बेइन्तहां, बेसबब

वह बीते लम्हों की किताब,
वह कागज़ की कश्ती,
वह यादों के गाने, वो प्यार की मस्ती,
याद आता है मुझको सब, बेइन्तहां, बेसबब |

गुज़रे थे जो पल चाहत के घर में |
जलाये जो अरमान तेरे सफर में |

वह तेरे बदन की खुशबु,
वह तेरे होठों का गुलाब,
वह तेरे ज़ुल्फ़ के झरने,
वह तेरे चेहरे का आफताब,
याद आता है मुझको सब, बेइन्तहां, बेसबब |

वह कागज़ की कश्ती साहिल पे डूबी |
देखी मैंने आज प्यार की यह खूबी |

उजालों में भी दिखती है परछाई |
साया भी साथ नहीं, ऐसी है तन्हाई |

बिक गयी वो लम्हों की किताब,
सताता है यादों का तेज़ाब,
बस, मौत का इंतज़ार है अब,
याद आता है मुझको सब, बेइन्तहां, बेसबब |

3 thoughts on “बेइन्तहां, बेसबब

  1. Pyaar to amar hota he janaab.badi nazuk cheej he ye;aur aap tejaab ki baat karte hein.fanaa to ek din sabko hona he;aap be-intihaa be-sabab hi sahi muhobbat ki iazzat ki baat to karo-badnaam na kar ishq ko tu ye teri amaanat nahi;khuda ne bakhshi he ye ibaadat hi sahi…

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