हज़ार बार चले हम

ज़ेर-ओ-ज़बर उल्फत लेकर दिल में,
खुद अपने तुड़के कर हज़ार बार चुके |
बिछड़ने की आरज़ू लेकर दिल में,
हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके |

अपनी ही शर्मिंदगी का बोझ लेकर,
सर क़दमों पर हज़ार बार झुके |
जुदाई की तमन्ना का सोज़ ये के,
हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके |

कहीं आखरी भी आवाज़ सुनके हमारी,
शायद कदम हज़ार बार रुके |
इश्क़ मैं भी आवाज़ सुनकर तुम्हारी,
हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके |

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