2017: Gratitude To All My Readers And Followers Across The Globe

I am good at story-telling and hence, my wife always advised me to start a blog but I didn't do it. I only started a blog as late as 2017 and it has been a wonderful journey. I have written a blog post almost every day. I really enjoy writing. It's a beautiful way to … Continue reading 2017: Gratitude To All My Readers And Followers Across The Globe

इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला

रब्बा भर दे खुला है झोला, इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | उसको देख के दिल ये डोला, इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | अब तो दिल है उबलता शोला, इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | क्या तूने दरवाज़ा खोला, इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | लाइफ बना दे, आई ज़ोला, इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला | अजब ये बम का गोला, इश्क़-मोहब्बत, कोका-कोला |  

इधर भी है, उधर भी

कुछ मजबूरियाँ इधर भी है, उधर भी | आग दिल में इधर भी है, उधर भी | खामोश हम भी है, वो भी है, तमस दिल में इधर भी है, उधर भी | देखें तो कितनी पास है, सोचें तो कितनी दूर | हाँ, वही है मेरी सुनी आँखों का नूर | ज़िंदगी से बढ़कर … Continue reading इधर भी है, उधर भी

There’s Receiving In Every Giving

Many of us grew up believing that it’s nobler to give than to receive. This proclamation safeguards us from becoming self-centered monsters—scanning our environment to see what we can extract to fill ourselves. But this may turn us into a narcissist because we think we become great as we’re giving, and just giving. But I have a … Continue reading There’s Receiving In Every Giving

मुझे याद करना

ये दिल जो कभी रूठ जाए, मुझे याद करना | चुपके से जब आंसू बहाये, मुझे याद करना | ये दुनिया बहुत छोटी है, हार के बाद ही जीत होती है | जब तुम्हे कोई हराये, मुझे याद करना | आशिकी ये दीवानो का काम है, मौत फिर ज़िंदा होने का नाम है | जब … Continue reading मुझे याद करना

70-Year Young Boy From My School

As I walked through the valley of the shadow of death, but wait. WTF am I talking? This is the lyrics of Gangsta's Paradise not what I wanted to say. This year ending madness is playing tricks on my mind. Let's start afresh. As I walked through the premises of my school, many memories met … Continue reading 70-Year Young Boy From My School

हज़ार बार चले हम

ज़ेर-ओ-ज़बर उल्फत लेकर दिल में, खुद अपने तुड़के कर हज़ार बार चुके | बिछड़ने की आरज़ू लेकर दिल में, हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके | अपनी ही शर्मिंदगी का बोझ लेकर, सर क़दमों पर हज़ार बार झुके | जुदाई की तमन्ना का सोज़ ये के, हज़ार बार चले हम, हज़ार बार रुके | … Continue reading हज़ार बार चले हम

हाथ नहीं आती

मेरी ख्वाइशें कभी मेरे साथ नहीं आती | ये तितली की तरह कभी हाथ नहीं आती | चलता ही रहता हुँ अपनी फरमाइश से, राह के अंत पर मंज़िल हाथ नहीं आती | एक सवाल करना था खुदा से मुझे, कब से उसकी कोई हद् हाथ नहीं आती | सोचता हूँ सबको अजब ही बना … Continue reading हाथ नहीं आती

ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं

देखते है सब ग़म दूसरों का, ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं | इनमें भी तो कहानी छुपी है, इनमें भी तो वफ़ा है | इनमें भी तो ज़िंदगी है, इनकी दास्ताँ कोई पूछता नहीं | ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं | एक रात, मैं बैठा था आँखें बंद किये, अपना वफाओं का अज़र … Continue reading ग़म अश्क़ों का कोई देखता नहीं

2017: A Message From Dear Santa!

Christmas is a very special occasion as all our loved ones gather together and enjoy and share very beautiful moments. This way we can enjoy experiences that will always be kept in our hearts as treasured memories. The arrival of a new year means the start of a new stage in our lives, in which we … Continue reading 2017: A Message From Dear Santa!

ग़ुलामाबाद

वो पल का नज़ारा हमेशा याद रहेगा | ग़ुलाम, ज़माना हमेशा तेरे बाद रहेगा | अच्छा ही हुआ की आँखें सलामत रही, तेरे दर्शन से दिल हमेशा आबाद रहेगा | तूने जो जलायी है अमन की लौ दिल में, अब मुझे भी सब से हमेशा विदाद रहेगा | जो तूने बनायीं है जगह इस तरह … Continue reading ग़ुलामाबाद

गया तो था

गया तो था बड़ी ज़ोर-शोर से, लौट आया वापिस उसी ओर से | मन तो बिना पंख का पंछी, कभी कटा ही नहीं इस डोर से | बड़ी कठिन है राहें ज़ीस्त की, भागता ही रहा उस छोर तक, इस छोर से | कुछ हाल-ए-दिल ऐसा हुआ अजब, वो बयां करती रही आहिस्ता-आहिस्ता, और मैं … Continue reading गया तो था

फुर्सत से

मिलेंगे अपने आप से, इस दिल-ए-बेपाप से | बेनक़ाब फुरसत से, मगर कभी फुर्सत से | मैंने नहीं मांगे थे दर्द, कहाँ से आकर घिर गए ? मिटटी के घर पर मेरे बादल, न जाने कहाँ से गिर गए ? मिलेंगे अपने दर्द से, आहें सर्द से | बेनक़ाब फुरसत से, मगर कभी फुर्सत से … Continue reading फुर्सत से

एक सैलाब

एक सैलाब आने को है | उसका जवाब आने को है | अपना घर ज़रा पक्का कर लूँ, सावन बेहिसाब आने को है | मेरे ही इश्क़ में क़यास नहीं था, वो एक और नक़ाब भी दिखने का | मैं ही मैं हूँ वो अजब, जिसे खुद अभी अज़ाब सुनाने को है |

एक पिंजरा सोने का

सबसे अलग मेरा घर है, वो मकान कोने का | ये मेरा घर है, एक पिंजरा सोने का | मेरे घर की दीवारें सुनहरी है, और एक नायाब सा झूला सोने का | ये मेरा घर है, एक पिंजरा सोने का | सोने की सलाखों से देखता हुँ गगन, वही मिलेगा जो नतीजा है बोने … Continue reading एक पिंजरा सोने का

एक नया भगवन

ज़माने को फिर हैरान बनाना चाहता हूँ | मैं एक नया भगवन बनाना चाहता हूँ  | लोगों के दिल में डर को मेहमान बनाना चाहता हूँ | मैं एक नया भगवान बनाना चाहता हूँ | ज़िंदगी को और परेशान बनाना चाहता हूँ | मैं एक नया भगवान बनाना चाहता हूँ | सबसे ऊंचा शहर मैं … Continue reading एक नया भगवन

एक चाबी

इस दुनिया में साला, भरी है कितनी खराबी, हर चाबी का एक ताला, हर ताले की एक चाबी | गले में डाले माला, घुमते है ये शराबी, हर चाबी का एक ताला, हर ताले की एक चाबी | खून तो सब ने कर डाला, लाज ना आई किसे ज़राभी, हर चाबी का एक ताला, हर … Continue reading एक चाबी

दुनिया तमाशा है

दुनिया तमाशा है बारी-बारी | सभी देखते है बारी-बारी | मदारी कौन ये सबको पता है, पैसे सब फेकते है बारी-बारी | दुनिया एक गरम तवा भी है, सब अपनी रोटी सकते है बारी-बारी | वही सामान को अलग-अलग लगाके, फिर वही बेचते है बारी-बारी |

दुनिया जीना चाहती है

दो-चार घूंट प्रेम के पीना चाहती है | जैसे भी हो दुनिया जीना चाहती है | भले नए ना मिले मौके रोज़-रोज़, पुरानी-फटी तक़दीर सीना चाहती है | जैसे भी हो दुनिया जीना चाहती है | अपने अंदर हो न हो तस्वीर उसकी, जगह-जगह मंदिर-मदीना चाहती है | जैसे भी हो दुनिया जीना चाहती है … Continue reading दुनिया जीना चाहती है

In Conversation With—A Snooty Driver

This auto-rickshaw driver was quite frustrated when I sat in his vehicle. It as night time and I am sure he must have had a challenging day. But, somehow we managed to have a striking conversation. Whats'wrong uncle? Why are you so frustrated tonight? What should I tell you? Let it go. No. Tell me. … Continue reading In Conversation With—A Snooty Driver

शेम कथा

शमन जवानी की चोटी पे था | खून में जवानी, बातों में जवानी, दिल में जवानी, जेब में जवानी, जवानी ही जवानी | जवानी तो जैसे रम थी जिसे वो रोज़ ही पीता और जीता था | उम्र २५ की थी पर घमंड एक युग पुराना और स्टाइल फुल फिल्मी | हर पल कुछ नये … Continue reading शेम कथा

दो ही महीनों में

दो ही महीनों में बेहाल हो गया | दो ही महीनों में दिल का ये हाल हो गया | फासले कईं थे दरमियाँ हमारे, दो ही महीनों में कमाल हो गया | जुदा थे तन से, मन से नहीं, दो ही महीनों में ये ख़याल हो गया | हर जानिब उनका ही चेहरा देखा, दो … Continue reading दो ही महीनों में

दिवाली

आयी दिवाली, आयी दिवाली, फिर झूम आयी दिवाली | रंग-बिरंगे फूल खिले है, दीप-धुप खूब जले है, आई शप्पत ! काय गम्मत झाली | आयी दिवाली, आयी दिवाली | सुख से दुःख को मात दिया है, प्रेम ने प्रेम का साथ दिया है, नए सपने, नयी दिशा लेकर, आयी दिवाली, आयी दिवाली | लायी खुशहाली, … Continue reading दिवाली

दिखाई देता है

जहाँ तक सेहरा दिखाई देता है | मेरी तरह अकेला दिखाई देता है | ना कोई फूल है दामन में, ना रंग है कोई और, ना आगाज़, ना कोई अंजाम दिखाई देता है | मेरी तरह वो भी आतिश है, में भी वीरान, वो भी बर्बाद दिखाई देता है | हो फुर्सत तो देखिये ज़ख्मों … Continue reading दिखाई देता है

देर से आने का

बड़ा ही ग़म है अपने देर से आने का | न जाने कौनसा सबब है देर से आने का ? थोड़ा जल्दी आता तो उनसे मुलाक़ात हो जाती | जुस्तजू थी जिसकी, उस मंज़िल से मुलाक़ात हो जाती | बड़े सितमगर थे वो भी, इंतज़ार ना किया, शायद उन्हें भी पता था हमारे देर से … Continue reading देर से आने का

देखता हुँ मैं

एक ही दिन में दो दिन देखता हूँ मैं | अपने आप को रोते देखता हूँ मैं | रात पूरी गुज़री मसरूफियत में, बाकी सबको सोता देखता हूँ मैं | पाया तो कुछ नहीं इस तिजारत में, जो बचा है वो भी खोते देखता हूँ मैं | रूसवा हो गया अजब आँखों से खून देखके, … Continue reading देखता हुँ मैं

छोटी सी बात थी

छोटी सी बात थी, फसाद हो गयी | खुशाल ज़िंदगी बर्बाद हो गयी | सारे जग को एक वजह मिल गयी, तेरी-मेरी लड़ाई शाद हो गयी | क्या तेरा भगवान ? क्या मेरा अल्लाह ? छोटी सी बात थी, रूदाद हो गयी | घर-घर, गली-गली, कफ़न-कफ़न, खून-ए-जंग यहाँ आदाब हो गयी | क़ैद थी नमरूद … Continue reading छोटी सी बात थी

चल पड़ा देखो-देखो

चल पड़ा देखो-देखो, मेरा चक्का इश्क़ का | दिल ने दिल से किया नाता पक्का इश्क़ का | ज़िंदगी से लिया वादा सौ टक्का इश्क़ का | चल पड़ा देखो-देखो, मेरा चक्का इश्क़ का | अजब तो है ऐसा मुरीद हक्का-बक्का इश्क़ का | चल पड़ा देखो-देखो, मेरा चक्का इश्क़ का | सब कुछ लूट … Continue reading चल पड़ा देखो-देखो

जूनियर कॉलेज

दसवी की परीक्षा में सावन को ७८% मिल गए थे | ठीक-ठाक ही थे उस ज़माने में जब हिंदी फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे ने सारे देश में धूम मचा राखी थी | सावन को एक अच्छे कॉलेज में दाखला लेना था तो मुंबई के सुंदर जय-हिंद कॉलेज में जैसे-तैसे आखरी लिस्ट में आखरी नाम … Continue reading जूनियर कॉलेज

चाहत या फिर नसीब

कोई है बहुत दूर, तो कोई है बहुत करीब | दो ही चीज़ों का खेल है सब, चाहत या फिर नसीब | क्या दिया ? क्या लिया ? ये सब झूठ है, बने बनाये है | हमारे दिल में जो आया हम वही करते आये है | हम तो निकले थे घर से पत्थरों की … Continue reading चाहत या फिर नसीब

ब्रेक के बाद !

कुछ ग़ज़लों का सिलसिला रुक जाएगा, फिर बज़्म सजेगी, ब्रेक के बाद ! क़फ़स से अलग रहुँगा कुछ नफ़स, ज़ाहिर कभी छुपा, ब्रेक के बाद ! नए तजुर्बे की तस्वीर देखेंगे, देखेंगे ज़रूर, ब्रेक के बाद ! मिलेंगे, मिलेंगे फिर से अजब, अभी नहीं, ब्रेक के बाद !  

फ़िर बात करते है

तुम अपना खून लाओ, मैं लाऊँ अपना खून, तुम सिंध की चादर लाओ, मैं लाऊँ कश्मीर की ऊन | फ़िर बात करते है तुम्हारी और मेरी दुश्मनी की | लाल बहारें बहुत देखली अब लाल चमन में, तुम अपने वहाँ से अमन लाओ, मैं लाऊँ यहाँ से सुकून | फ़िर बात करते है तुम्हारी और … Continue reading फ़िर बात करते है

At 81, This Man Younger Than Most Of Us

Friendship doesn't see border, culture, caste, creed, race, gender and age. I am a witness to all of it and this time, especially with age. It's not usual for me to connect with someone so elder to me. But it happened; somehow. Maybe there's a divine design. Maybe there's something else. Maybe, there's nothing. Whatever, … Continue reading At 81, This Man Younger Than Most Of Us

दिल से ना खेलो

दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा | मुस्कान पर ऐतबार नहीं, न जाने कब लूट जायेगा | बिस्तर पर दो सिलवटे, इनका साथ छूट जाएगा | दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर टूट जाएगा | आँखें सच बोलती है, पकड़ा तुम्हारा झूठ जाएगा | दिल से ना खेलो हमदम, बिखर कर … Continue reading दिल से ना खेलो

बहुत कुछ खोया

बहुत कुछ खोया पर बहुत कुछ पाया ही नहीं | हर वक़्त का वक़्त आ गया, मेरा वक़्त आया ही नहीं | क्या देखू मैं कोई और जलवे इस जहान के ? मैं सैलाब से कभी निकल पाया ही नहीं | कितने खिलाये मैंने परोस के निवाले उसको, इसने तो एक टुकड़ा भी कभी खिलाया … Continue reading बहुत कुछ खोया

बोहोत हो गया

बोहोत हो गया, कुछ इंतजामात हो जाये | भाई, कोई पीने-पिलाने की बात हो जाए | मैं बदल दूंगा महफ़िल का अंजाम, एक बार शराब से मुलाक़ात हो जाए | कईं दिनों से ज़िंदगी थी नागवार, बड़ी रूखी- सुखी थी, कुछ बरसात हो जाए | आओ, शराब की कसम खा लेते है आज, बहुत हुई … Continue reading बोहोत हो गया

बोहोत दिनों बाद

बोहोत दिनों बाद दिखा एक चेहरा पहचाना सा | इस शहर का कोई है राज़ गहरा पहचाना सा | कुछ जानी-मानी सी ये कैसी प्यास है ? कुछ जाना-माना सा है ये सेहरा पहचाना सा | कितने रंगों की तस्वीर बन गयी है ये सुबह-सुबह, गुज़री रात की ख़ामोशी और अँधेरा पहचाना सा | निज़ाम … Continue reading बोहोत दिनों बाद

देखते है

यूँ तो रंग को लगता है एक अरसा उतरते-उतरते, देखते है क्या गुज़रती है बूँद पे गुहर होने तक | यूँ तो चला ही जाता है अँधेरा रात उतरते-उतरते, देखते है क्या होता है शमा पे सहर होने तक | यूँ तो गुज़र ही जाता है दिन नशे को उतरते-उतरते, देखते है क्या रंगत है … Continue reading देखते है

छोडो ना कोई काम कल पर

छोड़ो ना कोई काम कल पर, पल में ज़िंदगी बदल जाती है | इंसान बदल जातें है, दुनिया बदल जाती है | चेहरे बदल जातें है, तक़दीर बदल जाती है | इंसान वही है, फ़ितरत बदल जाती है, आँखें वही है, नज़रें बदल जाती है | ऐतबार किस पर करे हम, अजब, पलक झपकते मोहब्बत … Continue reading छोडो ना कोई काम कल पर

चलिए कोई बात नहीं

आप हमारे साथ नहीं, चलिए कोई बात नहीं | आप हमारे हो ना सके, चलिए कोई बात नहीं | ज़िंदगी की धुप में अपनों की छाँव ना मिली, आपकी वफ़ा तक़दीर में नहीं, चलिए कोई बात नहीं | गैरों से प्यार मिला पर अपनों ने सितम ढाये, आप चले, हम रुक गए, चलिए कोई बात … Continue reading चलिए कोई बात नहीं

भारत का रहने वाला हूँ

है विपरीत जहाँ की रीत सदा, ऐसे जगह का हाल बताता हूँ | भारत का रहने वाला हूँ, भारत का हाल सुनाता हूँ | उंच-नीच, जाती-भाषा, ये सब का भेद मानते है | गीता-वेदों, क़ुरान-ग्रंथों के विपरीत ही बात दोहराते है | ऐसे ढोंगी लोगों से परम धरम का सवाल उठाता हूँ | भारत का … Continue reading भारत का रहने वाला हूँ

Revisiting Childhood Memories: Mani’s Lunch Home

I have also love South Indian cuisine since childhood and although there are a thousand places to eat in Mumbai, Mani's Lunch Home still is my favorite place to go. When I was in school, the father used to take me here once every month. I used to love eating at this place. The best … Continue reading Revisiting Childhood Memories: Mani’s Lunch Home

छमिया बास्टर्ड

ठीक रात को दस बजे के आस-पास – हमेशा की तरह – सोनु उर्फ़ फॉरटीस ने अपने टपोरी दोस्त गुल्लू के साथ सनम बार में एंट्री ली | फिल्म घातक का - कोई जाए तो ले आये - गाना जोर से बज रहा था | सनम बार फुल रंग-बिरंगी सुंदर नाचती हुई सनमों, धुएं और … Continue reading छमिया बास्टर्ड

Life Is Too Simple, We Complicate It

Before we comprehend the simplicity of life let us understand our role in it. People are complicators; they convert simple things into something horribly complex and difficult to interpret. The only reason we have something called sixth-sense is to complicate things. But then think about it, without making things complicated we might feel extremely dull … Continue reading Life Is Too Simple, We Complicate It