मुझे होश नहीं

madness

नौ दिल-ए-गिरफ्तार हूँ, मुझे होश नहीं |
मैं तेरा प्यार हूँ, मुझे होश नहीं |

कोई साज़ छेड़ मिलान का, ए मेरे फनकार,
मैं इतना बेक़रार हूँ, मुझे होश नहीं |

ना रोके मुझे कोई बंधन बन कर ज़ंजीर,
मैं हवा-ए-फरार हूँ, मुझे होश नहीं |

अश्क़-ए-मुस्तक़बिल करेगा,
बीमार-ए-दिल का इलाज़,
मैं खुद नागवार हूँ, मुझे होश नहीं |

तेरी राह तकते-तकते यार अजब,
मैं खुद बन गया इंतज़ार हूँ, मुझे होश नहीं |

मिलता नहीं रास्ता

who

कहाँ जाएगा मुसाफिर ? मिलता नहीं रास्ता |
किस जानिब चलें ज़ीस्त ? मिलता नहीं रास्ता |

कितनी झूठी कसम, और वादा कितना है सस्ता,
कैसे सफर मुक्कमल हो ? मिलता नहीं रास्ता |

नीचे ज़ुल्म-ए-ज़लज़ला, ऊपर खुदा हँसता,
किसके पीछे चलें ? मिलता नहीं रास्ता |

उसके हाथ में है तलवार जिसे दिया गुलदस्ता,
कहाँ खो गयी है शफ़क़ ? मिलता नहीं रास्ता

हर बार ये दिल दिल्लगी करके फसता है अजब,
किस जानिब चले ज़ीस्त ? मिलता नहीं रास्ता |

 

मियां

sufi

पहले रब्ब का नाम लो,
फिर करो क़बूल मियां |
सबसे पहला आशिक़ वो,
फिर वो नबी-रसूल मियां |

झुका के सर उल्फत में,
करूँ वो बंदगी |
वक़्त सारा परस्तिश में,
ऐसी गुज़रे ज़िंदगी मियां |

फ़िक्र की माशूका है क़यामत,
ज़िंदा को पहनाती कफ़न |
लेहद तो फिर भी है शुक्र,
होते सिर्फ मुर्दे दफ़न मियां |

ज़र्फ़-ए-नज़र जो उठी पहले,
उस पहली नज़र को सलाम |
सर नहीं झुके नमरूद पे,
चाहे हो सर कलाम मियां |

क्या आज इतना इतरा रहे हो यार तुम भी ?
भूल गए क्या ?
हम है पल दो पल के मेहमान मियां |

किया या ना किया,
क्या फर्क पड़ता है जब दिल से ना हो ?
पढ़-पढ तो ज्ञान बहुत कमाया,
पर क्या किया कोई कर्म मियां ?

रक़्स-ए-बिस्मिल से जवान गुलिस्तां,
है अजब इसका बाग़बान |
ना मैं जानू फ़ारसी या दरी,
ना इश्क़ के इलावा कोई ज़ुबान मियां |

 

मेरे जैसा ही था

universe

पाप की गोद से जन्मा एक तारा,
वो तारा जो मेरे जैसा ही था |
वो भी था संसार से हारा,
वो तारा मेरे जैसा ही था |

भीख और उधार थी उसकी ज़िंदगी,
उसका हिसाब मेरे जैसा ही था |
दुनिया के एक हज़ार सवालों पर,
उसका हर जवाब मेरे जैसा ही था |

हरी काई थी ज़मीन उसकी,
उसका रास्ता मेरे जैसा ही था |
मेरी तरह वो भी था अकेला,
उसका वास्ता मेरे जैसा ही था |

सावन-बाधो में वो ना सोया,
टूटा कोई हिस्सा मेरे जैसा ही था |
जो खोया था उसने भी,
वो किस्सा मेरे जैसा ही था |

हर रास्ते आधे ही चले,
उसका हर किनारा मेरे जैसा ही था |
अपने प्यार की खातिर जो बनाया,
वो मिनारा मेरे जैसा ही था |

कुछ दिन चमका गर्दिश में,
उसका अजब हाल मेरे जैसा ही था |
तरसता रहा वो भी प्यार को,
बेदिल-बेहाल मेरे जैसा ही था |

 

मेरा भारत महान ?

india

चुल्लू भर पीने को पानी नहीं |
पेट भर खाने को नहीं धान |
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

चाँद पर यंत्र भेज दिया,
सस्ते में बिकता है ईमान |
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

दूध से है पत्थर नहाता,
भूखा रहे रहीम, प्यासा रहे राम |
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

मुफ्त की आज़ादी, चोरी की चाल,
फिर भी बुलंद है झूठी शान |
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

खून चूसते नेता-अभिनेता,
खेलते है खुद अपने ही बनाम |
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

मुखौटे वालों की है वाह-वाह,
सच्चे चेहरे है बदनाम |
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

क्या सच में इसका है नाम ?
क्या सच में यही है एक जहान ?
क्या सच में है मेरा भारत महान ?

 

मर जाऊंगा

remember-me

इतनी तारीफ़ ना करो, मर जाऊंगा |
बस ! और प्यार नहीं, मर जाऊंगा |

अभी और नहीं पी सकता,
बस दोस्त ! अभी घर जाऊँगा |

इतनी ज़ोर लगाने की ज़रुरत नहीं,
कच्ची दीवार हूँ, छूते ही गिर जाऊँगा |

समेट लो ना मुझे मुट्ठी में,
शीशा हूँ ना, बिखर जाऊँगा |

ऐसे ही नागवार गुज़री है ज़िंदगी,
और दुआ ना दो मुझे, मर ही जाऊँगा |

तो क्या हुआ जो अभी हूँ अजब ?
कुछ वक़्त गुज़रते सुधर ही जाऊंगा |

मन तो चाहता ही रहा

girl-and-dog

मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
सात सुरों के गीत गाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

रक़्स की रात में,
हर शख़्श की बात में,
ना जाने क्यों, जाने क्यों ?
रात भर याद आता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

इस डाल से उस डाल,
इस हाल से उस हाल,
सोच की पतंग उड़ाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

मुझे बुला रही है वो शफ़क़,
कुछ ख्वाबों की वो कसक,
जिस से रिश्ता निभाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |

हर नज़ारा छू लूँ फिर से,
काश, छू लूँ फिर से,
वो आकाश, वो अंबर बुलाता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |
मन तो चाहता ही रहा |