कहाँ से कहाँ तक

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कहाँ से कहाँ तक आ गए हम,
साहिल से तूफ़ान तक आ गए हम |
ज़िंदगी का साथ तो निभाया बहुत,
पर चाहत से नफरत तक आ गए हम |

जिसे दिया था साज़ दिल का,
वो क्यों बैठा है अपने होंठ कर बंद ?
जाने वो क्या कमी थी गीतों में,
महफ़िल से वीराने तक आ गए हम |

वो कसमें जो मैंने दी थी उन्हें,
वो वादे जो वो निभा ना पाये |
ना जाने वो क्या बेरुखी थी,
मंज़िल से आगाज़ तक आ गए हम |

तक़दीर में ना थी हुकूमत दिल की,
पर दिल में क़ैद है यादें अजब |
इस शाम-ए-ग़म में याद आते,
तुम्हारे दरवाज़े तक आ गए हम |

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