औरत

औरत तुझमें है दुर्गा और तुझमें है काली |
तुझमें लक्ष्मी, सरस्वती और तुझमें शेरांवाली |

तेरे ही दूध से हर वीर उस सरहद पर है फ़तेह,
तुही अँधेरा मिटाये जग का, तुझमें ज्योतावाली |

जब भरा पाप का घड़ा, तूने किया वध रावण का,
तेरे ही से हर दिन मनाये होली, है तुझमें दिवाली |

तुही जननी इस जीवन काल की, तुही है मर्यादा |
तुझमें है ग़ज़ल, गीत सब, है तुझमें क़व्वाली |

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