किसी हथेली की मैल

किसी दिल की धड़कन बनकर चूर हुआ,
किसी हथेली की मैल बनकर दुर हुआ |

वक़्त से पहले ही मेरी जवानी पहुँच गयी,
मेरे आने से पहले मेरी कहानी पहुँच गयी |

किसी ज़रुरत की कीमत बनकर मजबूर हुआ,
किसी हथेली की मैल बनकर दुर हुआ |

ज़िंदगी इतनी वीरान हो गयी कर्म से,
कांधो पे अपनी लाश उठा रहा हुँ शर्म से |

अपनी तमाम दौलत से यार खरीद ना सका,
ज़ेर-ए-दस्त थी दुनिया पर प्यार खरीद ना सका |

अपने नमक के लिए कोई हलाल खरीद ना सका,
दुकाने तो बहुत थी पर माल खरीद ना सका |

दिल जीतने का कमाल खरीद ना सका,
अपने ही पसीने के लिए रुमाल खरीद ना सका |

हासिल कुछ ना हुआ पर तजुर्बा ज़रूर हुआ,
ज़मीन पे गिरकर अजब चकनाचूर हुआ |

किसी दिल की धड़कन बनकर चूर हुआ,
किसी हथेली की मैल बनकर दुर हुआ |

 

2 thoughts on “किसी हथेली की मैल

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