दिल से ना खेलो

hearts

दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा |
मुस्कान पर ऐतबार नहीं, न जाने कब लूट जायेगा |

बिस्तर पर दो सिलवटे, इनका साथ छूट जाएगा |
दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा |

आँखें सच बोलती है, पकड़ा तुम्हारा झूठ जाएगा |
दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा |

दिल में जगह नहीं बाकी, ना और दर्द का घुट जाएगा |
दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा |

संग क्यों है गुफ्तगू ? तुम्हारा अजब रूठ जायेगा |
दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा |

 

Thank you very much!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s