गया तो था

listening.jpg

गया तो था बड़ी ज़ोर-शोर से,
लौट आया वापिस उसी ओर से |

मन तो बिना पंख का पंछी,
कभी कटा ही नहीं इस डोर से |

बड़ी कठिन है राहें ज़ीस्त की,
भागता ही रहा उस छोर तक, इस छोर से |

कुछ हाल-ए-दिल ऐसा हुआ अजब,
वो बयां करती रही आहिस्ता-आहिस्ता,
और मैं बोलता रहा—ज़ोर से, हुज़ूर, ज़रा ज़ोर से |

Thank you very much!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s