिंड्रोम

बिछड़ा यार

मंदिर गया, मस्जिद गया, वेद पड़ी, कुरान रटी, इधर गया, उधर गया, धागा पहना, ताफीज़ पहनी, घंटी बजायी, माला जपी, मोमबत्ती जलाई, गुरबानी सुनी, तस्बीह की, सजदा किया, नंगे पैर चला, उजली सोच राखी, कला जादू किया, गंगा नहाया, सबके काम आया, पर बिछड़ा यार नहीं मिला | मंदिर गया, मस्जिद गया, वेद पड़ी, कुरान … Continue reading बिछड़ा यार

क्यों कहते हो मुझसे ?

क्यों कहते हो मुझसे के यार ना करो ? क्यों कहते हो मुझसे के प्यार ना करो ? खुद तो मांगते हो ख़ुदा से हज़ार आँखें, मुझसे कहते हो के आँखें चार ना करो | शौक़ है तुमको क़त्ल-ए-सर-ए-आम का, मुझसे कहते हो जान निसार ना करो | खुद तो मोज़ेचा बने फिरते हो जहान … Continue reading क्यों कहते हो मुझसे ?

Lost About Your Purpose In Life? Read On

Do you have a sense of purpose? I had been after years for more than a decade and finally, I have made it; I think so at the moment. The goals that foster a sense of purpose are ones that can potentially change the lives of many; including yours. Indeed, a sense of purpose appears to … Continue reading Lost About Your Purpose In Life? Read On

शराफ़ात छोड़ दी मैंने

कितनी बार कहूँ ? शराफ़ात छोड़ दी मैंने | अब शराब नहीं पीता, उनके जैसे नहीं जीता | शराब तो शरीफ़ लोग पीते है | शराब पिके झूमते है | औरों की बातें करते है | गंदी-गंदी बातें | झूठ बोलते है | कभी शेर, कभी बंदर, कभी सुअर बन जाते है | अब शराब … Continue reading शराफ़ात छोड़ दी मैंने

क्यों है ?

ऐसा ही है तो ऐसा क्यों है ? ये दुनिया है तो खिलौना क्यों है ? और अगर, ये खेल ही है मालिक | तो खेल इतना घिनौना क्यों है ? जब टूटकर बिखर ही जाना है | तो फिर ये सपना सलोना क्यों है ? सबको ही आता है बनना अजब, फिर ये तमाशा, … Continue reading क्यों है ?

It’s Tough To Restart Life At 38 But It’s Possible

It surely is. But not impossible. If a dumb-f***ing-bugger like me can, you can, everyone in this world can. All it needs is a little madness, little fortune, little planning, little determination, little guts and an understanding soulmate. My 4-year long sabbatical taught me good lessons. it taught me to open my eyes, heart, and mind … Continue reading It’s Tough To Restart Life At 38 But It’s Possible

क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

हर तरफ भागता-दौड़ता, कभी मसरूफ, कभी बेकार हूँ क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ? कभी इतना बड़ा धोखा, कभी घमासान वार हुँ | क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ? लोग रोज़ खरीदते है मुझे, सस्ते दामों का बाजार हूँ| क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ? मेरी इंसानियत कमज़ोर है, वहशत में बेशुमार … Continue reading क्या मैं सिर्फ एक औज़ार हूँ ?

कुछ ऐसे, कुछ वैसे

हर सु निफाक़ छायी है, कुछ ऐसे, कुछ वैसे | अँधेरी शफ़क़ आयी है, कुछ ऐसे, कुछ वैसे | चूस लो मेरे खून का आखरी क़तरा, दे दो मुझे ज़िंदगी का भी ख़तरा | बदल दिया है मेरे इस खून को लोहे से, और फिर, चुंबक से खिंचवाई है, कुछ ऐसे, कुछ वैसे | मेरे … Continue reading कुछ ऐसे, कुछ वैसे

कोई है कहीं

कहीं ज़मीन, आसमान कहीं | कोई है कहीं, कोई है कहीं | अँधेरे को सूरज नहीं दरकार, एक मचलती हुई लौ ही सही | कोई है कहीं, कोई है कहीं | तू ज़िंदा है तो ये कर अजब, उतार ला स्वर्ग को यहीं | कोई है कहीं, कोई है कहीं | हर दिल बदल सकता … Continue reading कोई है कहीं

कोशिश जारी है

हे राम, हे राम,हे श्याम, हे श्याम | बचाओ ! मामला भारी है, कोशिश जारी है | सिंग-किंग, गांधी-आंधी, चोर अधिकारी है, कोशिश जारी है | रात-दिन, सुबह-शाम, जिन-रम, श्याम-राम, सब आज्ञाकारी है, कोशिश जारी है | केस-ठेस, नोट-वोट, पैसा-वैसा, ऐसा सबने मारी है, कोशिश जारी है | पाना-खोना, खोना-पाना, खेल-खिलौना | सुपर ! ये … Continue reading कोशिश जारी है

Life Of A Happiness And Mental Health Coach

In this blog post, I want to share about the life of a happiness coach and emotional wellness volunteer. It seems fun. In fact, it is—it’s the way how you define fun. I became one a few years ago due to the deep interest and requirement of the subject. Most of us are unhappy and … Continue reading Life Of A Happiness And Mental Health Coach